चुनाव आयोग ने ओडिशा में सभी राजनीतिक दलों से सार्वजनिक रैलियों और बैठकों में बच्चों को शामिल नहीं करने को कहा है. आयोग को इस संबंध में कई शिकायतें मिली थीं. ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एन थिरुमाला नाइक ने शनिवार को राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के अध्यक्ष और सचिव को इसे लेकर एक सर्कुलर जारी किया.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार, प्रचार, रैलियों में किसी भी रूप में बच्चों का शामिल नहीं करना चाहिए, जिसमें पोस्टर/पैम्फलेट का वितरण या नारेबाज़ी, चुनावी बैठकों में भाग लेना शामिल है. आयोग ने कहा कि ओडिशा के सीईओ कार्यालय को राजनीतिक दलों द्वारा रैलियों और प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल करने की शिकायतें मिल रही हैं. ओडिशा में एक साथ लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव होंगे.
संवेदना व्यक्त करने पर FIR
केरल पुलिस ने फेसबुक पर कथित तौर पर भारत के चुनाव आयोग के प्रति 'संवेदना व्यक्त करने वाला' (condolences to Election Commission) पोस्टर पोस्ट करने के आरोप में कोच्चि निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. पुलिस ने सोशल मीडिया पर 'चुनाव आयोग के प्रति संवेदना' वाला पोस्टर साझा करने के आरोप में कक्कनड निवासी मोहम्मद शाजी (51) के खिलाफ मामला दर्ज किया.
पुलिस ने इस बाबत कहा कि मामला शुक्रवार को दर्ज किया गया था और हमने उसे गिरफ्तार कर लिया. शुक्रवार को ही जमानत पर रिहा कर दिया गया. मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसावे देना) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के संबंध में वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत दर्ज किया गया था.
20 लोकसभा सीटों पर 26 अप्रैल को चुनाव
FIR में कहा गया है कि पोस्ट को समाज में नफरत को बढ़ावा देने के इरादे से शेयर किया गया था. केरल की 20 लोकसभा सीटों पर आम चुनाव 26 अप्रैल को हुआ था. हाल में चुनाव आयोग पर पक्षपात करने के आरोप लगते रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग हमारे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तो करता है पर पीएम मोदी के प्रति कोई एक्शन नहीं लेता. हाल में पीएम मोदी के भाषण में मंगलसूत्र का जिक्र करने को लेकर भी विपक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी.
चुनाव आयोग ने 16 अप्रैल को प्रेस रिलीज जारी कर बताया था कि एक महीने में आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में 200 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं और 169 मामलों में कार्रवाई की गई है. आयोग ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के एक महीने के भीतर 7 राजनीतिक पार्टियों के 16 प्रतिनिधियों ने मिलकर शिकायतें दर्ज कराई हैं. सबसे ज्यादा शिकायत कांग्रेस और बीजेपी ने दर्ज कराई थीं.