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किसानों के गुस्से का डर? कृषि बिल की समर्थक JDU अब MSP की गारंटी चाहती है

मोदी सरकार के कृषि विधेयक के फैसले पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू मजबूती से खड़ी रही है, जबकि शिरोमणि आकाली दल ने इस मसले पर सरकार का साथ छोड़ दिया है. इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया है. किसान संगठन एकजुट होकर विधेयक के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं. ऐसे में जेडीयू अब बीजेपी से अलग सुर आलाप रही है और एमएसपी गांरटी की मांग कर रही है. 

जेडीयू नेता केसी त्यागी और सीएम नीतीश कुमार जेडीयू नेता केसी त्यागी और सीएम नीतीश कुमार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि संबंधी बिल के खिलाफ किसान आक्रोशित
  • किसान के मुद्दे पर JDU ने बदला अपना रुख
  • सीएए-एनआरसी पर भी नीतीश ले चुके हें यू-टर्न

देश के किसानों की दशा सुधारने के लिए मोदी सरकार ने कृषि से जुड़े तीनों विधेयकों को संसद से पास कराने में कामयाब रही है. मोदी सरकार के इस फैसले पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू मजबूती से खड़ी रही है जबकि शिरोमणि आकाली दल ने इस मसले पर सरकार का साथ छोड़ दिया है. इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया है. किसान संगठन एकजुट होकर विधेयक के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं. ऐसे में जेडीयू अब बीजेपी से अलग सुर आलाप रही है और एमएसपी गांरटी की मांग उठा रही है. 

मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार कानून को किसान अपने हित में नहीं मान रहे हैं. इन तीन बिल के खिलाफ किसान आक्रोशित हैं और एकजुट होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं. किसान संगठनों ने इसके विरोध में 25 सितंबर को भारत बंद बुलाया है. कृषि संबंधी विधेयकों के बहाने किसान संगठन ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियां भी मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद हैं. ऐसे में किसानों की हितौशी होने का दम भरने वाली जेडीयू पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके चलते अब पार्टी ने यू-टर्न ले लिया है. 

किसानों के मुद्दे पर जेडीयू ने उसी तरह से रुख बदला है, जैसे सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर यू-टर्न लिया था. संसद के दोनों सदनों में जेडीयू ने सीएए की तरह ही कृषि विधेयक का समर्थन किया है. सीएए को लेकर देश भर में मुस्लिम समुदाय सहित तमाम लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद नीतीश कुमार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पास कर कहा था कि एनआरसी नहीं होगी और एनपीआर पुरानी प्रक्रिया पर किया जाएगा. 

किसानों के मुद्दे पर भी जेडीयू उसी फॉर्मूले पर चलती नजर आ रही है. संसद में तो विधेयक के समर्थन में थी, लेकिन अब सड़क पर किसानों के विरोध को देखते हुए अपना नजरिया बदला है. बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू किसान बिल के मसले पर फूंक-फूंक कर चल रही है. जेडीयू ने कहा है कि वह किसान बिल को लेकर विभिन्न किसान संगठनों की मांग के साथ खड़ी है. 

बता दें कि देश के सभी किसान संगठन न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर कृषि उत्पादों की खरीदारी को अपराध घोषित करने की मांग कर रहे हैं. किसान संगठनों को आशंका है कि इस किसान कानून की आड़ में निजी कंपनियां किसानों से एमएसपी से कम मूल्य पर चीजें खरीद लेंगी. इतना ही नहीं आने वाले समय में खेती में भी कंपनी राज स्थापित हो जाएगा, जिसके बाद कॉरपोरेट मनमाने तरीके से किसानों की फसल की खरीदारी करेंगे. 

जेडीयू के राज्यसभा सांसद और मुख्य महासचिव केसी त्यागी ने एक अंग्रेजी अखबार से कहा कि हमने दोनों विधेयकों का संसद में स्वागत किया है. हमारी पार्टी ने इनका समर्थन किया है. लेकिन हम किसानों की उस मांग का भी समर्थन कर रहे हैं, जिसमें एक कानून बनाने को कहा जा रहा है जिससे कि निजी कंपनियां किसानों से एमएसपी से कम दाम पर उत्पाद न खरीदें. इसको लेकर किसी भी उल्लंघन को दंडात्मक अपराध करार देना चाहिए.

हालांकि, केसी त्यागी से जब यह पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी इसको लेकर आधिकारिक तौर पर मांग रखेगी तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया है कि एमएसपी जारी रहेगा. इस बारे में पीएम ने संसद में बोला है कि एमएसपी उल्लंघन अपराध माना जाएगा. हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के नेता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जेडीयू के किसानों की चिंता थी तो संसद में बिल का क्यों समर्थन किया है. किसान संगठन तो पहले से ही मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जेडीयू अपनी लाज बचाने के लिए ऐसी बातें कर रही है, वह तो बिहार में पहले ही किसानों को बर्बाद कर चुकी है. 


 

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