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हरलाखी विधानसभा: क्या NDA पर महागठबंधन पड़ेगा भारी?

हरलाखी विधानसभा के विधायक सुधांशु शेखर हैं. इन्होंने 2016 के उपचुनाव में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से जीत दर्ज की थी लेकिन मई 2019 में पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए थे.

जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर (फाइल फोटो) जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हरलाखी के विधायक हैं सुधांशु शेखर
  • 2016 के उपचुनाव में मिली थी जीत
  • राजनीति में आने से पहले थे बैंक कर्मचारी

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में हरलखी विधानसभा नंबर 31 है. इस सीट से राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से सुधांशु शेखर को 2016 के उपचुनाव में जीत मिली थी. हालांकि वे 26 मई 2019 को राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी छोड़कर जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए. यह विधानसभा सीट मधुबनी जिले के अंतर्गत आती है.

मधुबनी जिले के अंतर्गत कुल 10 विधानसभाएं आती हैं. हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर, झांझरपुर, फुलपरास और लौखहा.

दरअसल 2015 के चुनाव में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता बसंत कुमार को जीत मिली थी. उन्होंने कांग्रेस के निकटम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद शब्बीर को हराया था. जहां आरएलएसपी को 40,468 वोट मिले थे, वहीं मोहम्मद शब्बीर को कुल 36,576 मत हासिल हुए थे. दुर्भाग्य से चुनाव जीतने के बाद बसंत कुमार का आकस्मिक निधन हो गया. वे शपथ भी नहीं ले सके थे. साल 2016 में इसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए गए. इस चुनाव में बसंत कुमार के बेटे सुधांशु शेखर ने जीत हासिल की. 

2015 का चुनाव  

2015 के चुनाव में तब आरएलएसपी एनडीए का हिस्सा थी. उस चुनाव में हरलाखी विधानसभा सीट से बसंत कुमार ने महागठबंधन के समर्थन वाले मोहम्मद शब्बीर को पटखनी दी थी. उससे पहले साल 2010 के चुनाव में जनता दल यूनाइटेड का इस सीट पर कब्जा था. इस सीट से शालिग्राम यादव विधायक चुने गए थे. उन्होंने सीपीआई के राम नरेश पांडेय को पटखनी दी थी. इस सीट पर कुल 16 बार चुनाव हुए हैं, जिनमें 2 उपचुनाव शामिल हैं. 

1951 से चले आ रहे वोटिंग पैटर्न को देखें तो इस विधनासभा सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और कांग्रेस का दबदबा रहा है. लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं. नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी भी हो गई है. ऐसे में इस बार समीकरण जाहिर तौर पर अलग होंगे. 

इस चुनाव में कुल चार चेहरे प्रमुख रहे. सुधांशु शेखर को 62,434 मत मिले, तो कांग्रेस के मोहम्मद शब्बीर को 43,784 वोट मिले. सीपीआई के राम नरेश पांडेय को 19,835 वोट मिले तो मदन चंद्र झा को 2,826 वोट मिले.

सीट का इतिहास

1951 में इस सीट पर पहली बार चुनाव संपन्न कराए गए. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अनक किशोर देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र नारायण चौधरी को मात दी थी. 1962 के चुनाव में इस सीट से सीपीआई के बद्रीनाथ यादव को जीत मिली थी. उन्होंने कांग्रेस पार्टी की नेता रामदुलारी शास्त्री को चुनावी समर में पटखनी दी थी. फिर 1967 के चुनाव में भी इस सीट से बैद्यनाथ यादव को ही जीत मिली थी. लगातार दो बार सीपीआई का इस सीट पर कब्जा रहा. फिर 1969 और 1972 के चुनाव में कांग्रेस को यह सीट हासिल हुई.

सामाजिक ताना बाना

इस विधानसभा में कुल 2,58,296 वोटर्स हैं, जिनमें 1,35,504 पुरुष और 1,22,784 महिलाएं हैं. आठ थर्ड जेंडर भी यहां के वोटर हैं. 2015 के चुनाव में यहां कुल 56.23 फीसदी मत पड़े थे. मधुबनी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान के लिए विख्यात है. मधुबनी आर्ट और हस्तशिल्प का देशभर में क्रेज है. यह मिथिला संस्कृति के केंद्र के तौर पर जानी जाती है. आज मधुबनी कला विश्वभर में विख्यात है.


विधायक के बारे में 

सुधांशु शेखर का जन्म 15 जुलाई 1988 को मधुबनी जिला के दुर्गापट्टी में हुआ था. समाज शास्त्र से स्नातक सुधांशु शेखर राजनीति में पिता के निधन के बाद 2016 में सक्रिय हुए. साल 2012 से 22 जनवरी 2016 तक सुधांशु शेखर बिहार ग्रामीण बैंक में बीसी के पद पर कार्यरत रहे.  साहित्य और महापुरुषों की जीवनी का अध्ययन करना, इनकी अभिरुची है. समाजसेवा में नौकरी के दिनों से ही सुधांशु शेखर सक्रिय थे. 2019 से लगातार ही सुधांशु शेखर, नीतीश कुमार से मिलते रहे हैं. ऐसे में इनकी गिनती नीतीश के करीबी नेताओं में हो रही है.

सुधांशु शेखर युवा नेता हैं, ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि क्या पार्टी दोबारा उन्हें यहां से चुनाव लड़ाएगी या नहीं. हालांकि उनके पिता की गिनती बिहार के दिग्गज समाजवादी नेताओं में होती थी. एनडीए बनाम महागठबंधन की लड़ाई में देखते हैं, नए सियासी समीकरण क्या होंगे.

किस-किसके के बीच है मुकाबला?

हरलाखी विधानसभा चुनाव में एनडीए बनाम महागठबंधन का मुकाबला है. जनता दल(यूनाइटेड) की ओर से इस सीट से विधायक सुधांशु शेखर हैं, उनके सामने महागठबंधन की ओर से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार राम नरेश पांडेय सामने हैं.

वहीं अन्य राजनीतिक पार्टियों में लोक जनशक्ति पार्टी पार्टी से विकास कुमार मिश्रा, भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी से संजीव कामत, प्लूरल्स पार्टी से मंगेश झा, संयुक्त विकास पार्टी से देवान मुखिया, जन अधिकार पार्टी से संतोष कुमार झा चुनावी समर में भाग्य आजमा रहे हैं.

कब है चुनाव?

हरलाखी में तीसरे चरण में वोटिंग होगी. तीसरे चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर चुनाव होना तय है. इस सीट पर 7 नवंबर को यहां वोट डाले जाएंगे और 10 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे.

 

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