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योगी का गढ़ हिलाने वाले प्रवीण निषाद अब BJP में, जानें गोरखपुर सीट पर क्या पड़ेगा फर्क

प्रवीण निषाद अब योगी की शरण में हैं और गोरखपुर से उम्मीदवार हो सकते हैं. योगी के गढ़ गोरखपुर लोकसभा सीट पर दरअसल निषाद समुदाय का अच्छा खासा दबदबा है. उपचुनाव में जब सपा ने प्रवीण निषाद को उतारा और बसपा ने समर्थन का ऐलान कर दिया तो बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला के लिए राह मुश्किल हो गई थी.

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प्रवीण निषाद (फोटो-ANI)
प्रवीण निषाद (फोटो-ANI)

29 साल बाद योगी आदित्यनाथ के गढ़ में बीजेपी को मात देने वाले निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए. मार्च 2018 में हुए उपचुनाव में प्रवीण निषाद सपा उम्मीदवार के रूप में उतरे प्रवीण निषाद ने बीजेपी के उपेंद्र शुक्ला को 21,881 वोटों से हराया था. अब 12 महीने बाद खुद बीजेपी की शरण में आ गए. प्रवीण निषाद के इस कदम ने गोरखपुर में आगामी चुनाव को काफी रोचक बना दिया है.

प्रवीण निषाद अब योगी की शरण में हैं और गोरखपुर से उम्मीदवार हो सकते हैं. योगी के गढ़ गोरखपुर लोकसभा सीट पर दरअसल निषाद समुदाय का अच्छा खासा दबदबा है. उपचुनाव में जब सपा ने प्रवीण निषाद को उतारा और बसपा ने समर्थन का ऐलान कर दिया तो बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला के लिए राह मुश्किल हो गई थी.

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गोरखपुर में क्या है निषाद वोटों का गणित

उपचुनाव में निषाद मतदाताओं ने प्रवीण निषाद की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी. यहां करीब 3.5 लाख निषाद वोटर हैं. इस बार सपा-बसपा गठबंधन ने राम भुआल निषाद को उतारा है. राम भुआल निषाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भी मैदान में थे लेकिन बीएसपी के टिकट पर. उन्हें योगी आदित्यनाथ ने 362715 वोटों से हराया था. रामभुआल को 176412 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रही थीं सपा की राजमति निषाद. जिन्हें 2,26,344 वोट मिले थे.

इसी तरह 2009 चुनाव की बात करें तो योगी के खिलाफ पुर्वांचल के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी भी मैदान में थे. इस चुनाव में मनोज तिवारी सपा के टिकट पर मैदान में थे. यह चुनाव योगी ने 2,20,271 वोटों से जीता था. इस चुनाव में निषाद समुदाय से आने वाले लाल चंद निषाद को कांग्रेस ने मैदान में उतारा था. उन्हें 30,262 वोट मिले थे.

1984 के बाद कांग्रेस नहीं कर पाई वापसी

गोरखपुर सीट पर आजादी के बाद पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1967 तक ये सीट कांग्रेस के पास रही, लेकिन 1967 में हुए चौथे लोकसभा चुनाव में गोरखनाथ मंदिर से महंत दिग्विजयनाथ ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. 1970 में महंत अवैद्यनाथ ने ये सीट जीती. 1971 में कांग्रेस ने फिर वापसी की, लेकिन 1977 में फिर लोकदल के हरिकेश बहादुर से उसे मात मिली. हालांकि हरिकेश बहादुर ने जीत के बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया.

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1984 में कांग्रेस के मदन पांडे ने यहां से आखिरी बार जीत दर्ज की. उसके बाद आज तक कांग्रेस पार्टी वापसी नहीं कर सकी है. आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ 1989 में गोरखपुर लोकसभा सीट से हिंदू महासभा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद उन्होंने 1991 और 1996 के लिए बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. उसके बाद योगी आदित्यनाथ मैदान में उतरे और 1998 से 2014 तक लगातार जीतते रहे.

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