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बिहार चुनाव: दो राज्यों और दो नदियों के बीच बसा और बंटा जेपी का गांव सिताब दियारा

बिहार में हर बार के चुनावी वादों के बावजूद विकास के लिए जूझते गांवों की कहानी दशकों से बदस्तूर वैसी की वैसी बनी हुई है. कुछ ऐसी ही कहानी है संपूर्ण क्रांति के जनक जेपी के गांव सिताब दियारा की. ये गांव दो राज्यों और दो नदियों के बीच बसा और बंटा है.

 स्वतंत्रता सेनानी और महान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण स्वतंत्रता सेनानी और महान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार के सारण जिले में है जेपी का गांव सिताब दियारा
  • दो राज्यों और दो नदियों के बीच बसा है सिताब दियारा
  • चुनावी वादों के बावजूद लोगों की समस्याएं जस की तस

बिहार को राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य माना जाता है. इस राज्य ने देश में संपूर्ण क्रांति के रूप में बड़ा राजनीतिक आंदोलन खड़ा करके दिखाया था और देश की सत्ता में परिवर्तन का सफल प्रयोग भी. इस क्रांति के जनक थे लोकनायक जयप्रकाश नारायण. जिन्होंने 1970 के दशक में इमरजेंसी के खिलाफ संपूर्ण क्रांति कर युवाओं-छात्रों और विपक्षी दलों को एकजुट कर इंदिरा गांधी की सत्ता को चुनौती दी थी और सत्ता से बाहर भी कर दिया था. उन्हीं जेपी का गांव है सिताब दियारा. जो कि दो राज्यों और दो नदियों के बीच बसा और बंटा है और दशकों से विकास की बाट जोह रहा है.

स्वतंत्रता सेनानी और महान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सिताब दियारा में हुआ था. सिताब दियारा पश्चिमी बिहार के छपरा और यूपी के बलिया के बीच में बसा इलाका है. ये इलाका गंगा और घाघरा नदियों के बीच में पड़ता है. टूटी सड़कें, हर साल आने वाली बाढ़ और पीपा पुल की डिमांड यहां के बड़े चुनावी मुद्दे हैं. सिताब दियारा के जयप्रकाश नगर में जेपी का स्मारक है जो कि यूपी के बलिया में पड़ता है जबकि यहां से थोड़ी ही दूरी पर स्थित लालाटोला में उनका पैतृक घर है जो कि बिहार के छपरा में पड़ता है.

सिताब दियारा के दर्जनों गांवों की किस्मत हर साल दोनों नदियों के पानी और बाढ़ पर निर्भर करता है. कभी पानी में घिरकर कुछ इलाके यूपी के इलाकों के करीब हो जाते हैं तो कभी बिहार के इलाकों से जुड़ाव रहता है और यूपी के इलाकों से संपर्क टूट जाता है. बरसात के मौसम में नदियों का पानी उफान पर होता है तो कटान के कारण कई इलाके नदी क्षेत्र में मिल जाते हैं. बड़ी संख्या में किसानों को इससे दिक्कत होती है जब उनकी खेती की जमीन नदी में डूब जाती है.

बिहार और यूपी सरकारों की ओर से जेपी के गांव के लिए कई योजनाओं का ऐलान समय-समय पर किया जाता रहा लेकिन स्थानीय लोगों की समस्याएं जस की तस है. सिताब दियारा का इलाका बिहार के छपरा विधानसभा सीट के तहत आता है. छपरा सारण जिले का मुख्यालय है और पश्चिम बिहार के सारण जिले की 10 विधानसभा सीटों में से एक विधानसभा सीट भी.

कब है यहां चुनाव?
छपरा इलाका सारण जिले में आता है. सारण जिले में 10 विधानसभा सीटें हैं. जहां दूसरे चरण में 3 नवंबर को मतदान होगा. और चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे. यहां वोटरों की संख्या 2 लाख 80 हजार के करीब है. जिसमें से 1,53,790 पुरुष और 1,26,284 महिला वोटर हैं.

क्या है छपरा सीट का सियासी गणित?
छपरा विधानसभा सीट से अभी वर्तमान विधायक हैं बीजेपी के डॉ. सीएन गुप्ता. जिन्होंने आरजेडी के रंधीर कुमार सिंह को 2015 के चुनाव में करीब 11 हजार वोटों से हराया था. इस सीट से पिछले 5 चुनावों में से दो बार बीजेपी, दो बार जेडीयू और एक बार आरजेडी को जीत हासिल हुई है. 2014 के विधानसभा उपचुनाव में यहां से रंधीर कुमार सिंह आरजेडी के टिकट पर जीते थे लेकिन 2015 का चुनाव वे बीजेपी उम्मीदवार से हार गए थे.

सारण जिला बिहार को 5 से ज्यादा मुख्यमंत्री दे चुका है और आरजेडी के मुखिया लालू यादव भी सारण लोकसभा सीट से ही चुनाव जीतकर संसद जाते रहे हैं. अभी वर्तमान में सारण से लोकसभा के सांसद बीजेपी नेता राजीव प्रताप रुडी हैं.

 

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