लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं. उत्तर भारत के साथ-साथ आज दक्षिण भारत पर भी हर किसी की नज़र है. केरल की 20 लोकसभा सीटों पर इस बार बंपर मतदान हुआ. कांग्रेस प्रत्याशी रामया हरिदास ने रोमांचक चुनावी मुकाबले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के डॉ. पीके बीजू को हरा दिया है. हरिदास ने 1 लाख 58 हजार 968 मतों से ये जीत दर्ज की.
हरिदास को 10 लाख 18 हजार 743 वोट में से 5 लाख 33 हजार 815 वोट (52.4 फीसदी) मिले. दूसरे नंबर पर डॉ. पीके बीजू रहे जिन्हें 3 लाख 74 हजार 847 वोट (36.8फीसदी) मिले. तीसरे नंबर पर भारत धर्म जन सेना के टीवी बाबू रहे जिन्हें 89 हजार 837 वोट (8.82 फीसदी) मिले.
केरल की अलाथुर लोकसभा सीट पर तीसरे चरण के दौरान 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. यहां बंपर वोटिंग के तहत कुल 80.34 फीसदी वोट डाले गए.
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किस पार्टी से कौन मैदान में?
इस सीट पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस के बीच मुकाबला है. माकपा ने डॉ. पीके बीजू को अपना उम्मीदवार बनाया है वहीं कांग्रेस ने रामया हरिदास को टिकट दिया. एनडीए ने भारत धर्म जन सेना के उम्मीदवार को समर्थन दिया है. भारत धर्म जन सेना ने टीवी बाबू को प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है. जबकि बहुजन समाज पार्टी ने डॉ. जायन सी कुठनुर को टिकट दिया है.
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2014 में क्या रहे थे नतीजे?
पिछली बार यहां से बीजेपी लड़ी थी और उसके कैंडिडेट ने ठीक-ठाक वोट हासिल किया था. साल 2014 में माकपा के पी.के. बीजू को 4,11,808 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस की के.ए. शीबा को 3,74,496 वोट मिले.
बीजेपी कैंडिडेट शाजुमोन वट्टेकाड को 87,803 वोट मिले. इस तरह लगातार दूसरी बार बीजू यहां से सांसद बने. यहां नोटा को भी अच्छा-खासा 21,417 वोट पड़ा. यह इस हिसाब से मायने रखता है कि बीजू के जीत का मार्जिन महज 37,312 वोटों का था. यहां से बहुजन समाज पार्टी के सिंबल से एक कैंडिडेट प्रेमा कुमारी खड़ी थीं, जिन्हें महज 4,436 वोट मिले थे. बीजू को करीब 44 फीसदी, जबकि रनर अप कांग्रेस कैंडिडेट को करीब 40 फीसदी वोट मिले.
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क्या है सीट का इतिहास?
केरल में चुनाव दो प्रमुख गठबंधनों एलडीएफ और यूडीएफ के बीच होते हैं. एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में वाम दल और उनके सहयोगी होते हैं, जबकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल होते हैं. यूडीएफ केंद्र स्तर पर बने यूपीए का ही हिस्सा होता है.
अलाथुर लोकसभा सीट का क्या है समीकरण?
अलाथुर सीट माकपा का गढ़ है, हालांकि कांग्रेस से उसे अच्छी टक्कर मिलती रही है. साल 2009 और 2014 में लगातार दो बार से यहां कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (माकपा) के पी.के. बीजू सांसद हैं.
अलाथुर में साल 2014 में कुल मतदाता 12,16,351 थे, जिनमें से 9,27,228 ने ही वोट डाले थे. इनमें से महिला मतदाताओं की संख्या 6,24,401 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 5,91,950 थी. यानी इस संसदीय क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा है.
पलक्कड़ जिले की करीब 28 लाख जनसंख्या में एससी-एसटी की जनसंख्या करीब 4.5 लाख है. कृषि इस क्षेत्र का प्रमुख रोजगार है. पहाड़ी जमीन पर रबर और मैदानी इलाकों में धान उगाया जाता है. इनके अलावा नारियल, अदरक, केला, कद्दू आदि की खेती भी होती है. अगरबत्ती उत्पादन यहां के प्रमुख कुटीर उद्योगों में शामिल है
अलाथुर लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं-तरूर, चित्तूर, नेम्मारा, अलाथुर, चेलक्करा, कुन्नाकुलम और वडक्कनचेरी इनमें से तरूर, चित्तूर, नेम्मारा और अलाथुर राज्य के पलक्कड़ जिले के तहत आते हैं, जबकि चेलक्कारा, कुन्नाकुलम और वडक्कनचेरी क्षेत्र त्रिसूर जिले के तहत आते हैं.
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