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क्या बेटे के खिलाफ उतरेंगे महाबल मिश्रा? सोनिया के फरमान ने धर्मसंकट में डाला

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने विनय मिश्रा को द्वारका सीट से उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली में अपने सभी पूर्व सांसदों और लोकसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ने का फरमान जारी कर दिया है. ऐसे में महाबल मिश्रा धर्म संकट में फंसे हुए नजर आ रहे हैं.

राहुल गांधी के साथ महाबल मिश्रा राहुल गांधी के साथ महाबल मिश्रा

  • केजरीवाल ने जारी की 70 उम्मीदवारों की लिस्ट
  • महाबल मिश्रा पुत्र-पार्टी के बीच धर्म संकट में फंसे

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा आम आदमी पार्टी से चुनावी मैदान में उतरेंगे. अरविंद केजरीवाल ने विनय मिश्रा को द्वारका सीट से उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली में अपने सभी पूर्व सांसदों और लोकसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ने का फरमान जारी कर दिया है. ऐसे में महाबल मिश्रा धर्म संकट में फंसे हुए नजर आ रहे हैं.

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ने का आदेश दिया है. साथ ही दिल्ली की सातों संसदीय सीटों पर लोकसभा प्रत्याशी रहे नेताओं को भी विधानसभा चुनाव में लड़ने का फरमान जारी किया है. इसके चलते कई वरिष्ठ नेताओं को धर्म संकट में डाल दिया है. इनमें से पश्चिम दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके महाबल मिश्रा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है और वह पुत्र-पार्टी के बीच में फंस गए हैं.

महाबल मिश्रा किस सीट से लड़ेंगे चुनाव

महाबल मिश्रा द्वारका सीट से विधायक रह चुके हैं और 2015 में भी इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन जीत नहीं सके थे. सोमवार को उनके बेटे विनय मिश्रा ने कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था और केजरीवाल ने उन्हें 24 घंटे के अंदर ही द्वारका सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया है. इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि महाबल मिश्रा क्या द्वारका सीट पर अपने बेटे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगे या फिर किसी और से सीट से किस्मत आजमाएंगे.

हालांकि महाबल मिश्रा लोकसभा सांसद रह चुके हैं और कद्दावर पूर्वांचली नेता माने जाते हैं. ऐसे में पश्चिम दिल्ली की कई विधानसभा सीटों पर उनका राजनीतिक प्रभाव है. ऐसे में द्वारका सीट पर उनके बेटे के चुनावी मैदान में उतरने के बाद अब उनके सामने पालम और जनकपुरी सीट से चुनाव लड़ने के विकल्प खुले हुए हैं. ऐसे में महाबल मिश्रा चुनाव लड़ेंगे तो किस सीट से लड़ेंगे और अगर नहीं लड़ते हैं तो फिर क्या पुत्र को विधायक बनाने में अहम भूमिका अदा करेंगे?

महाबल मिश्रा का सियासी सफर

बता दें कि महाबल मिश्रा का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के सिरियापुर में हुआ. उन्होंने इंटरमीडियट के बाद मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से डिप्लोमा किया. मिश्रा ने अपना सियासी सफर दिल्ली नगर निगम से पार्षद के रूप में शुरू किया. 1997 में डाबरी सीट से निगम पार्षद चुने गए और एक साल बाद दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई. 1998 में दिल्ली के नसीरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने. इसके बाद 2003 और 2008 में वह द्वारका सीट से विधायक बनने में कामयाब रहे.

मिश्रा 2009 में सांसद बने

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में वह पश्चिमी दिल्ली से सांसद चुने गए. हालांकि 2014 के चुनावों में बीजेपी की लहर के चलते वह तीसरे नंबर पर खिसक गए थे और 2019 के चुनाव में वो दूसरे नंबर पर रहे हैं. उन्हें बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने हराया है. 2014 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद महाबल मिश्रा ने 2015 में द्वारका सीट से मैदान में उतरे, लेकिन जीत नहीं सके. अब बेटा द्वारका सीट से है और पार्टी ने उन्हें भी चुनाव लड़ने का फरमान जारी कर दिया है.

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