बीजेपी उम्मीदवार अमरेंद्र प्रताप सिंह आरा विधानसभा सीट से जीत गए हैं. उन्होंने सीपीएमएल उम्मीदवार कयामुद्दीन अंसारी को हराया. हालांकि शुरुआत में कयामुद्दीन अंसारी आगे चल रहे थे लेकिन आखिरकार बीजेपी उम्मीदवार 45 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर चुनाव जीत गए. वहीं सीपीएमएल उम्मीदवार को 43 प्रतिशत वोट मिले हैं. यानी कि दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली.
बिहार की आरा विधानसभा सीट पर 28 अक्टूबर को वोट डाले गए, यहां कुल 47.67 फीसदी मतदान हुआ.
कौन है उम्मीदवार?
• अमरेंद्र प्रताप सिंह – भाजपा
• प्रवीण कुमार सिंह – रालोसपा
• कयामुद्दीन अंसारी – सीपीआई (एमएल)
मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर
क्या कहता है सीट का इतिहास?
आरा विधानसभा सीट भोजपुर जिले में आती है, आरा एक लोकसभा क्षेत्र भी है. 1951 में ये सीट बनी थी, तब कांग्रेस का ही कब्जा रहा था. 1969 में पहली बार कांग्रेस को हार मिली और सोशलिस्ट पार्टी यहां आई. 1972 के बाद कांग्रेस कभी यहां वापस ना आ सकी. पहले लोकदल, फिर जनता पार्टी और अंत में भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाए रखा. लगातार चार बार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा को पिछले चुनाव में हार मिली थी.
क्या कहता है जातीय समीकरण?
आरा इलाके में भी यादव और मुस्लिम वोटों का नतीजों पर बड़ा प्रभाव रहता है. यही कारण रहा कि पिछले चुनाव में राजद को MY फॉर्मूले तहत जीत मिल पाई थी. और इसी जातीय फॉर्मूले ने कांटे के मुकाबले में भाजपा को मात दी थी. पिछले चुनाव में इस सीट पर करीब पौने तीन लाख वोटर थे, जिसमें 1.45 लाख वोटर पुरुष थे.
पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे?
2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू और राजद एक साथ थे, यही कारण रहा कि भाजपा के हाथ से ये सीट निकल गई थी. 2000 से 2010 तक यहां पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से विधायक रहे अमरेंद्र प्रताप सिंह को पिछले चुनाव में मात्र 666 वोट से हार मिली थी. राजद के नवाज आलम को कुल 70004 वोट मिले थे, जबकि अमरेंद्र प्रताप को 69338 वोट मिल पाए थे.