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नांदेड़ लोकसभा सीट: क्या अपना किला बचाने में कामयाब रहेंगे अशोक चव्हाण?

Nanded Lok Sabha Constituency महाराष्ट्र की नांदेड़ सीट पर 2019 लोकसभा चुनाव के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं. नांदेड़ सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. महाराष्ट्र के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के सामने नांदेड़ में अपना गढ़ बचाने की चुनौती है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में यानी 18 अप्रैल को मतदान होगा. 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए नांदेड़ सीट से कुल 14 उम्मीदवार मैदान में हैं. नांदेड़ महाराष्ट्र के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का गृह क्षेत्र है. कांग्रेस की तरफ से पार्टी के राज्य ईकाई के अध्यक्ष अशोक चव्हाण चुनावी मैदान में हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चिखलीकर प्रताप गोविंदराव को प्रत्याशी बनाया है.

इसके अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) ने अब्दुल समद को टिकट दिया है तो वहीं वंचित बहुजन आघाडी की ओर से भिंगे यशपाल नरसिंह राव चुनाव मैदान में उतरे हैं. बहुजन मुक्ति पार्टी ने मोहन आनंदरराव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ेंगे. गौरतलब है कि महाराष्ट्र की 10 लोकसभा सीटों पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होगा. जिसमें नांदेड़, बुलढाणा, अकोला, अमरावती, हिंगोली, परभणी, बीड, उस्मानाबाद, लातूर, सोलापुर सीटों पर वोट डाले जाएंगे.

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बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में  महाराष्ट्र की 48 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 2 सीट जीतने में कामयाब रही थी. जिसमें अशोक चव्हाण नांदेड़ सीट से निर्वाचित हुए थे. नांदेड़ लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. इस सीट पर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं, इनमें से 15 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की.

इस सीट से अभी कांग्रेस के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सांसद हैं. 2014 के चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद इस सीट से जीत हासिल की थी. उन्होंने बीजेपी के दिगंबर बापूजी पाटिल को हराया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि शिवसेना को 18 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं कांग्रेस को मात्र 2 सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली थी.

नांदेड लोकसभा सीट पर पहला लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ. यहां से 2 सांसद चुने गए शंकरराव तेलकीकर और देवराव कांबले, फिर 1957 में दोबारा देवराव कांबले कांग्रेस से सांसद चुने गए और शेड्यूल कास्ट फेडरेशन से हरिराव सोनुले चुनाव जीते. फिर 1962 में कांग्रेस के तुलसीदास जाधव और 1967 और 1971 में वेंकटराव तारोडेकर जीते, 1977 में डॉ. केशवराव धोंगड़े जनता पार्टी से चुने गए.

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1980 और 1984 में अशोक चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण जीते, जो केंद्र में मंत्री भी रहे. फिर 1987 के उपचुनाव में अशोक चव्हाण पहली बार इस सीट से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे . हालांकि, इसके बाद लंबे समय तक अशोक चव्हाण दिल्ली की राजनीति छोड़ महाराष्ट्र की राजनीति में व्यस्त रहे और मुख्यमंत्री तक बने.

1989 में जनता दल से डॉ. वेंकटेश कबडे जीते. 1991 में कांग्रेस दोबारा आई. सूर्यकांत पाटिल सांसद बने. 1996 में गंगाधर देशमुख , 1998 और 1999 में भास्करराव बापूराव खटगांवकर जीते. 2004 में दिगंबर बापूजी पाटिल बीजेपी की टिकट पर जीते. 2009 में भास्करराव बापुराव खटगांवकर तीसरी बार सांसद बने. फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में अशोक चव्हाण सांसद बने. 

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