गुजरात की हाई प्रोफाइल गांधीनगर सीट के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह हैं ने कांग्रेस के डॉ. सी.जे. चावड़ा को 557014 वोटों से हराया. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने गांधीनगर में जीत का रिकॉर्ड बनाया. इससे पहले 2014 में गांधीनगर से ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 4.83 लाख वोटों से जीत हासिल की थी.
2019 का जनादेश
अमित शाह को कुल 8 लाख 94 हजार 624 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. सीजे चावड़ा को तीन लाख 37 हजार 610 मत मिले. वहीं 14214 वोटों के साथ नोटा तीसरे नंबर पर रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में बीजेपी ने सभी 26 लोकसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की. इसके साथ ही पार्टी 2014 के अपने प्रदर्शन को दोहराने में सफल रही.
बता दें कि इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. वोटिंग प्रतिशत 65.45 रहा था. सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह थे. हालांकि, इस सीट पर कुल 17 उम्मीदवार मैदान में थे.
2014 का चुनावपिछले चुनाव में इस सीट पर 65.5 फीसदी मतदान हुआ था जिसमें बीजेपी प्रत्याशी लालकृष्ण आडवाणी को 7,73,539 वोट (68.04%) और कांग्रेस प्रत्याशी ईश्वरभाई पटेल को 2,90,418 (25.55%) वोट मिले थे. यानी आडवाणी 4 लाख 80 से ज्यादा मतों से जीते थे.
सामाजिक ताना-बानागांधीनगर लोकसभा क्षेत्र की अधिकतर आबादी शहरी है. करीब 79 फीसदी लोग शहरों में बसते हैं, बाकी 21% ग्रामीण आबादी है. अनुसूचित जाति (SC) की आबादी 11.41% और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी 1.96% है. कुल आबादी की बात की जाए तो 2011 की जनगणना के मुताबिक, इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 19,33,986 है. गांधीनगर जिले में मुसलमानों की जनसंख्या 4 फीसदी से ज्यादा है.
सीट का इतिहास
इस सीट पर सबसे पहला चुनाव 1967 में हुआ था, उस वक्त यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर एसएम सोलंकी ने बाजी मारी थी. इसके बाद 1971 में सोलंकी ने दूसरी बार चुनाव जीता. आपातकाल के बाद 1977 में यह सीट सामान्य हो गई और इंदिरा गांधी के विरोध में छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर भारतीय लोक दल के उम्मीदवार ने यहां से जीत हासिल की. हालांकि, 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1984 में भी यहां परचम लहराया.
इसके बाद 1989 से इस सीट पर बीजेपी की जो पारी शुरू हुई, वो अभी तक नॉटआउट चल रही है. बीजेपी के टिकट पर पहला चुनाव शंकर सिंह वाघेला ने जीता था. लालकृष्ण आडवाणी ने 1991 में इस सीट से किस्मत आजमाई और बाजी मार ली. इसके बाद 1996 के उपचुनाव में हरीशचंद्र पटेल जीते. 1996 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री और स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां से चुनाव लड़ा और वह जीत गए. वाजपेयी के बाद 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार एलके आडवाणी ने इस सीट को अपने नाम किया.
इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत गांधीनगर उत्तर, घाटलोडिया, साबरमती, कलोल, वेजलपुर, साणंद, नारणपुरा विधानसभा सीट आती हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में गांधीनगर उत्तर सीट से कांग्रेस, कलोल से कांग्रेस, साणंद से बीजेपी, घाटलोडिया से बीजेपी, वेजलपुर से बीजेपी, नारणपुरा से बीजेपी, साबरमती से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. यानी लालकृष्ण आडवाणी के लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी को विधानसभा की पांच सीटों पर जीत मिली, जबकि दो पर कांग्रेस ने बाजी मारी.
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