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बंगाल में फिर चला ममता बनर्जी का जादू, जानें दीदी की जीत की 5 बड़ी वजहें

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर जनता ने राज्य की सत्ता की कमान ममता बनर्जी को सौंपी है. पीएम मोदी, अमित शाह और बीजेपी के तमाम दिग्गजों के प्रचार के बाद भी आखिर जीत का ताज ममता के सिर ही सजा. ममता की जीत के पीछे कई बड़ी वजहें रहीं.

बंगाल की जनता ने एक बार फिर ममता को बहुमत दिया है. (फाइल फोटो) बंगाल की जनता ने एक बार फिर ममता को बहुमत दिया है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीपीएम और कांग्रेस का वोट बैंक ममता के साथ
  • बीजेपी पर उल्टा पड़ा ध्रुवीकरण का दांव
  • बीजेपी के पास बड़े चेहरे की कमी

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने एक बार फिर जीत का परचम लहाया है. वहीं, बंगाल में बीजेपी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. दीदी के सामने बीजेपी बंगाल में क्यों ढेर हो गई? बीजेपी की हार में सीधे तौर पर पांच बड़ी वजह दिख रही हैं.

बीजेपी के पास बड़े चेहरे की कमी
पहली बड़ी वजह ये है कि बीजेपी के पास बंगाल में मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं था. स्थानीय नेतृत्व में दिलीप घोष जैसे कुछ नाम थे. लेकिन ममता बनर्जी के सामने विकल्प के तौर पर बीजेपी किसी को भी पेश करने में हिचकिचा गई. दूसरी तरफ टीएमसी के पास ममता बनर्जी जैसा चेहरा था, जिस पर बंगाल भरोसा कर सकता था. ये भी बड़ी बात थी कि टीएमसी की भले ही आलोचना होती थी, लेकिन ममता बनर्जी ने अपनी लोकप्रियता बनाए रखी.

बाहरी का मुद्दा भारी
दूसरी बड़ी वजह ये थी कि बीजेपी के लिए बंगाल में बाहरी का मुद्दा भारी पड़ गया. ममता बनर्जी लगातार इस बात पर बीजेपी पर हमले कर रही थीं कि वो बाहरी लोगों को बंगाल में लेकर आ रही है. और अगर बीजेपी चुनाव जीत गई तो बंगाल को बाहरी लोग ही चलाएंगे. ममता बनर्जी अपनी इस प्रचार रणनीति में सफल रहीं.

सीपीएम और कांग्रेस का वोट बैंक ममता के साथ
तीसरी बड़ी वजह ये थी कि सीपीएम और कांग्रेस का वोट बैंक एक तरह से ममता बनर्जी के साथ चला गया. लेफ्ट गठबंधन का तो खाता भी नहीं खुल पाया. इससे ममता बनर्जी का वोट शेयर इतना बढ़ गया कि बीजेपी फिर इससे मुकाबला नहीं कर सकती थी. और इसीलिए बंगाल में जगह-जगह बीजेपी की हार हुई.

बीजेपी पर उल्टा पड़ा ध्रुवीकरण का दांव
चौथी बड़ी वजह ये थी कि ध्रुवीकरण का दांव बीजेपी पर ही उल्टा पड़ गया. बीजेपी को इससे हिंदू वोट एकजुट करने में कई जगहों पर मदद तो मिली, लेकिन बीजेपी के फायदे से ज़्यादा टीएमसी का फायदा हो गया. क्योंकि एक तरफा मुस्लिम वोट ममता बनर्जी को मिले और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भी उतना नहीं हुआ, जितना बीजेपी सोच रही थी.

ममता की स्कीम्स का असर
पांचवी बड़ी वजह ये थी कि ममता बनर्जी की जो वेलफेयर स्कीम्स, जो कैश स्कीम्स थीं, वो उनके पक्ष में गईं. बीजेपी के पास इनकी कोई काट नहीं थी. ये बात अलग है कि योजनाओं में कट मनी के आरोपों को लेकर बीजेपी ने ममता पर खूब हमले किए लेकिन इसके बावजूद और इन योजनाओं से हुए फायदे की वजह से जनता ने दीदी पर ही भरोसा किया.

(आजतक ब्यूरो)

 

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