मधुबनी सीट पर भाजपा के अशोक कुमार यादव ने विकासशील इंसान पार्टी के बद्री कुमार पुर्बे को 454940 वोटों से हराया. अशोक कुमार यादव को 595843 और बद्री कुमार पुर्बे को 140903 वोट मिले. मधुबनी बिहार के दरभंगा प्रमंडल का एक प्रमुख शहर एवं जिला है. दरभंगा और मधुबनी को मिथिला संस्कृति का केंद्र माना जाता है. मैथिली और हिंदी यहां की प्रमुख भाषा है. विश्वप्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग एवं मखाना के पैदावार की वजह से मधुबनी को विश्वभर में जाना जाता है.
कब और कितनी हुई वोटिंगमधुबनी लोकसभा सीट पर 6 मई को पांचवे चरण में वोट डाले गए. चुनाव आयोग के मुताबिक इस सीट पर 1791166 पंजीकृत वोटर्स हैं, जिसमें से 962149 ने मताधिकार का इस्तेमाल किया. सीट पर कुल 53.72 फीसदी वोटिंग हुई.
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कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
मधुबनी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट से अशोक कुमार यादव, अखिल भारतीय मिथला पार्टी के टिकट से आनंद कुमार झा, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के टिकट से खालिक अंसारी, भारतीय मित्र पार्टी के टिकट से धनेश्वर महतो, विकासशील इंसान पार्टी के टिकट से बद्री कुमार पुर्बे और बहुजन मुक्ति पार्टी के टिकट से रंजीत कुमार चुनाव मैदान में हैं. इसके अलावा वोटर पार्टी इंटरनेशनल ने राम स्वरूप भारती, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने रेखा रंजन यादव, पूर्वांचल जनता पार्टी ने सतीश चंद्र झा और राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी ने सुभाष चंद्र झा को चुनाव मैदान में उतारा है.
2014 का चुनाव
2014 में मधुबनी लोकसभा सीट से बीजेपी के हुकुमदेव नारायण यादव ने जीत हासिल की थी. हुकुमदेव नारायण यादव को 3 लाख 58 हजार 40 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दिकी को 3 लाख 37 हजार 505 वोटों से संतोष करना पड़ा था. मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव को वर्ष 2014 के लिए उत्कृष्ट सांसद के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था
सामाजिक ताना-बाना
मधुबनी संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं, जिनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी, केवटी और जाले विधानसभा सीट शामिल हैं. यहां साक्षरता दर 60.9 है और लिंगानुपात 925 है.
सीट का इतिहास
1952 में ये सीट दरभंगा-पूर्व के नाम से जाना जाता था, जिसमें कांग्रेस के उम्मीदवार अनिरुद्ध सिन्हा जीते. 1957 के चुनाव में भी अनिरुद्ध सिन्हा जीते. 1962 के चुनाव में इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के योगेंद्र झा सांसद चुने गए. 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के शिव चंद्र झा सांसद चुने गए. 1971 में कांग्रेस ने इस सीट से जगन्नाथ मिश्रा को उतारा और वे जीतकर संसद पहुंचे. बाद में जगन्नाथ मिश्रा बिहार के मुख्यमंत्री भी बने.
1976 में संसदीय सीटों का परिसीमन हुआ और मधुबनी सीट बनी. जिसमें मधुबनी जिले के पश्चिमी इलाकों को शामिल किया गया. 1977 में इस सीट से चौधरी हुकुमदेव नारायण यादव जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते. 1980 में यहां से काग्रेस के सफिकुल्ला अंसारी जीते लेकिन 4 महीने बाद ही उनका निधन हो गया. मई 1980 में यहां फिर चुनाव हुए. इस बार सीपीआई के भोगेंद्र झा जीते. 1984 में यहां से कांग्रेस के मौलाना अब्दुल हन्ना अंसारी जीते. 1989 और 1991 के चुनाव में इस सीट से सीपीआई के टिकट पर फिर भोगेंद्र झा को जीत हासिल हुई.
ये सीट बिहार में वामपंथ का गढ़ माना जाने लगा. 1996 में सीपीआई के चतुरानन मिश्र जीते. लेकिन 1998 के चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद के हाथ चुनावी जीत लगी. 1999 के चुनाव में यहां से बीजेपी के हुकुमदेव नारायण यादव फिर चुनाव जीते. जबकि 2004 के चुनावी समर में कांग्रेस के शकील अहमद के हाथ सफलता लगी. 2009 में मधुबनी सीट कड़े मुकाबले का गवाह बनी. यहां से बीजेपी के हुकुमदेव नारायण यादव चुनाव जीतकर फिर संसद पहुंचे. 2014 में मोदी लहर वाले चुनाव में भी हुकुमदेव नारायण यादव के हाथ जीत लगी.
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