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पटना साहिब विधानसभा सीट: 25 साल से जीतती आ रही भाजपा, क्या रिकॉर्ड बनाएंगे कैबिनेट मंत्री?

पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला डबल पार्टी से था यानी राजद-जदयू के गठबंधन से. लेकिन इस बार सीन पूरा बदल गया है.

बिहार सरकार में मंत्री नंद किशोर यादव बिहार सरकार में मंत्री नंद किशोर यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में शुरू हुई चुनावी सरगर्मी
  • पटना साहिब विधानसभा पर भाजपा का दबदबा
  • 25 साल से जीतते आ रहे हैं नंद किशोर यादव

बिहार की सबसे वीआईपी सीट में से एक पटना साहिब विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ है. बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री नंद किशोर यादव यहां से विधायक हैं. अब एक बार फिर यहां से वो चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. पिछले चुनाव में उन्हें कड़ी टक्कर मिली थी, लेकिन इस बार कोशिश पूरी तरह से बेड़ा पार लगाने की है. शहरी सीट होने के कारण यहां की समस्याएं अलग हैं लेकिन बारिश और बाढ़ के वक्त भर जाने वाला पानी और बिजली की समस्या स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुश्किल है. 

कौन-कौन है मैदान में?
आरएलएसपी – जगदीप प्रसाद वर्मा
बीजेपी – नंद किशोर यादव
कांग्रेस – प्रवीण सिंह
जन अधिकार पार्टी – महमूद कुरैशी

कब होना है चुनाव? 
पहला चरण – 3 नवंबर
नतीजा – दस नवंबर

पटना साहिब सीट का राजनीतिक इतिहास
राज्य की सबसे प्रमुख सीट पटना साहिब विधानसभा प्रदेश की सबसे पुरानी सीटों में से भी एक है. पहले इसका नाम पटना ईस्ट विधानसभा सीट हुआ करता था. 1957 में पहली बार चुनाव हुआ और शुरुआती दो चुनाव कांग्रेस के खाते में रहे. लेकिन उसके बाद से यहां जनसंघ ने अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी. फिर कांग्रेस ने वापसी की, बीच में जनता पार्टी भी आई. लेकिन 1995 में यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की और तब से अबतक ये सीट बीजेपी के पास ही है. 

क्या कहता है सामाजिक तानाबाना?
यहां कुल वोटरों की संख्या साढ़े तीन लाख के करीब है, जिसमें से 54 फीसदी पुरुष वोटर हैं. अगर जातिगत आंकड़ों को देखें तो इस सीट पर वैश्य समाज का दबदबा रहता है, जिनके करीब 80 हजार के करीब वोटर हैं. उसके बाद कोइरी, कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी बड़ी संख्या में हैं. जबकि यादव जाति के वोटर पचास हजार से अधिक हैं. ऐसे में भाजपा की ओर से यहां नंद किशोर यादव को मौका मिलता रहा है और वो हर बार जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं. 

2015 चुनाव के नतीजे कैसे थे?
पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला डबल पार्टी से था यानी राजद-जदयू के गठबंधन से. लेकिन इस बार सीन पूरा बदल गया है. 2015 के चुनाव में भाजपा विधायक और दिग्गज मंत्री नंद किशोर यादव काफी छोटे अंतर से चुनाव जीते थे और आखिरी राउंड में ही बाजी मार पाए थे. 2015 में नंद किशोर यादव को 88108 वोट मिले, जबकि राजद के संतोष मेहता को 85 हजार के करीब वोट मिले थे. 

स्थानीय विधायक का रिपोर्ट कार्ड
नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति में बड़ा नाम हैं. भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता हैं जिनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से होते हुए कैबिनेट मंत्री तक आया है. उन्होंने पटना साहिब सीट से 1995 में चुनाव लड़ा था और तब से अबतक हर चुनाव जीते हैं. यानी पिछले 25 साल से वो ही इस सीट पर विधायक हैं. अभी वो बिहार सरकार में सड़क मंत्री हैं. इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई पदों पर रह चुके हैं. 1998 से 2003 तक वो बिहार बीजेपी के प्रमुख भी रहे हैं. 

 

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