पश्चिम बंगाल की वीआईपी लोकसभा सीट मिदनापुर में 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जीत हासिल की. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रत्याशी मानस रंजन भुइयां को 88952 वोटों से हराया.
किसको कितने वोट मिले
कब और कितनी हुई वोटिंग
मिदनापुर सीट पर लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत 12 मई को वोट डाले गए और 84.04 फीसदी मतदान हुआ. इस सीट पर पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष समेत कुल 9 प्रत्याशी चुनाव लड़े.
कौन-कौन उम्मीदवार
बीजेपी के दिलीप घोष के अलावा मिदनापुर लोकसभा सीट पर सीपीआई ने बिपल्ब भट्ट को तो टीएमसी ने मानस रंजन भुइयां को चुनाव मैदान में उतारा. कांग्रेस ने इस सीट से शंभूनाथ चट्टोपाध्याय पर दांव खेला, इस सीट से कुल 9 उम्मीदवार चुनाव लड़े.
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2014 का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में मिदनापुर सामान्य सीट से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संध्या रॉय को विजय मिली और सीपीआई के प्रबोध पंडा दूसरे स्थान पर रहे. संध्या रॉय को 5,79,860 वोट मिले. वहीं सीपीआई के प्रबोध पंडा को 3,95,194 वोट मिले. 2014 के चुनाव में यहां पर 84.22 फीसदी वोटिंग हुई थी जबकि 2009 में 82.54 फीसदी. 2014 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को यहां 46.04 फीसदी, बीजेपी को 14.28 फीसदी और कांग्रेस को सिर्फ 3.88 फीसदी वोट मिले थे.
पूरे पश्चिम बंगाल में लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच होती आई है लेकिन मिदनापुर में लड़ाई ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई के बीच रही थी. 2009 के चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी दीपक कुमार घोष दूसरे नंबर पर रहे थे और सीपीआई के प्रबोध पंडा जीत गए थे.
सामाजिक ताना-बाना
मिदनापुर संसदीय सीट पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से एक महत्वपूर्ण संसदीय सीट है. यह संसदीय क्षेत्र 1951 में ही अस्तित्व में आ गया था. मिदनापुर शहर मेदिनीपुर पश्चिम का मुख्यालय भी है. यह कांग्सताबती नदी के किनारे है. यह संसदीय क्षेत्र सीपीएम के कद्दावार नेता इंद्रजीत गुप्ता की कर्मस्थली रहा है.
मिदनापुर का लिंगानुपात 960 है यानी 1000 पुरुषों पर 960 महिलाएं है. यहां की साक्षरता दर 90 फीसदी है. पुरुषों की साक्षरता दर 92 फीसदी है तो महिलाओं की साक्षरता दर 83 फीसदी है. बंगाली यहां की आधिकारिक भाषा है. इसके साथ ही हिंदी, ऊर्दू, मारवाड़ी और अंग्रेजी यहां पर आसानी से बोली जाती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 1952 में यह सीट मिदनापुर-झारग्राम के नाम से जानी जाती थी. 1952 में यहां से कांग्रेस के भारत लाल टुडु जीते थे. 1957 में इस सीट का नाम मिदनापुर हो गया इस बार भी यहां कांग्रेस का उम्मीदवार ही विजयी हुआ. 1962 में कांग्रेस के गोबिंद कुमार सिंघू सांसद बने.
1967 में यहां से बंगला कांग्रेस के सचिंद्र नाथ मैती जीते. 1971 में फिर कांग्रेस के सुबोध चंद्र हंसदा यहां से जीत गए. 1971 में भारतीय लोकदल के सुधीर कुमार घोषाल जीते. 1980 में सीपीएम ने इस सीट पर कब्जा कर लिया और नारायण चौबे को यहां से विजय मिली. 1984 में भी नारायण चौबे ही सांसद बने. 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 तक लगातार 5 बार सीपीएम के इंद्रजीत गुप्ता मिदनापुर से सांसद रहे. 2001 के उपचुनाव में सीपीएम के प्रबोध पंडा को विजय मिली. 2004 में प्रबोध पंडा ही जीते.
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