लोकसभा चुनाव 2019 के लिए केरल की लोकसभा सीटों के लिए 23 मई को मतगणना हुई. आलप्पुझा लोकसभा सीट पर सीपीएम के एडवोकेट ए एम आरिफ ने कांग्रेस के एडवोकेट शनिमोल ओसमान को 10 हजार 474 वोटों से हराया.
इस सीट पर तीसरे चरण में यानी 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक आलप्पुझा लोकसभा सीट पर करीब 80.12 फीसदी मतदान हुआ था.
किस पार्टी से कौन है मैदान में?
इस सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एडवोकेट ए एम आरिफ को टिकट दिया था जबकि कांग्रेस ने एडवोकेट शनिमोल ओसमान पर भरोसा जताया था और मैदान में उतारा था. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. के.एस. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया था. अम्बेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया ने ए. अखिलेश को प्रत्याशी बनाया था जबकि बहुजन समाज पार्टी की तरफ से प्रशांत भीम कैंडिटेड थे.
2014 के चुनाव का आंकड़ा
केरल में राजनीतिक मुकाबला असल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के बीच होता है. साल 2014 में कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल यूडीएफ की तरफ से उम्मीदवार थे. कड़े मुकाबले में उनको 4,68,679 वोट मिले और वह करीब 57 हजार वोटों से विजयी हुए. उन्हें कुल वोटों का 51.62 फीसदी हिस्सा मिला जो पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 5.25 फीसदी कम है. माकपा के सी.बी चंद्रबाबू को 4,11,044 वोट मिले. उन्हें 44.42 फीसदी वोट मिले जो पिछले चुनावों से 0.85 फीसदी कम है.
क्या है सीट का इतिहास और समीकरण?
आलप्पुझा एक वीआईपी संसदीय क्षेत्र मानी जाती है, क्योंकि यहां से दिग्गज कांग्रेसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.सी. वेणुगोपाल सांसद हैं. वैसे तो इस संसदीय क्षेत्र की कम्युनिस्ट विरासत रही है, लेकिन ज्यादातर समय यह कांग्रेस का गढ़ रहा है. शुरुआती तीन आम चुनाव में यहां से कम्युनिस्ट उम्मीदवार जीते थे, लेकिन पिछले कई बार से इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा है.
आलप्पुझा केरल में लक्षदीप सागर के पास बसा एक शहर है. यह अपने पर्यटन और खासकर हाउसबोट क्रूज के लिए मशहूर है. समुद्र के किनारे होने की वजह से यहां कृषि और मरीन इकोनॉमी काफी फली-फूली है और पर्यटन कारोबार भी काफी मजबूत है. हैंडलूम और मरीन प्रोडक्ट के अलावा यहां का सबसे मजबूत उद्योग जूट उत्पादन का है.
सात विधानसभाओं वाली सीट
इस संसदीय क्षेत्र को पहले एलेप्पी के नाम से जाना जाता था. इसके तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं. अरूर, चेरथला, आलप्पुझा, अम्बलप्पुझा, हरिपद, कायमकुलम, करुणागप्पली, सभी सामान्य सीटें हैं. यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है, हालांकि माकपा ने यहां उसे कड़ी टक्कर दी है. सबसे पहले 1951-52 में आम चुनाव हुए जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार पीटी पुन्नोसे ने कांग्रेस उम्मीदवार ए.पी. उदयभानु को करीब 76 हजार वोटों से हराया था. इसके बाद 1957 में यह सीट सीपीआई, 1962 में सीपीआई, 1967 में सीपीआई, 1971 में आरएसपी, 1977 में कांग्रेस, 1980 में माकपा, 1984 में कांगेस, 1989 में कांग्रेस, 1991 में माकपा, 1996 में कांग्रेस, 1998 में कांग्रेस, 1999 में कांग्रेस, 2004 में माकपा, 2009 में कांग्रेस और फिर 2014 में कांग्रेस के खाते में रही.
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