पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर 19 मई को आखिरी चरण के वोट डाले गए. इस बार यहां 63.02 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया, जबकि साल 2014 में पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर 66.86 फीसदी और 2009 में 67.26 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था. 19 मई की वोटिंग के साथ ही लोकसभा चुनाव के मतदान खत्म हो गए. अब सभी को 23 मई की तारीख का बेसब्री से इंतजार है. इस दिन सभी लोकसभा सीटों पर एक साथ वोटों की गिनती होगी और चुनाव के नतीजे जारी किए जाएंगे.
19 मई को आखिरी चरण में 7 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 59 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए. इस चरण में पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए. इन सभी सीटों पर 278 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. सातवें चरण की वोटिंग के दौरान चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. पोलिंग बूथ और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी. पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर मतदान कराने के लिए 23 हजार 213 मतदान केंद्र बनाए गए थे.
इस बार जालंधर लोकसभा सीट से कुल 19 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से मौजूदा सांसद चौधरी संतोख सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने चरणजीत सिंह अटवाल को टिकट दिया है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने रिटायर्ड जज जोरा सिंह को मैदान में उतारा है.
अब तक जालंधर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का इतिहास रहा है कि उसने कभी अपने उम्मीदवार को लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में नहीं उतारा है, लेकिन इस बार पार्टी ने चौधरी संतोख सिंह पर दोबारा विश्वास जताया है. भारतीय क्रिकेटर हरिभजन सिंह भी इसी लोकसभा सीट से आते हैं. उन्होंने भी 19 मई को वोट डाला.
2014 का जनादेश
पिछली बार साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जालंधर सीट से कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी ने अकाली दल के पवन कुमार टीनू को 70 हजार 981 वोटों से हराया था. संतोख सिंह को 3 लाख 80 हजार 479 (36.6 फीसदी) वोट मिले थे, जबकि अकाली दल के टीनू को 3 लाख 9 हजार 498 (29.7%) वोट प्राप्त हुए थे. वहीं, 2 लाख 54 हजार 121 वोट पाकर आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार ज्योति मान तीसरे स्थान पर रहीं.
इससे पहले साल 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार मोहिंदर सिंह केपी ने अकाली दल के हंसराज हंस को हराया था. इस सीट पर लगातार 20 साल से कांग्रेस का कब्जा है. 2009 चुनाव से पहले यह सीट सुरक्षित नहीं थी. जालंधर लोकसभा सीट से पू्र्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने दो बार जीत हासिल की थी. पहली बार उन्होंने 1989 और फिर 1998 में यहां से जीते थे.
जालंधर लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार लोकसभा चुनाव और एक बार उपचुनाव हो चुके हैं, जिसमें 13 बार कांग्रेस ने बाजी मारी है. इस सीट पर अकाली दल को साल 1977 और 1996 में जीत मिली.
सामाजिक ताना-बाना
जालंधर संसदीय क्षेत्र में 9 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें फिल्लौर, नाकोदर, शाहकोट, करतारपुर, जालंधर वेस्ट (सुरक्षित), जालंधर सेंट्रल, जालंधर नॉर्थ, जालंधर कैंट और आदमपुर विधानसभा सीटे हैं. जालंधर का नाम एक राक्षस के नाम पर रखा गया है, जिसका उल्लेख पुराण और महाभारत में भी है.
श्रीमद् भागवत पुराण के मुताबिक शिवजी का एक चौथा पुत्र था, जिसका नाम जलंधर था. हालांकि जलंधर शिव का सबसे बड़ा दुश्मन था. जालंधर में आज भी असुरराज जलंधर की पत्नी देवी वृंदा का मंदिर मोहल्ला कोट किशनचंद में स्थित है.
इसके अलावा कुछ लोग मानते हैं कि जालंधर का अर्थ पानी के अंदर होता है और यहां पर सतलुज और 20 नदियों का संगम है. इसलिए इस जगह का नाम जालंधर रखा गया. महमूद गजनवी ने जालंधर को जमकर लूटा था और मुगल काल में जालंधर व्यास नदी और सतलुज नदी के मध्य बसा प्रमुख प्रशासनिक नगर था. जालंधर एक बड़ा औद्योगिक शहर है. यहां चमड़े और खेल की वस्तुओं का अधिक उत्पादन होता है.
दिनभर ऐसे होता रहा मतदान
- जालंधर लोकसभा सीट पर रविवार शाम 5 बजे तक 55.16 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया.
- जालंधर लोकसभा सीट पर रविवार दोपहर 3 बजे तक 46.75 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया.
- पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर रविवार दोपहर 1 बजे तक 36.44 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया.
- पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर रविवार सुबह 10 बजे तक 9.52 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया.
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