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लोकसभा चुनाव 2024: पहले और दूसरे फेज में महिला मतदाताओं ने की कम वोटिंग, क्या हैं इसके मायने?

ईसीआई आंकड़ों के अनुसार, 2019 के चुनावों की तुलना में इस बार पहले दो चरणों में मतदान में 2.8 से 3.3 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है. इस साल पहले चरण के चुनाव में 66.14 प्रतिशत (पुरुष और महिला) और दूसरे चरण में 66.71 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है. 2019 में इन सीटों पर क्रमश: 69.4 और 69.6 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ था. 

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बुलंदशहर में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए वोट डालने का इंतजार कर रहीं महिला मतदाता. (PTI Photo)
बुलंदशहर में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए वोट डालने का इंतजार कर रहीं महिला मतदाता. (PTI Photo)

निर्वाचन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 के पहले दो चरणों में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं के मुद्दों पर अपना प्रचार अभियान केंद्रित करने के बावजूद महिला मतदाताओं की वोटिंग में कमी आई है. यह मंदी क्या दर्शाती है? अधिकांश राज्यों में 2019 की तुलना में 2024 में महिला वोटर्स के मतदान में कमी देखी गई है, जो इस बार निर्वाचन क्षेत्रों में सामान्य वोटिंग ट्रेंड के समान है. 

पहले दो चरणों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मतदान प्रतिशत अधिक गिरा है. 2019 के मुकाबले इस बार पहले दो फेज में पुरुषों की तुलना में महिला वोटों में लगभग 0.8 प्रतिशत अधिक कमी दर्ज की गई है. इसके उलट मेघालय और सिक्किम में महिला मतदान में वृद्धि देखी गई है. लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में इस बार महिलाओं के बीच सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो इन राज्यों में सामान्य मतदान प्रवृत्ति के अनुरूप है. 2019 में भी इन राज्यों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत अधिक रहा था. 

महिलाओं के मतदान प्रतिशत में कमी का क्या मतलब है?

यदि लोकसभा चुनाव 2024 के शेष पांच चरणों में भी यही ट्रेंड जारी रहता है तो महिला मतदाताओं के वोटिंग परसेंटेज में बदलाव इलेक्शन नतीजे को प्रभावित कर सकता है. ईसीआई आंकड़ों के अनुसार, 2019 के चुनावों की तुलना में इस बार पहले दो चरणों में मतदान में 2.8 से 3.3 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है. इस साल पहले चरण के चुनाव में 66.14 प्रतिशत (पुरुष और महिला) और दूसरे चरण में 66.71 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है. 2019 में इन सीटों पर क्रमश: 69.4 और 69.6 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ था. 

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जबकि पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कुल मतदान लगभग 66 प्रतिशत रहा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों में दोनों चरणों में महिलाओं के बीच कम मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया. उदाहरण के लिए, पहले चरण में, महाराष्ट्र में 65.7 प्रतिशत पुरुषों ने मतदान किया, जबकि महिलाओं का मतदान प्रतिशत 61.6 प्रतिशत दर्ज किया गया. दूसरे फेज के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 65.5 प्रतिशत पुरुषों और 59.6 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया. चंद्रपुर, भंडारा गोंदिया और नागपुर जैसे स्थानों के साथ-साथ एमपी, राजस्थान और यूपी के कई निर्वाचन क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं के मतदान प्रतिशत में बड़ा अंतर देखने को मिला.

मध्य प्रदेश में फेज-1 में पुरुषों का मतदान 68.58 प्रतिशत और महिलाओं का 66.91 प्रतिशत रहा. फेज-2 में यह अंतर बढ़कर पुरुषों के लिए 61.54 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 55.37 प्रतिशत हो गया. इसी तरह, उत्तर प्रदेश में पहले चरण में पुरुष मतदान 62.52 प्रतिशत और महिला मतदान 59.53 प्रतिशत दर्ज किया गया. दूसरे फेज की वोटिंग में जेंडर गैप कायम रहा, जिसमें पुरुषों के लिए 56.71 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 53.43 प्रतिशत दर्ज किया गया.

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महिला मतदान प्रतिशत में सबसे अधिक गिरावट (24.79 प्रतिशत अंक) नागालैंड में देखी गई, जिसका मुख्य कारण राज्य में कम मतदान का होना था. इसके अलावा, सीधी, मथुरा, रीवा, पथनमथिट्टा, खजुराहो और मुजफ्फरनगर में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 11 प्रतिशत से अधिक गिर गया. औरंगाबाद, कोट्टायम, इडुक्की, रामपुर, सतना और बागपत में महिला मतदान में पिछली बार की तुलना में 10-11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
 
पिछले चुनाव की तुलना में इस बार पहले दो फेज में कई जगहों पर महिलाएं कम संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंच रही हैं. जबकि 2024 के लोकसभा चुनावों में पहले दो चरण में वोटिंग परसेंटेज कम हुआ है. महिला मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न यह बताता है कि किन जगहों पर लोकतंत्र में उनकी भागीदारी मजबूत बनी हुई है और कहां कम हो गई है. भारत में चुनावी भागीदारी के गुणा-गणित को समझने के लिए ऐसे रुझान महत्वपूर्ण हैं. यह राजनीतिक दलों के लिए एक चेतावनी हो सकती है- कम से कम उनके लिए जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं के मुद्दों पर फोकस किया था.

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