समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से चुनाव जीत गये हैं, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य को 94 हजार से अधिक मतों से हराया है. चुनाव आयोग के अनुसार मुलायम ने शाक्य को 94 हजार 389 वोटो से हराया. मुलायम को पांच लाख 24 हजार 926 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वन्दी शाक्य को चार लाख तीस हजार 537 वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर सपा के तेज प्रताप यादव विजयी हुए थे.

कब और कितनी हुई वोटिंग
मैनपुरी सीट पर वोटिंग तीसरे चरण में 23 अप्रैल को हुई थी, इस सीट पर 56.79 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस सीट पर कुल 1715993 मतदाता हैं, जिसमें से 974487 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.
कौन-कौन था प्रमुख उम्मीदवार
सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शीम सिंह शाक्य थे, जिनका मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह से था. इस सीट पर कुल 12 उम्मीदवार मैदान में थे.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी सीट पर 60.45 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव को 48.39 फीसदी (5,34,583) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बीजेपी प्रत्याशी शत्रुघ्न सिंह चौहान को 23.14 फीसदी (2,31,252) वोट मिले थे. इसके अलावा बसपा के संघमित्रा मौर्य को महज 14.29 फीसदी (1,42,833) वोट मिले थे. इस सीट पर सपा के मुलायम ने महज 3,21,249 मतों से जीत दर्ज की थी. हालांकि मुलायम सिंह ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद तेजप्रताप यादव जीतकर सांसद बने थे.
सामाजिक ताना-बाना
जातीय समीकरण को देखें तो इस सीट पर यादव वोटरों का वर्चस्व है, यहां करीब 35 फीसदी मतदाता यादव समुदाय से हैं. जबकि करीब 2.5 लाख वोटर शाक्य हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभाएं आती हैं. इनमें मैनपुरी, भोगांव, किषनी, करहल और जसवंतनगर है. बता दें कि जसवंतनगर शिवपाल यादव का विधानसभा क्षेत्र है. 2017 के विधानसभा चुनाव में इनमें से सिर्फ भोगांव ही भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी, जबकि बाकी सभी 4 सीटें सपा के खाते में गई थीं.
मैनपुरी का इतिहास
मैनपुरी लोकसभा सीट देश में हुए पहले आम चुनाव के समय से ही चर्चा में रही है. 1952 से लेकर 1971 तक हुए देश में कुल 5 चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की तो 1977 में सत्ता विरोधी लहर में जनता पार्टी ने जीत हासिल की. लेकिन अगले ही साल 1978 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने यह सीट वापस ले ली. उसके बाद 1980 में कांग्रेस से सीट छिनी पर 1984 की लहर में फिर वापस आई.
हालांकि 1984 में कांग्रेस को यहां पर आखिरी बार जीत नसीब हुई थी, जिसके बाद से ही ये सीट क्षेत्रीय दलों के कब्जे में रही. 1989 और 1991 में यहां लगातार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की. लेकिन 1992 में पार्टी गठन करने के बाद मुलायम सिंह यादव ने यहां से 1996 का चुनाव यहां से लड़ा और बड़े अंतर से जीता भी. उसके बाद 1998, 1999 में भी ये सीट समाजवादी पार्टी के पास ही रही.
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