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बैटल बंगाल: TMC की स्टार मिमी चक्रवर्ती के इलाके का क्या है सियासी हाल?

टीएमसी स्टार मिमी चक्रवर्ती के ऊपर न सिर्फ अपने लोकसभा की सातों विधानसभा सीटें ममता की झोली में देने की जिम्मेदारी है, बल्कि भाजपा के धुआंधार प्रचार, प्रोपगैंडा वार का भी जवाब देना है.

TMC सांसद मिमी चक्रवर्ती (फोटो- ट्विटर) TMC सांसद मिमी चक्रवर्ती (फोटो- ट्विटर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2019 में मोदी लहर का सामना कर जीती थीं मिमी
  • मिमी चक्रवर्ती के संसदीय क्षेत्र में हैं 7 सीटें
  • बीजेपी के प्रचार के बीच ममता की स्टार पावर की परीक्षा

टीएमसी की स्टार पावर की लिस्ट में शामिल सांसद मिमी चक्रवर्ती सियासत में आने से पहले मॉडल थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी ने जब अपनी पूरी ताकत झोंक दी तो ममता ने बीजेपी की राजनीतिक शक्ति का मुकाबला करने के लिए बंगाली स्टारडम को भुनाया. उन्होंने राज्य के अहम लोकसभा सीट जादवपुर से 30 साल की अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती को टिकट दे दिया. 

2019 में मिमी ने मोदी लहर को रोका

मिमी चक्रवर्ती से मुकाबले के लिए बीजेपी ने स्थानीय हैवीवेट अनुपम हाजरा को टिकट दिया था, जबकि सीपीएम की ओर से मुकाबले में विकास रंजन भट्टाचार्य थे. मगर मिमी चक्रवर्ती ने अपनी लोकप्रियता, ममता के चेहरे और सोनार बांग्ला के सपने के दम पर बंगाल में मोदी लहर को सफलतापूर्वक रोक दिया. उन्होंने बीजेपी नेता अनुपम हाजरा को लगभग 2 लाख 95 हजार वोटों के भारी भरकम मार्जिन से हराया. सीपीएम तीसरे स्थान पर रही.

2019 से 21 के बीच बंगाल की सियासत में तपिश बढ़ गई है. 2019 में लोकसभा की लगभग आधी सीटों पर कब्जा करने के बाद बीजेपी ने इस बार ममता को सत्ता से बेदखल करने का बिगूल फूंक दिया है और 200 प्लस का नारा दिया है. लिहाजा इस बार ममता के सिपहसालारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है.  

टीएमसी स्टार मिमी चक्रवर्ती के ऊपर न सिर्फ अपने लोकसभा की सातों विधानसभा सीटें ममता की झोली में देने की जिम्मेदारी है, बल्कि भाजपा के धुआंधार प्रचार, प्रोपगैंडा वार का भी जवाब देना है.

2016 में 7 में 6 सीटों पर TMC का कब्जा

मिमी चक्रवर्ती जादवपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं. जादवपुर लोकसभा सीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ता है. जादवपुर लोकसभा सीट में पश्चिम बंगाल विधानसभा की 7 सीटें हैं. 

जादवपुर लोकसभा की सभी 7 सीटें दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ती है. यह बंगाल का सबसे बड़ा जिला और जनसंख्या के अनुपात में भारत का छठा सबसे बड़ा जिला है. इस लोकसभा सीट में ये 7 विधानसभा सीटें आती हैं.

1- बारुईपुर पूर्व (एससी) 
2- बारुईपुर पश्चिम 
3-सोनारपुर दक्षिण
4-सोनारपुर उत्तर 
5-टॉलीगंज 
6-भांगर 
7-जादवपुर

2016 के विधानसभा चुनाव में इन सात सीटों में 6 पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. जबकि बाकी बची जादवपुर सीट पर सीपीएम को जीत मिली थी. इस सीट पर सीपीएम के सुजान चक्रवर्ती ने जीत हासिल की थी. उन्होंने टीएमसी के मनीष गुप्ता को लगभग 15 हजार वोटों से हराया था. बता दें कि मनीष गुप्ता वहीं हैं जिन्होंने 2011 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य को हराया था. 

टीएमसी ने इन सीटों के लिए अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन चर्चा है कि कई उम्मीदवारों का टिकट कट सकता है. लिहाजा सबकी नजरें कैंडिडेट लिस्ट पर हैं, इस लिस्ट के आने के बाद चुनावी समीकरण और स्पष्ट होकर उभरेगा.

विधानसभा क्षेत्र में कैसा है मिजाज?

