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बिहार चुनावः 2015 में 150 दलों से आगे रहा NOTA, मांझी की पार्टी से भी ज्यादा मिले थे वोट

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में निर्दलीय उम्मीदवारों के अलावा 157 दलों ने 2015 के चुनाव में हिस्सा लिया था. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत 6 राष्ट्रीय दलों के अलावा राज्य के 6 राज्य स्तरीय पार्टी भी चुनाव में शामिल हुए थे. जबकि समाजवादी पार्टी समेत 9 दल अन्य राज्यों की राज्य स्तरीय पार्टियां थीं जिन्होंने बिहार में चुनाव लड़ा.

2015 के चुनाव में बिहार करीब साढ़े 9 लाख वोट NOTA में पड़े थे (फोटो-सांकेतिक-पीटीआई) 2015 के चुनाव में बिहार करीब साढ़े 9 लाख वोट NOTA में पड़े थे (फोटो-सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • SC के आदेश के बाद में 2013 से NOTA की शुरुआत
  • 2015 के चुनाव में बिहार में 157 दलों ने हिस्सा लिया था
  • मायावती की बसपा भी NOTA से बहुत पीछे रही थी
  • 2015 में NOTA में पड़े थे 9.47 लाख से ज्यादा वोट

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगरमी तेज हो गई है. कोरोना काल के बीच सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनाव अभियान में जुट गए हैं. इस बार के चुनाव और 2015 के चुनाव को लेकर आज NOTA  पर चर्चा करते हैं. सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम में ऊपर में से कोई नहीं यानी NOTA का भी विकल्प दिया. 

हालांकि चुनाव आयोग ने 2009 में NOTA का इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर शुरू किया था, लेकिन 2013 में इसे भारतीय चुनाव का हिस्सान बना लिया गया.

चुनाव आयोग की ओर से ईवीएम में NOTA का विकल्प दिए जाने के बाद 2015 में बिहार में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे, और बड़ी संख्या में मतदाताओं ने उम्मीदवारों की जगह NOTA  के पक्ष में बटन दबाया था. NOTA  को पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) से भी ज्यादा वोट मिले थे.

2015 के चुनाव में कुल 157 दल
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में निर्दलीय उम्मीदवारों के अलावा 157 दलों ने 2015 के चुनाव में हिस्सा लिया था. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत 6 राष्ट्रीय दलों के अलावा 6 राज्य स्तरीय पार्टी भी चुनाव में शामिल हुए थे. जबकि समाजवादी पार्टी समेत 9 दल अन्य राज्यों की राज्य स्तरीय पार्टियां थीं जिन्होंने बिहार में चुनाव लड़ा. इसके अतिरिक्त शेष अन्य छोटे-छोटे दल चुनाव में शामिल हुए थे.

2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार में कुल 6,68,26,658 मतदाता थे जिसमें 3,81,19,212 मतदाताओं ने वोट डाले और 3,71,71,936 वोट वैध पाए गए. इस तरह से राज्य में 57 फीसदी वोटिंग हुई थी. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 25 फीसदी यानी कुल 93,08,015 वोट मिले. दूसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल रही जिसके खाते में 69,95,509 (18.8%) वोट आए.

जनता दल यूनाइटेड को 17 फीसदी वोट
जनता दल यूनाइटेड वोट के आधार पर तीसरे स्थान पर रही और उसे 17.3% के साथ 64,16,414 वोट मिले. जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 9.6% यानी 35,80,953 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे. कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही थी जिसे 25,39,638 वोट मिले थे.

राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी 18,40,834 वोट (5.0%) हासिल कर छठे स्थान पर रही थी. जबकि सातवें स्थान पर राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी थी. जिसके खाते में 9,76,787 यानी कुल वोट का 2.6% वोट आए.

ओवरऑल सातवें नंबर पर रहे NOTA
शीर्ष पर रहे 6 दलों और 1,150 निर्दलीय उम्मीदवारों को मिले कुल वोट के बाद सातवें नंबर पर NOTA  रहा. NOTA  को चुनाव में 9,47,276 वोट मिले थे जो कुल मिले वोटों का 2.4% था और यह हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और बहुजन समाज पार्टी से भी ज्यादा रहा.

जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) को 8,64,856 वोट मिले जबकि इसके बाद मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी का नंबर रहा. बीएसपी को 7,88,024 यानी 2.1 फीसदी वोट मिले. 

2015 के चुनाव में उतरे 1,150 निर्दलीय उम्मीदवारों को कुल मिले 9.6% वोट को छोड़ दिया जाए तो राज्य में उक्त 8 दलों को कुल वोट में से 2 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे. हालांकि मायावती की पार्टी को 2.1% (7,88,024 वोट) वोट मिले जरुर लेकिन 228 उम्मीदवार उतारने वाली पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. महज 1 सीट पर वह दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि मांझी की पार्टी को 21 में से 1 सीट पर जीत मिली थी. 

NOTA  के साथ बिहार में दूसरी बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में 9.47 लाख से ज्यादा वोट NOTA  के पक्ष में गए थे जिस कारण कई जगहों पर हार-जीत का समीकरण गड़बड़ा गया था. अब देखना होगा कि बिहार के मतदाताओं की ओर से NOTA  के पक्ष में कितने वोट डाले जाते हैं. क्या इस बार यह आंकड़ा 10 लाख के पार होगा.

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