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Rampura Phul Assembly Seat: हाई प्रोफाइल सीट पर इस बार किसका चलेगा जादू?

अंग्रेजों के समय में रामपुरा महाराजा पटियाला रियासत के तहत आता था. जबकि फूल महाराजा नाभा रियासत के नीचे आता था. दोनों शहर अंग्रेजों के समय के बसे हुए हैं. रामपुरा फूल (Rampura Phul) का रेलवे स्टेशन भी अंग्रेजों के समय का बना हुआ है.

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Rampura Phul assembly seat- सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
Rampura Phul assembly seat- सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्रिटिश काल में फूल महाराजा नाभा के नीचे आता था
  • रामपुरा महाराजा पटियाला रियासत के तहत आता था
  • 2017 में कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह कांगड़ जीते, मंत्री भी बने

पंजाब विधानसभा में रामपुरा फूल सीट की संख्या 90 है और यह सीट राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार की जाती है. इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह कांगड़  (Gurpreet Singh Kangar) ने जीत हासिल की थी. बाद में पंजाब सरकार में मंत्री भी बने.

2011 के जनगणना के अनुसार बठिंडा जिले की कुल आबादी 1388525 है जिसमें 70.89 फीसदी सिख हैं तो 27.41 फीसदी हिंदू हैं. जबकि 1:17 फीसदी मुस्लिम और 0.18 फीसदी ईसाई हैं. वहीं दूसरी जाति के 0.53 फीसदी लोग बसते हैं. बठिंडा में लिंगानुपात की स्थिति बेहद खराब है. प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 865 है जबकि साक्षरता दर 69.6% है. 

बठिंडा जिले में चार तहसील बठिंडा, रामपुरा फूल, मोड मंडी और तलवंडी सबो हैं. रामपुरा फूल बठिंडा से 40 किलोमीटर की दूरी पर है. रामपुरा शहर और उसके साथ 10 किलोमीटर की दूरी पर फूल शहर है. दोनों को मिलाकर ही इसको रामपुरा फूल कहा जाता है.

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अंग्रेजों के समय में रामपुरा महाराजा पटियाला रियासत के तहत आता था. जबकि फूल महाराजा नाभा रियासत के नीचे आता था. दोनों शहर अंग्रेजों के समय के बसे हुए हैं. रामपुरा फूल का रेलवे स्टेशन भी अंग्रेजों के समय का बना हुआ है.

रामपुरा फूल रेल के रास्ते बठिंडा, चंडीगढ़, अंबाला, दिल्ली, श्रीगंगानगर और फिरोजपुर से जुड़े हुए हैं जबकि सड़क के रास्ते यह बठिंडा, चंडीगढ़ और बठिंडा लुधियाना नेशनल हाईवे पर पड़ता है. दोनों शहर अंग्रेजों के समय में जाने-माने शहर थे बस और ट्रेन से जुड़े हुए थे.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1957 से लेकर रामपुरा फूल सीट पर 5 बार इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं तो 4 बार इस सीट से शिरोमणि अकाली दल बादल के उम्मीदवार विजयी हुए हैं. 4 बार इस सीट पर यूनिट पार्टी ऑफ इंडिया के मास्टर बाबू सिंह भी जीत चुके हैं और 2002 में इस सीट पर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे गुरप्रीत सिंह कांगड़ जीते थे.

2017 का जनादेश

2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुरा फूल से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह कांगड़ चुनाव जीते थे. उन्हें 55269 वोट मिले थे. उन्होंने अकाली दल के उम्मीदवार सिकंदर सिंह मलूका और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मनजीत सिंह को मात देकर जीत दर्ज की थी.

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चुनाव में दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल बादल के सिकंदर सिंह मलूका रहे थे जिन्हें 44884 वोट मिले. तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार रहा जिसे 32693 वोट मिले. इसके अलावा इस सीट पर 11 और उम्मीदवार थे जिनको 1000 से कम वोट पड़े थे. 

रामपुरा फूल सीट से जो भी व्यक्ति जीतता है. बस ज्यादातर समय मंत्री जरूर बनता है जिसमें आज के मौजूदा विधायक कांग्रेस पार्टी के गुरप्रीत सिंह कांगड़ जो कई बार मंत्री बन चुके हैं. इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के सिकंदर सिंह मलूका जो लगातार तीन बार मंत्री बन चुके हैं.

रिपोर्ट कार्ड 

गुरप्रीत सिंह कांगड़ पंजाब सरकार में मंत्री हैं और कैबिनेट मिनिस्टर के तौर पर दूसरी बार वह काम कर रहे हैं. विधायक कांगड़ की उम्र 50 साल है और उनके पिताजी का नाम गुरचरण सिंह है. वह रामपुरा फूल सीट के गांव कांगड़ के रहने वाले हैं. 

विधायक कांगड़ ने डीएवी कॉलेज जालंधर से 1986 में बीए किया है. वह पहले खेती बाड़ी करते थे. बाद में राजनीति में आ गए. 2017 के चुनाव में दाखिल हलफनाम में उन्होंने अपनी संपत्ति की कीमत 9 करोड़ 36 लाख रुपये से ऊपर बताई थी और उन्होंने ₹1000000 रुपये की देनदारी है 

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मंत्री कांगड़ के हलफनामे के अनुसार 2017 में उनके ऊपर दो मामले अदालत में चल रहे थे. एक केस में पुलिस अभी तक चालान पेश नहीं किया जबकि दूसरा केस चल रहा है.

 

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