ओडिशा की अस्का लोकसभा सीट पर मतगणना की प्रक्रिया खत्म हो गई है. इस सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच मतदान संपन्न हुआ था. एकतरफा मुकाबले में बीजेडी की प्रमिला बिसोई ने बीजेपी की अनिता सुभादर्शिनी को 2 लाख 04 हजार 707 वोटों से हरा दिया.
बीजू जनता दल (बीजेडी) के मुखिया नवीन पटनायक ने 2019 के लोकसभा चुनाव में एक साधारण महिला कार्यकर्ता प्रमिला बिसोई को अस्का लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा. इस वजह से यहां मुकाबला रोमांचक रहा. अस्का लोकसभा सीट बीजू जनता दल का मजबूत किला रहा है. इस सीट से ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक और उनके बेटे नवीन पटनायक सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं. इसी लोकसभा सीट के तहत पड़ने वाली हिंजली विधानसभा से वर्तमान सीएम नवीन पटनायक चुनाव जीते हैं. 2014 में भी इस सीट से बीजेडी कैंडिडेट ने जीत का परचम लहराया था.
अस्का लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को हुए मतदान में 65.89 प्रतिशत वोट पड़े. चुनाव आयोग के 2014 के आंकड़ों के मुताबिक अस्का लोकसभा सीट पर 14 लाख 08 हजार 780 वोट थे. यहां पर पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 50 हजार 999 थी. जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 57 हजार 781 थी.
कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
अस्का लोकसभा सीट पर 2 निर्दलीय समेत कुल 8 उम्मीदवार मैदान में हैं. बीजू जनता दल के मुखिया नवीन पटनायक ने बेहद साधारण परिवार से आने वाली एक महिला कार्यकर्ता प्रमिला बिसोई को अस्का लोकसभा सीट का टिकट देकर इस सीट की लड़ाई रोमांचक कर दी. प्रमिला बिसोई सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी हैं और गंजम जिले में 18 सालों से स्कूली बच्चों को मिड डे मील मुहैया करा रही हैं. 2014 में बीजेडी के लडू किशोर स्वैन इस सीट से चुनाव जीते थे.
इस सीट से बीजेपी ने अनिता शुभदर्शिनी को टिकट दिया है. जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने इस सीट से राम कृष्ण पांडा को अपना उम्मीदवार बनाया है. ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के राजीब चंद्र खंडगा इस सीट से कैंडिडेट हैं. कांग्रेस ने इस सीट से अपना कोई कैंडिडेट नहीं उतारा.
2014 का जनादेश
2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेडी के लडू किशोर स्वैन ने सवा तीन लाख की मार्जिन से बंपर जीत हासिल की थी. बीजेडी कैंडिडेट लडू किशोर स्वैन को 5 लाख 41 हजार 473 वोट मिले थे. जबकि दूसरे स्थान पर रहे श्रीलोकनाथ रथ को 2 लाख 29 हजार 476 वोट मिले. इस सीट से बीजेपी ने भी अपनी चुनौती पेश की, लेकिन पार्टी का परफॉर्मेंस कुछ खास नहीं रहा. पार्टी उम्मीदवार महेश चंद्र मोहंती को 67 हजार 361 वोट मिले. AAP ने भी यहां से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ा और 11 हजार वोट हासिल किए. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 63.62 प्रतिशत मतदान हुआ था.
सामाजिक ताना-बाना
अस्का लोकसभा सीट ओडिशा के गंजाम जिले में स्थित है. इस जिले में माओवादियों का प्रभाव देखने को मिलता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी 18 लाख 88 हजार 187 है. इस इलाके की 89.21 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण इलाके में रहती है, जबकि 10.79 प्रतिशत आबादी शहरी है. यहां पर अनुसूचित जाति का आंकड़ा कुल आबादी का 20.06 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति का हिस्सा 2.98 प्रतिशत है.
अस्का लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं. ये सीटें हैं पोलसारा, कविसूर्यनगर, खालीकोट, अस्का, सुरादा, सनाखेमुंडी, हिंजली. 2014 के विधानसभा चुनाव में इन सभी सीटों बीजू जनता दल ने जीत हासिल की थी. हिंजली सीट से नवीन पटनायक खुद विधायक हैं.
सीट का इतिहास
1977 से पहले अस्का लोकसभा भांजनगर लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता था, लेकिन परिसीमन के बाद इस सीट को अस्का कहा जाने लगा. यहां पर पहली बार 1962 में लोकसभा चुनाव हुए थे. तब कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की थी. 1967 में भी कांग्रेस यहां से जीती. 1971 में इस सीट पर कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने यहां से जीत हासिल की. 1977 में देश भर में कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद इस सीट से कांग्रेस के रामचंद्र रथ जीते. 1980 और 84 में भी कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा. 1989 में जनता दल ने इस सीट पर अपना खाता खोला और अनंत नारायण सिंह देव चुनाव जीते. 1991 में यहां कांग्रेस ने फिर से वापसी की और राम चन्द्र रथ चुनाव जीते.
1996 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से जनता दल के टिकट पर ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक चुनावी दंगल में उतरे और जीत हासिल की. 17 अप्रैल 1997 को 81 साल की आयु में उनका निधन हो गया. इसके बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे नवीन पटनायक ने संभाली. 1997 में हुए उपचुनाव में वह अस्का सीट से जनता दल के टिकट पर उतरे. नवीन पटनायक यहां विजयी रहे.
चुनाव जीतने के तुरंत बाद उन्होंने जनता दल से नाता तोड़ अपने पिता के नाम पर नई पार्टी बीजू जनता दल का का गठन किया. 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में भी नवीन पटनायक ने यह सीट अपने नाम बरकरार रखी. वर्ष 2000 में बीजेपी संग चुनाव लड़कर बीजेडी ने ओडिशा विधानसभा में बहुमत हासिल की. नवीन पटनायक सीएम बने. वर्ष 2000 में इस सीट पर एक बार फिर से उपचुनाव हुआ. इस बार बीजेडी की ही कुमुदनी पटनायक चुनाव जीतीं. 2004 के लोकसभा चुनाव में यहां से हरिहर स्वैन चुनाव जीते. 2009 में इस सीट से बीजेडी के नित्यानंद प्रधान को जीत मिली. 2014 में बीजेडी के लडू किशोर स्वैन यहां से जीते. लडू किशोर स्वैन अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके और 6 फरवरी 2019 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.
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