राजस्थान में विधानसभा चुनाव की लड़ाई जोरों पर है. बीजेपी और कांग्रेस सियासी दांव-पेच आजमाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. नाराज और बागी नेताओं की भी खूब मान-मनोव्वल चल रही है. रिझाने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस बीच, जोधपुर जिले की सूरसागर खासी चर्चा में है. यहां से बीजेपी कुल छह बार चुनाव जीती है. अबकी बार तीन बार की विधायक सूर्यकांता व्यास (85 साल) का टिकट काट दिया है और नए चेहरे को मौका दिया है. बीजेपी के इस कदम के बाद व्यास तो चुप्पी साधे हैं लेकिन राजनीतिक माहौल गरमा गया है.
बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक्टिव हुए और 24 घंटे में दो बार सूर्यकांत व्यास (जीजी) से चुनावी चर्चा कर ली. गहलोत ने पहले दिन में बात की. फिर आधी रात (12.30 बजे) को जीजी के घर पहुंच गए. वहां जीजी ने सीएम का माला पहनाकर स्वागत किया. दोनों के बीच करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में कानाफूसी हुई. यहां तक कि गहलोत ने बीजेपी से टिकट कटने पर जीजी के साथ सहानुभूति जताई. इस मुलाकात पर इतनी गहमा-गहमी बढ़ी कि अगले ही दिन बुधवार सुबह बीजेपी के छह पदाधिकारियों ने जीजी के घर डेरा डाल दिया और लंबी मीटिंग भी की.
बीजेपी ने सूरसागर में उतारा है नया चेहरा
दरअसल, बीजेपी ने जोधपुर की 10 विधानसभा सीटों में से दो पर टिकट घोषित कर दिए हैं. इनमें बिलाड़ा में पुराने चेहरे पर भरोसा जताया है. जबकि सूरसागर में नए चेहरे देवेंद्र जोशी को मैदान में लेकर आई है. वहीं, कांग्रेस ने सूरसागर सीट होल्ड पर रखी है. यहां किसी को टिकट नहीं दिया है.
गहलोत की जीजी से मुलाकात के क्या मायने हैं?
सूरसागर सीट पर पुष्करणा वोट जीत-हार तय करते हैं. गहलोत ने पहले पुष्करणा समाज को सौगात दी थी और अब वो जीजी के प्रति सहानुभूति जताकर इस समाज के वोटर्स में सेंधने लगाने के प्रयास में हैं. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस सीट से पुष्करणा समाज से उम्मीदवार उतार सकती है. ऐसे में बीजेपी के वोट बैंक में ना सिर्फ सेंध लगने की आशंका है, बल्कि चुनौती भी बढ़ सकती है. यही वजह है कि गहलोत के जादुई दांव से पहले बीजेपी अपने सभी समीकरण फिट बैठाने के लिए ग्राउंड में एक्टिव हो गई है. बुधवार सुबह जीजी के घर पहुंचे. उनसे मुलाकात की और ऑल इज वेल का मैसेज दिया है.
'सहानुभूति का कार्ड खेल सकते हैं गहलोत'
दरअसल, बीजेपी के अंदरुनी सूत्र बताते हैं कि जीजी का इलाके में अच्छा खासा वर्चस्व है. वे 6 बार से विधायक हैं. पार्टी संगठन में पकड़ है. ऐसे में गहलोत सहानुभूति का कार्ड खेलकर जोधपुर के सियासी समीकरण गड़बड़ा सकते हैं. गौरतलब है कि जोधपुर जिले में 10 सीटें हैं. इनमें सात सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. साल 2018 के चुनाव में बीजेपी सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई थी. एक सीट आरएलपी के खाते में गई थी. जोधपुर शहर की तीन सीटों में से दो पर कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं.
सूरसागर सीट का सियासी समीकरण क्या हैं?
सूरसागर सीट पर अल्पसंख्यक और ब्राह्मण वोटर्स की अच्छी खासी संख्या है. दोनों समाज के वोटर्स में ज्यादा अंतर नहीं है. इसके अलावा, ओबीसी, सिंधी और कायस्थ समाज के वोटर्स का प्रभाव है. बीजेपी इस सीट पर पिछले तीन चुनावों से ब्राह्मण कार्ड खेलकर जीत हासिल कर रही है. इससे पहले ये सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व थी. चूंकि जोधपुर की तीन सीटों पर बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटर्स हैं. ऐसे में इस सीट पर कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर बाकी सीटों को साधने की कोशिश करती है. हालांकि इस बार सूरसागर से कांग्रेस ब्राह्मण कार्ड खेलने की तैयारी में है.
गहलोत से मुलाकात पर क्या बोलीं जीजी
सूर्यकांता व्यास (जीजी) ने कहा, सीएम का फोन आया था. उन्होंने पूछा था कि आप जाग रही हों तो घर आ रहा हूं. मिलना चाहता हूं. वो हमारे घर आए और हालचाल पूछा. उसके बाद चले गए. सूरसागर या शहर सीट को लेकर गहलोत से कोई चर्चा नहीं हुई. उनसे दो महीने से मुलाकात नहीं हुई थी, इसलिए वो मिलने चले गए. बीजेपी पदाधिकारियों से बातचीत में जीजी ने पार्टी छोड़ने जैसी चर्चाओं को अफवाह बताया. सूत्र बताते हैं कि आधी रात में मुलाकात से पहले दिन (मंगलवार) में भी दोनों की मुलाकात हुई थी.
दो दिन पहले गहलोत ने क्या कहा था...
सोमवार को गहलोत ने कहा था, बीजेपी ने सूरसागर की विधायक सूर्यकांता व्यास का टिकट काट दिया है. जीजी ने दो बार मेरे लिए बयान दिया और मुझे आशीर्वाद दिया था. अब यह सजा जीजी को मिली है. जबकि उनको सम्मान मिलना चाहिए था. दरअसल, जीजी ने गहलोत से जोधपुर के चांदपोल क्षेत्र में पुष्करणा समाज की कुलदेवी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की मांग की थी. उनके आग्रह पर गहलोत ने 4.75 करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति दे दी. इस पर सूर्यकांता व्यास ने उनकी तुलना राजा-महाराजाओं से कर दी थी.
शेखावत के करीबी जोशी को मिला टिकट
वहीं, राजस्थान की सियासत में गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच राजनीतिक हमले और आरोप-प्रत्यारोप का लंबा सिलसिला चला आ रहा है. सूरसागर सीट से जिस नए चेहरे देवेंद्र जोशी को टिकट मिला है, उन्हें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का करीबी माना जाता है. कहा जा रहा है कि जीजी और शेखावत के बीच जुबानी जंग भी चली है. यह भी रोचक है कि पिछले दिनों जीजी ने एक बयान में कहा था कि वो मरते दम तक चुनाव लड़ेंगी. हालांकि, अब बीजेपी से टिकट कटने पर उनकी तरफ से पत्ते साफ नहीं किए गए हैं.