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दानापुर विधानसभा सीट: कभी लालू ने लड़ा था यहां से चुनाव, आज है बीजेपी का गढ़

जब राष्ट्रीय जनता दल का उदय हुआ तो उसके खाते में ये सीट भी चली गई. राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी इस सीट पर कब्जा जमाया था. लेकिन उसके बाद 2005 में यहां बीजेपी की एंट्री हुई और तभी से उसका इस सीट पर कब्जा है. 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में विधानसभा चुनाव की हलचल तेज
  • दानापुर विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा
  • अबकी बार जीत का चौका लगाने की कोशिश

बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, अब दस नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की दानापुर विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 52.57 फीसदी मतदान हुआ.

पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में आने वाली दानापुर विधानसभा सीट की अगर बात करें तो ये भारतीय जनता पार्टी का गढ़ मानी जाती रही है. बीजेपी आशा देवी यहां पर 2005 से कब्जा जमाए हुए हैं, ऐसे में विरोधियों के लिए उनको मात देना आसान नहीं होगा. यहां दूसरे नंबर के लिए कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों में टक्कर होती रहती है.

कौन-कौन है मैदान में?
भारतीय जनता पार्टी – आशा देवी
RLSP – दीपक कुमार
एनसीपी – मनोज सिन्हा 
राजद – रीतलाल रे

कब होना है चुनाव? 
दूसरा चरण – 3 नवंबर
नतीजा – दस नवंबर

विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास
दानापुर विधानसभा सीट पर आजादी के बाद से 80 के दशक तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा था. लेकिन 1985 के बाद जनता दल ने यहां अपनी जगह बनानी शुरू कर दी. उसके बाद भाजपा ने यहां कब्जा जमाया लेकिन फिर जब राष्ट्रीय जनता दल का उदय हुआ तो उसके खाते में ये सीट भी चली गई. राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी इस सीट पर कब्जा जमाया था. लेकिन उसके बाद 2005 में यहां बीजेपी की एंट्री हुई और तभी से उसका इस सीट पर कब्जा है. 

क्या कहता है समीकरण?
पटना से कुछ ही दूरी पर मौजूद दानापुर अभी भी विकास की राह देख रहा है. लेकिन यहां की राजनीति में जाति का काफी अहम है. दानापुर यादव व वैश्य बहुल इलाका है. लेकिन जातीय समीकरण पर गौर करें तो यादव और वैश्य के बाद सबसे ज्यादा वोटर अगड़ी जातियों से है. यहां तीन लाख से अधिक वोटर हैं, जिनमें से 80 हजार के करीब यादव तो 60 हजार से अधिक अगड़ी जाति से आते हैं. 

2015 में कैसा था नतीजा?
पिछले विधानसभा चुनाव में राजद और जदयू एक साथ थीं. जिसका असर इस सीट पर भी दिखा था और बीजेपी को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था. बीजेपी की आशा देवी को यहां पिछले चुनाव में 72 हजार के करीब वोट मिले थे, जबकि राजद के राज किशोर यादव को 66 हजार वोट मिले थे. ऐसे में मुकाबाल काफी कड़ा था, लेकिन बाजी बीजेपी के हाथ लगी थी. 

विधायक के बारे में जानकारी 
भारतीय जनता पार्टी की विधायक आशा देवी यहां से तीन बार से चुनाव जीत रही हैं. आशा देवी बीजेपी के नेता रहे सत्यनारायण सिन्हा की पत्नी है, जिनकी हत्या राजनीतिक विवाद में कर दी गई थी. उसके बाद से ही 2001 में आशा देवी ने राजनीति में प्रवेश लिया और फिर 2005 से विधायक हैं. पटना के कराई से आने वाली आशा देवी के दो बेटे हैं और दो ही बेटी हैं. 


 

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