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न बहुमत-न वापसी, 19 साल में कोई दल नहीं बदल पाया झारखंड का इतिहास

झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने भले ही बहुमत हासिल कर लिया हो, लेकिन इस बार भी कोई पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम रही. यही नहीं, झारखंड में 19 साल के राजनीतिक इतिहास में किसी भी सत्ताधारी पार्टी सत्ता में वापसी नहीं करने का रिकॉर्ड भी कायम रहा. इस बार भी रघुवर दास के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की सत्ता से विदाई हो गई.

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झारखंड: रघुवर दास और हेमंत सोरेन
झारखंड: रघुवर दास और हेमंत सोरेन

  • झारखंड में किसी भी एकल पार्टी को बहुमत नहीं मिला
  • झारखंड में सत्ताधारी पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं

झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने भले ही बहुमत हासिल कर लिया हो, लेकिन इस बार भी कोई पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम रही. यही नहीं, झारखंड में 19 साल के राजनीतिक इतिहास में किसी भी सत्ताधारी पार्टी सत्ता में वापसी नहीं करने का रिकॉर्ड भी कायम रहा. इस बार भी रघुवर दास के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की सत्ता से विदाई हो गई.

19 साल और 10 मुख्यमंत्री

झारखंड की राजनीति इतनी कॉम्प्लेक्स है कि इस राज्य के गठन को 19 साल हुए और अब तक 10 सीएम भी बन चुके हैं. झारखंड में अब तक रघुवर दास पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने भले ही पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. लेकिन वह अपनी सरकार की दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं करा सके.

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नतीजे में बीजेपी 30 सीटों से भी नीचे सिमटी गई और उसके खाते में महज 25 सीटें ही आईं, जबकि पिछली बार उसने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी.

दूसरी ओर, जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन ने राज्य में पूर्व बहुमत हासिल कर लिया है और उसकी सत्ता में वापसी तय हो गई है.

किसी भी एकल पार्टी को बहुमत नहीं

झारखंड राज्य का गठन 2000 में हुआ. अब तक में कोई भी पार्टी अकेले दम पर बहुमत पाने में कामयाब नहीं हो सकी है. इस बार भी ऐसा ही नतीजा आया.

2014 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब की थी. बीजेपी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (एजेएसयू) के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाने में कामयाब रही. हालांकि चुनाव के बाद जेवीएम के 6 विधायकों और एक अन्य विधायक ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद बीजेपी का आंकड़ा बहुमत के पार 44 पहुंच गया था.

झारखंड बनने के बाद सबसे पहला चुनाव 2005 में हुआ था, जिनमें बीजेपी 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि तब वह बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाई थी. इस चुनाव में जेएमएम 17 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही थी.

2009 में हुए विधानसभा चुनाव में भी किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी और जेएमएम 18-18 सीटें जीतने में कामयाब रही थीं. जबकि, कांग्रेस 14 और जेवीएम 11 सीटें जीत दर्ज की थी.

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