पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने आखिरकार सीएम फेस का ऐलान कर ही दिया. कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने चन्नी के नाम का ऐलान किया. इससे पहले करीब दो घंटे तक राहुल गांधी ने चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के साथ बैठक की थी. काफी देर तक मान-मनौव्वल चला और उसके बाद चन्नी के नाम पर सहमति बनी.
हालांकि, सिद्धू अब भी बड़ी चुनौती हैं. सिद्धू ने कल रैली में राहुल गांधी की मौजूदगी में तल्ख अंदाज में कहा कि वो दर्शनी घोड़ा बनकर नहीं रहेंगे. वो अरबी घोड़ा और बीमार अरबी घोड़ा भी गधों से बेहतर होता है.
सिद्धू अपनी गर्मजोशी, तीखे बोल और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू ने बीजेपी छोड़ दी थी. उस समय उनके आम आदमी पार्टी में जाने की अटकलें थीं. हालांकि, बात सीएम चेहरे पर ही अटक गई. उसके बाद सिद्धू कांग्रेस में आ गए. इस बार भी सिद्धू ने खुद को सीएम उम्मीदवार घोषित करवाने की बहुत कोशिश की, लेकिन चन्नी बाजी मार गए और सिद्धू के हाथ फिर खाली रहे.
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बीजेपी से विदाई...
- सिद्धू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी से की थी. 2004 में सिद्धू राजनीति की पिच पर बैटिंग करने उतरे. उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा. इस चुनाव में सिद्धू ने कांग्रेस के आरएल भाटिया को हराया.
- 2006 में सिद्धू को एक मामले में 3 साल कैद की सजा हो गई. उन्होंने सांसदी से इस्तीफा दे दिया. लेकिन 2007 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से उपचुनाव लड़ने की इजाजत मिल गई और वो दोबारा अमृतसर से सांसद चुने गए. 2009 के आम चुनावों में सिद्धू ने अमृतसर सीट से तीसरी बार जीत दर्ज की.
- 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सिद्धू की बजाय अरुण जेटली को अमृतसर से टिकट दिया. इससे सिद्धू खफा हो गए. इतने खफा कि वो जेटली की रैलियों में भी नहीं पहुंचे. जेटली ये चुनाव हार गए. 2016 में बीजेपी ने सिद्धू को राज्यसभा भेजा, लेकिन वहां से उन्होंने तीन महीने में इस्तीफा दे दिया. बाद में बीजेपी भी छोड़ दी.
आप से भी बात फेल
- बीजेपी छोड़ने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी में शामिल होने की अटकलें काफी तेज थीं. बताया जाता है कि उस समय सिद्धू ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) समेत आम आदमी पार्टी के तमाम नेताओं से गुपचुप मुलाकात की थी.
- उस समय ऐसी चर्चाएं थीं कि सिद्धू ने खुद को सीएम कैंडिडेट बनाए जाने की मांग की थी. हालांकि, आप इसके पक्ष में नहीं थी. क्योंकि सिद्धू पर हत्या का मुकदमा था.
- इसके अलावा सिद्धू अपने और अपनी पत्नी के लिए टिकट चाहते थे. लेकिन आप ने अपने संविधान का हवाला देते हुए दोनों को टिकट देने से भी इनकार कर दिया था. आप का संविधान कहता है कि एक ही परिवार से दो लोगों को टिकट नहीं दी जा सकती.
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कांग्रेस में आए तो अमरिंदर से टकराव
- 2017 के विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सिद्धू कांग्रेस में आ गए. 2017 के चुनाव में कांग्रेस जीती. कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) मुख्यमंत्री बने. सिद्धू को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि, सिद्धू और अमरिंदर के बीच तनातनी चलती रही.
- ये तनातनी तब और बढ़ गई जब 2019 के आम चुनाव में सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू को टिकट नहीं मिली. नवतौज कौर ने आरोप लगाया कि कैप्टन के कहने पर उन्हें टिकट नहीं दी गई. इसके बाद सिद्धू ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि उनकी पत्नी झूठ नहीं बोल रही है.
- जून 2019 में कैप्टन अमरिंदर ने कैबिनेट में फेरबदल किया. सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग ले लिया गया और उन्हें बिजली विभाग सौंप दिया गया. इससे सिद्धू नाराज हो गए. सिद्धू इतने नाराज हुए कि उन्होंने 14 जुलाई 2019 को कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.
- इसके बाद कैप्टन और सिद्धू की लड़ाई खुलकर सामने आ गई. सिद्धू अमरिंदर के कामकाज पर सवाल उठाते रहे. दोनों के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि आलाकमान को बीच में आना पड़ा. कई महीनों तक चली बैठकों के बाद सिद्धू को 18 जुलाई 2021 को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. हालांकि, इसके बाद भी दोनों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ.
फिर भी खाली हाथ ही रहे सिद्धू
- सिद्धू से चल रही तनातनी के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. माना जाता है कि उस समय सिद्धू ने खुद को सीएम बनाने का दबाव बनाया, लेकिन बात नहीं बनी. आलाकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया.
- चन्नी के सीएम बनने के बाद भी सिद्धू के बागी तेवर कम नहीं हुए. 20 सितंबर को चन्नी ने सीएम पद की शपथ ली और 28 सितंबर को सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, सिद्धू को मना लिया गया और उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया.
- सिद्धू ने चन्नी के कामकाज पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया. कई बार ऐसे हालात भी बन गए कि सिद्धू की दखलंदाजी से नाराज चन्नी ने अपने इस्तीफे की पेशकश भी कर दी थी.
- इस बार भी विधानसभा चुनाव में सिद्धू खुद को सीएम फेस घोषित करवाने की पूरी कोशिश में थे. लेकिन हाईकमान ने चन्नी को चेहरा बना दिया.