एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ चुके हैं. लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) की सरकार बनती दिख रही है. हरियाणा को लेकर यह माना जा रहा था कि यहां खट्टर सरकार को लेकर रोष है जिसका नुकसान बीजेपी को हो सकता है.
लेकिन जो एग्जिट पोल के नतीजे आए हैं उससे ऐसा लग रहा है कि जनता में मनोहर लाल खट्टर की सरकार के प्रति रोष नहीं है, न ही यहां एंटी इनकंबेंसी जैसा फैक्टर फिलहाल है. मोदी लहर में एक बार फिर हरियाणा की दस में दस सीटें बीजेपी के खाते में जाती दिख रही हैं. केवल रोहतक सीट ऐसी है जहां बीजेपी को कांग्रेस से टफ फाइट मिल पा रही है.
आजतक- एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक हरियाणा की 10 सीटों में बीजेपी को 8 से 10 मिलती दिख रही हैं, जबकि कांग्रेस को 0 से 2 सीटें आ रही हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को अंबाला, कुरुक्षेत्र, सिरसा, हिसार, करनाल, सोनीपत, भिवानी महेंद्रगढ़, गुड़गांव और फरीदाबाद में बीजेपी को जीत मिलने की संभावना है. वहीं रोहतक सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में कड़ी टक्कर है जिसमें कांग्रेस का पलड़ा जरा भारी है.
अन्य राज्यों के उपचुनाव बीजेपी के लिए बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. लेकिन हरियाणा के जींद में हुए उपचुनाव में राहुल गांधी के बेहद करीबी और कांग्रेस के दिग्गज नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला हार गए. इस सीट पर विधायक हरिंचद मिड्ढा की मौत होने की वजह से दोबारा चुनाव कराए गए थे. दो बार के इनेलो विधायक हरि चंद मिड्ढा के निधन के बाद उपचुनाव हुआ और मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे. यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई.
2014 में हुए विधानसभा चुनाव में हरियाणा में भी मोदी लहर का असर दिखा और बीजेपी के खाते में 47 सीटें गईं. इंडियन नेशनल लोकदल को 19 सीटें, कांग्रेस को 15 सीटें, हरियाणा जनहित कांग्रेस को 2 सीटें और निर्दलीय और अन्य राजनीतिक पार्टियों को 7 सीटें मिलीं.
एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अब अक्टूबर 2019 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कमर कसते नजर आ रहे हैं. अगर एग्जिट पोल की संभावना सच साबित होती है तो मनोहर लाल खट्टर का राजनीतिक कद और बड़ा हो सकता है.
संघ के दुलारे रहे मनोहर लाल खट्टर पहली बार करनाल से चुनाव लड़े जहां उन्हें रिकॉर्ड 63,773 मतों के अंतर से जीत मिली. दूसरे नंबर पर इंडियन नेशनल लोकदल के नेता जय प्रकाश गुप्ता रहे. मनोहर लाल खट्टर के पास प्रशासनिक अनुभव भले ही 2014 से पहले नहीं रहा, लेकिन उनके पास संघ का अनुशासन रहा है जिसकी वजह से उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी. मनोहर लाल खट्टर ने 5 साल हरियाणा को चला लिया, अब उनकी जिम्मेदारी और बढ़ने वाली है.
किसी भी नेता की कितनी बड़ी भी लहर क्यों न हो अगर उसकी प्रदेश में सरकार है और जनता उससे असंतुष्ट है तो उसके लिए वहां पांव जमाए रखना बेहद मुश्किल है. ऐसे में एग्जिट पोल के नतीजों की मानें तो मनोहर लाल खट्टर कामयाब होते नजर आ रहे हैं.
अगर उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव 2014 की तरह ही 7 सीटें भी मिल जाती हैं तो भी मनोहर लाल खट्टर और मोदी लहर को कामयाब कहा जाएगा. 2014 के चुनाव में बीजेपी के खाते में 7 सीटें, कांग्रेस के पास 1 और इंडियन नेशनल लोकदल के पास 2 सीटें थीं. नतीजे 23 मई को आने वाले हैं, देखने वाली बात यह है कि एक बार फिर हरियाणा में मोदी लहर का असर बरकरार रह पाता है या नहीं.