scorecardresearch
 

झारखंड: पांचवें चरण की 6 सीटों पर JMM-BJP का खेल बिगाड़ सकते हैं बागी

झारखंड के पांचवें चरण की 16 सीटों में से करीब 6 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी और जेएमएम के सामने बागी चुनौती बने हुए हैं. हालांकि सबसे ज्यादा बागियों का सामना बीजेपी को उठाना पड़ रहा है. ऐसा ही संकट आरजेडी, कांग्रेस और जेएमएम के सामने है.

Advertisement
X
बीजेपी के लिए बागी बने मसीबत
बीजेपी के लिए बागी बने मसीबत

  • झारखंड के पांचवें चरण में 16 सीटों पर 20 दिसंबर को वोटिंग
  • पांचवें चरण में बीजेपी का चुनावी खेल बिगाड़ रहे बागी प्रत्याशी

झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें व आखिरी चरण की 16 सीटों पर शुक्रवार को वोटिंग होगी. संथाल परगना क्षेत्र की इन सीटों पर 237 उम्मीदवार मैदान में हैं. यह इलाका झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां बीजेपी सेंधमारी के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गई है. इसके बावजूद बीजेपी और जेएमएम के सामने एक तरफ अपने कब्जे वाली सीटें बचाने की चुनौती है तो कई सीटों पर दोनों दलों को अपने ही बागी नेताओं से मुकाबला करना पड़ रहा है.

झारखंड के पांचवें चरण की 16 सीटों में से करीब 6 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी और जेएमएम के सामने बागी चुनौती बने हुए हैं. हालांकि सबसे ज्यादा बागियों का सामना बीजेपी को करना पड़ रहा है. ऐसा ही संकट आरजेडी, कांग्रेस और जेएमएम के सामने है.

Advertisement

जरमुंडी: बीजेपी के लिए बागी चुनौती

जरमुंडी विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र कुंवर का सियासी खेल पार्टी से बगावत कर बसपा से चुनाव मैदान में उतरे संजयानंद झा और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सीताराम पाठक खराब कर सकते हैं. जबकि, महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के बादल पत्रलेख चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में बीजेपी के मौजूदा विधायक देवेंद्र कुंवर की दूसरी बार जीत की राह में कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के बागी रोड़े बने हुए हैं.

पाकुड़: आलमगीर के खिलाफ चक्रव्यूह

पाकुड़ विधानसभा सीट कांग्रेस और आलमगीर आलम का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस सीट से आलमगीर लगातार जीत का परचम लहराते आ रहे हैं, लेकिन इस बार अपने ही नेता मुसीबत बन गए हैं. कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन के चलते पूर्व विधायक अकील अख्तर आजसू से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

शिकारीपाड़ा: बीजेपी-कांग्रेस के खिलाफ बागी

शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट पर भी बीजेपी और जेएमएम दोनों को विपक्ष से ज्यादा अपनों से खतरा नजर आ रहा है. इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी परितोष सोरेन के सामने पार्टी से बगावत करने वाले श्याम मरांडी आजसू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं. जबकि जेएमएम के प्रत्याशी नलिन सोरेन के लिए भी कांग्रेस से बगावत कर बतौर निर्दलीय चुनावी रण में ताल ठोक रहे हाबिल मुर्मू ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है. इसी तरह से दोनों के लिए उनके पुराने ही टेंशन बने हुए हैं.

Advertisement

नाला: बीजेपी के लिए बढ़ी मुसीबत

नाला विधानसभा सीट पर बागी बीजेपी का खेल बिगाड़ने के लिए चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं. नाला से बीजेपी प्रत्याशी सत्यानंद बाटुल चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन बगावत कर नेशनल पीपल्स पार्टी के टिकट पर भाग्य आजमा रहे प्रवीण प्रभाकर और एजेएसयू से माधव चंद्र महतो ने उनका सियासी खेल बिगाड़ दिया है. प्रवीण प्रभाकर बीजेपी के प्रवक्ता रह चुके हैं और झारखंड का चर्चित चेहरा हैं. इसीलिए बीजेपी के सारे समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं.

बोरियो: बीजेपी की अपने नेता से टक्कर

बोरियो विधानसभा सीट पर बीजेपी के सूर्य नारायण हांसदा मैदान में हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके ताला मरांडी ने टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ चुके हैं. इस बार वह आजसू से मैदान में उतरे हैं. इसीलिए बीजेपी के लिए यहां कमल खिलाना इस बार आसान नहीं है. ऐसे में इस सीट पर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है.

जामताड़ा: बीजेपी के खिलाफ दोबरा चक्रव्यूह

जामताड़ा विधानसभा सीट पर भी बीजेपी को अपने ही बागी नेता से कड़ी टक्कर मिल रही है. बीजेपी से वीरेंद्र मंडल के खिलाफ पार्टी से बगावत कर निर्दलीय ताल ठोक रहे तरुण गुप्ता और बीजेपी की पूर्व विधायक विष्णु की पत्नी चमेली देवी आजसू से चुनाव लड़ रही है. इसके चलते बीजेपी प्रत्याशी का चुनावी गणित बिगड़ता नजर आ रहा है.

Advertisement
Advertisement