लोकसभा चुनाव 2019 के तहत गुजरात की पंचमहल लोकसभा सीट पर बीजेपी ने फिर अपना परचम लहराया है. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) प्रत्याशी रतन सिंह राठौड़ 428541 वोटों के अंतर से अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को शिकस्त देने में कामयाब रहे. सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर कुल 6 प्रत्याशी मैदान में थे. हालांकि मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा.
2019 का जनादेश
भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) प्रत्याशी रतन सिंह राठौड़ को सात लाख 32 हजार 136 वोट वोट मिले, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार वीके खांट को तीन लाख तीन हजार 595 वोट मिले. 20133 वोटों के साथ नोटा का वोट प्रतिशत 1.86 रहा. नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी के वीरेंद्र पटेल को 9826 वोट मिले. बता दें कि इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुआ था और मतदान का प्रतिशत 61.71 रहा था.
2014 का जनादेश
पिछले चुनाव में इस सीट पर 59.2% मतदान हुआ था जिसमें बीजेपी प्रत्याशी प्रभात सिंह चौहान को 5,08,274 वोट (54.5%) और कांग्रेस प्रत्याशी राम सिंह परमार को 3,37,678 (36.2%) वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
पंचमहल लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोटर चुनाव नतीजों को काफी प्रभावित करता है. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार की हार की वजह छोटे दलों से चुनाव लड़े मुस्लिम उम्मीदवार को बताया गया. कांग्रेस के शंकर सिंह वाघेला महज 2 हजार मतों से हार गए थे. जबकि लोजपा के मुस्लिम उम्मीदवार कलीम अब्दुल लतीफ को 23 हजार वोट मिले और भारतीय मानव सेवा दल के प्रत्याशी मुख्तार मंसूरी को 10 हजार वोट मिले. चुनाव विश्लेषकों ने इन दोनों उम्मीदवारों के बेहतर प्रदर्शन को ही वाघेला की हार का कारण माना.
2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की कुल आबादी 24,08,808 है. इसमें 85.8% ग्रामीण 14.2% शहरी आबादी है. अनुसूचित जाति (SC) की संख्या 5.17% और अनुसूचित जनजाति(ST) की आबादी 14.59% है.
सीट का इतिहास
पंचमहल लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ और यहां से कांग्रेस के मांगालाल गांधी ने जीत दर्ज की. 1962 में हुए दूसरे चुनाव में जीवन दहियाभाई नायक ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की. इसके बाद पंचमहल सीट पर 2009 में चुनाव हुए और भारतीय जनता पार्टी के प्रभात सिंह चौहान ने बाजी मारी. 2014 का आम चुनाव भी बीजेपी के नाम रहा और लगातार दूसरी बार प्रभात सिंह चौहान यहां से सांसद निर्वाचित हुए.
इससे पहले गोधरा सीट के रूप में भी यहां से बीजेपी को जीत मिलती रही. 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने यहां से लगातार दो बार बाजी मारी. गुजरात के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला भी इस सीट से सांसद बने. उन्होंने 1991 के आम चुनाव में बीजेपी के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की.
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