17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद सीट से मुरादाबाद से गठबंधन प्रत्याशी सपा के डॉक्टर एस.टी. हसन ने भाजपा के मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश कुमार को 97878 मतों से पराजित किया है. इस सीट पर बीजेपी, सपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था.

कब और कितनी हुई वोटिंग
मुरादाबाद सीट पर वोटिंग तीसरे चरण में 23 अप्रैल को हुई थी, इस सीट पर 65.39 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस सीट पर कुल 1956174 मतदाता हैं, जिसमें से 1279078 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.
प्रमुख उम्मीदवार
सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से कुंवर सर्वेश चुनाव लड़ रहे थे, जिनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ और समाजवादी पार्टी के एचटी हसन से था. मुरादाबाद लोकसभा सीट से इस बार 13 उम्मीदवार मैदान में थे.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट पर 63.66 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह को 43.01 फीसदी (4,85,224) वोट मिले थे और और उनके निकटतम सपा प्रत्याशी एचटी हसन को 35.26 फीसदी (3,97,720) मिले थे. इसके अलावा सपा से हाजी याकूब कुरैशी को महज 14.21 फीसदी (1,60,945) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी के सर्वेश सिंह ने 87,504 मतों से जीत दर्ज की थी. मुरादाबाद लोकसभा सीट पर सत्ता की चाबी मुस्लिम वोटरों के हाथ में मानी जाती है. यहां पर कुल 52.14% हिंदू और 47.12% मुस्लिम जनसंख्या है.
मुरादाबाद का इतिहास
पीतल नगरी नाम से भी मशहूर मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास 1952 से ही जारी है. यहां पर पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए. लगातार दो बार यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की. 1967 और 1971 में ये सीट भारतीय जनसंघ के खाते में गई. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां से चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी. 1980 में एक बार फिर जनता दल ने यहां से जीत हासिल की, लेकिन 1984 में देश में चली कांग्रेस की लहर में सीट फिर कांग्रेस के खाते में गई. फिर 1989 और 1991 में यह लोकसभा सीट जनता दल के खाते में, 1996 और 1998 में समाजवादी पार्टी के खाते में गई. कांग्रेस से टूटकर बनी जगदंबिका पाल की अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस ने 1999 चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज की थी. 2004 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा हुआ तो वहीं 2009 में पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन यहां से सांसद चुने गए. 2014 में भारतीय जनता पार्टी पहली बार यहां से जीती थी.
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