बंगाल में अभी प्रचार अभियान चरम पर है. सोनारपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के निवासी शांतनु विश्वास कहते हैं उनके इलाके में ठीक ठाक काम हुआ है. झोपड़ पट्टी को हटाया जा रहा है, सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है. छात्राओं को साइकिलें मिली हैं. हालांकि युवाओं में रोजगार को लेकर और भी उम्मीदें हैं. लेकिन फिलहाल उनकी चिंता राज्य में बन रहे मौजूदा समीकरणों को लेकर है. शांतनु विश्वास कहते हैं कि राज्य में सीपीएम, कांग्रेस और अब्बास सिद्दीकी के इंडियन सेकुलर फ्रंट का गठबंधन ममता और बीजेपी दोनों के लिए चिंताजनक हैं. वो कहते हैं कि इस चुनाव में सीपीएम के कुछ समर्थक ममता को और ज्यादातर बीजेपी को वोट करने वाला था. 

TMC सांसद मिमी चक्रवर्ती (फोटो- ट्विटर)

लेकिन सीपीएम, कांग्रेस और ISF के बीच गठबंधन के बाद CPM फिर रेस में आ गई है. शांतनु विश्वास कहते हैं कि अब सीपीएम का समर्थक अपनी ही पार्टी को वोट देने की सोच रहा है. क्योंकि उसे लगता है कि दो दलों के साथ मिलकर CPM अपने दम पर कुछ कर सकती है. वहीं लगभग जिस 27 प्रतिशत मुस्लिम वोट पर ममता बनर्जी दावा करती थी उसके दो नए दावेदार सामने आ गए हैं. इनमें अब्बास सिद्दीकी का इंडियन सेकुलर फ्रंट और सांसद ओवैसी की पार्टी AIMIM शामिल हैं. इन दोनों के आने के बाद मुस्लिम वोटों का बंटना तय माना जा रहा है. हालांकि बीजेपी को इससे फायदा हो सकता है. 

पेट्रोल की मार से बीजेपी से चिढ़े लोग

वहीं अरविंद नाम के युवा बताते हैं कि बंगाल का शहरी वर्ग अभी भी ममता के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन ग्रामीण बंगाल में बीजेपी पकड़ मजबूत कर रही है. लेकिन पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों की चुभन सामान्य नागरिक महसूस कर रहा है. अगर पेट्रोलियम की कीमतों का यही ट्रेंड रहा तो इसका नुकसान बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है.  

मिमी ने भी इस मुद्दे को लपक लिया है. रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने मंगलवार को ट्वीट किया, 'आज सुबह एलजीपी गैस हमारे दरवाजे पर आया और मैं ढेर ही हो गई? क्या हुआ तेरा वादा? आत्मनिर्भर क्या ऐसे बनेगा इंडिया, खून बेचकर'. 

'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी'

समीकरणों और कयासों के बीच टीएमसी धुआंधार प्रचार अभियान चला रही है. ममता ने लोगों से जुड़ने के लिए अभी दो अभियान लॉन्च किया है 'दुआरे सरकार' और 'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी'. मिमी इन दोनों अभियानों से जुड़ी हैं. मिमी चक्रवर्ती इन दिनों सीएम ममता बनर्जी के लिए 'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी' अभियान चल रही है. उन्होंने एक वीडियो जारी कर रहा है कि बंगाल की बेहतरी के लिए आप भी इस अभियान को समर्थन दें. इस अभियान में मिमी लोगों को बता रही हैं कि बंगाल का भला बंगाल की बेटी ही कर सकती हैं और ममता के लिए समर्थन मांग रही है. इससे पहले मिमी ममता बनर्जी के दुआरे सरकार कार्यक्रम से जुटी हुई थीं.  

इस कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार की 11 कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए राज्य भर में जगह-जगह पर शिविर लगाए गए थे और जनता को सरकारी कार्यक्रमों का फायदा दिया गया.

बंगाल के प्रतीकों का बीजेपी ने किया अपमान

हाल ही में बीजेपी पर हमला करते हुए मिमी चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा ने बंगाल के सभी प्रतीकों का अपमान किया है. उन्होंने कहा कि इन्होंने विधासागर की प्रतिमा को तोड़ा, स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगौर को अपमानित किया गया. नेता जी की इन्होंने अवहेलना की, बिरसा मुंडा को भूल गए. राष्ट्रगान को गलत गाया और मां दुर्गा का भी अपमान किया. लेकिन बीजेपी ने इसके लिए कभी माफी नहीं मांगी. 

हालांकि मिमी अभी बंगाल बैटल में ऑनलाइन ही ज्यादा सक्रिय हैं, उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर डालें तो वह अभी वर्चुअल स्पेस में बीजेपी से लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन उनके समर्थकों को उनके बंगाल के असली जंग में उतरने का इंतजार है.

 

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