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गढ़चिरौलीः नक्सल से प्रभावित इस जिले में बीजेपी का है कब्जा

अपने घने जंगलों के लिए पहचाने जाने वाले गढ़चिरौली एक आदिवासी जिला है और यहां पर बड़ी संख्या में गोंड और माडिया समुदाय के लोग रहते हैं. इस जिले में 7 भाषाएं (गोंडी, माडिया, मराठी, हिंदी, तेलुगू, बंगाली और छत्तीगढ़ी) बोली जाती है. इस जिले में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोग भी रहते हैं.

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गढ़चिरौली का एक दृश्य
गढ़चिरौली का एक दृश्य

  • महाराष्ट्र का सबसे ज्यादा नक्सल से प्रभावित जिला
  • 1982 में चंद्रपुर से अलग कर नया जिला बनाया गया

नक्सल से खासे प्रभावित गढ़चिरौली जिला महाराष्ट्र के 36 जिलों में से एक है. गढ़चिरौली जिले का गठन 26 अगस्त 1982 को चंद्रपुर जिले से गढ़चिरौली और सिरोंचा तहसीलों को अलग करके किया गया था. गढ़चिरौली जिला महाराष्ट्र के दक्षिणपूर्वी कोने में स्थित है. यह पश्चिम में चंद्रपुर जिला, उत्तर में गोंदिया, पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य और दक्षिण तथा दक्षिण पश्चिम में तेलंगाना राज्य से घिरा हुआ है.

अपने घने जंगलों के लिए पहचाने जाने वाले गढ़चिरौली एक आदिवासी जिला है और यहां पर बड़ी संख्या में गोंड और माडिया समुदाय के लोग रहते हैं. इस जिले में 7 भाषाएं (गोंडी, माडिया, मराठी, हिंदी, तेलुगू, बंगाली और छत्तीगढ़ी) बोली जाती है. इस जिले में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोग भी रहते हैं. गढ़चिरौली में सागौन व्यावसायिक रूप से उगाया जाता है और बांस का उपयोग विभिन्न शिल्पों के लिए किया जाता है.

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जिले की 86 फीसदी आबादी हिंदुओं की

2011 की जनगणना के मुताबिक गढ़चिरौली की आबादी 1,072,942 थी जिसमें 541,328 पुरुष और 531,614 महिलाएं शामिल हैं. 2001 में यहां की आबादी 970,294 थी. महाराष्ट्र की कुल आबादी का 0.95 फीसदी हिस्सा इस जिले में रहता है. करीब 14,412 स्क्वायर किलोमीटर में फैले गढ़चिरौली में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में 982 महिलाएं हैं. जबकि यहां की साक्षरता दर 74.36 फीसदी है जिसमें 82.31 फीसदी पुरुष तो 66.27 फीसदी महिला शिक्षित हैं. इस जिले में 86.44 फीसदी आबादी हिंदुओं की है जबकि महज 1.96 फीसदी आबादी मुसलमानों की है.

गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट के तहत 3 जिलों से 6 विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें गढ़चिरौली से 3 विधानसभा सीट (गढ़चिरौली, आरमोरी और अहेरी) शामिल है. जबकि चंद्रपुर जिले की 2 विधानसभा सीट चिमूर और ब्रह्मपुरी सीट और गोंदिया जिले की एक आमगांव विधानसभा सीट आती है. फिलहाल आमगांव, आरमोरी, अहेरी, गढ़चिरौली, चिमूर विधानसभा सीट पर बीजेपी और ब्रह्मपुरी सीट पर कांग्रेस का कब्जा है.

बीजेपी के अशोक महादेवराव सांसद

गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट पर इस समय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अशोक महादेवराव नेते सांसद हैं. अप्रैल-मई में हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के डॉ. नामदेव दल्लुजी उसेंडी को 77,526 मतों के अंतर से हराया था. इस चुनाव में बीजेपी के महादेवराव को 5,19,968 वोट जबकि डॉ. नामदेव दल्लुजी उसेंडी को 4,42,442 वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अशोक नेते ने जीत हासिल की थी.

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2008 में परिसीमन के बाद चिमूर की जगह गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई. यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. नए सीट के अस्तित्व में आने के बाद 2009 में यहां पर पहली बार चुनाव कराए गए. इस चुनाव में कांग्रेस के मारोतवरा कोवासे ने जीत हासिल की थी. लेकिन 2014 में बीजेपी के अशोक नेते ने यह बाजी अपने पक्ष में कर ली.

नई सीट के गठन से पहले चिमूर लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. यहां सबसे पहले 1967 में लोकसभा चुनाव हुआ था और रामचंद्र मार्तंड हजर्नवीस चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. 1971 और 1977 के चुनाव में कृष्णराव डागोजी ठाकुर चुनकर लोकसभा पहुंचे. फिर 1980 और 1984 में विलास भाउराव मुत्तेमवार लगातार चुनाव जीते.

दोनों ही राज्यों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे जबकि 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे.

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