
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections) से पहले जारी कांग्रेस (Congress) पार्टी के भीतर का दंगल अभी खत्म नहीं हुआ है.
पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ताजपोशी के बाद से ही समर्थकों से मिल रहे हैं. इसी कड़ी में नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर में मौजूद रहे, जहां उन्होंने स्वर्ण मंदिर में माथा टेका.
पंजाब में कांग्रेस का झगड़ा खत्म नहीं हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू किसी भी हाल में कैप्टन अमरिंदर सिंह से सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगेंगे. वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह चाहते हैं कि सिद्धू उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें.
Newly appointed Punjab Congress chief Navjot Singh Sidhu visits Golden Temple in Amritsar.
— ANI (@ANI)
अमृतसर में नवजोत सिंह सिद्धू
नए-नए अध्यक्ष बने नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थकों से मिलना जारी है. बुधवार को नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर में हैं और उनके घर पर विधायकों का जुटना जारी है. नवजोत सिंह सिद्धू का दावा है कि उनके साथ 62 विधायक मौजूद हैं. बता दें कि पंजाब में कांग्रेस के कुल विधायकों की संख्या 80 है. लेकिन पंजाब इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू के साथ सिर्फ 44 विधायक ही मौजूद थे. इसके अलावा जो अन्य करीब 20 से 22 नेता भी मौजूद थे उनमें से ज्यादातर पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग पदाधिकारी थे. 44 विधायक का आंकड़ा ही पंजाब इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में सामने आया है.
सिद्धू ने विधायकों के साथ स्वर्ण मंदिर का दौरा भी किया. बीते दिन सिद्धू अमृतसर पहुंचे थे, जहां उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया. बुधवार को ही नवजोत सिंह सिद्धू का वाल्मीकि मंदिर जाने का भी प्लान है.
सिद्धू के किन बयानों पर भड़के हुए हैं अमरिंदर, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की शर्त मानेंगे नवजोत?

क्या साथ आएंगे दोनों नेता?
नवजोत सिंह सिद्धू को अभी तक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बधाई नहीं दी है. कैप्टन की ओर से साफ कर दिया गया है कि जबतक नवजोत सिंह सिद्धू उनसे सार्वजनिक माफी नहीं मांगेंगे, वो मुलाकात नहीं करेंगे. बीते कुछ समय में सिद्धू द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ किए गए ट्वीट से छवि खराब होने के कारण कैप्टन अमरिंदर उनसे खफा हैं.
यही कारण है कि पंजाब में भले ही कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू के हाथ में कमान दे दी हो. लेकिन अभी तक पूरा संकट टला नहीं है, क्योंकि कैप्टन खुलकर सिद्धू के साथ खड़े होते नहीं दिखाई दिए हैं जो पार्टी की चिंता बढ़ा सकता है.