बंगाल चुनावों में लड़ाई भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच मानी जा रही है लेकिन एक तीसरा गठबंधन भी है जिसकी उपस्थिति बंगाल चुनावों में मायने रखती है. इस गठबंधन का नाम है संयुक्त मोर्चा (Sanjukta Morcha) जिसमें लेफ्ट, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी आइएसएफ जैसी पार्टियां हैं. लेकिन आइएसएफ के वैचारिक रुझान के चलते कांग्रेस के साथ उसका फिट होना मुमकिन नजर नहीं आ रहा. इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता अब्बास सिद्दीकी ने संयुक्त मोर्चा में चल रही दरार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है.
उन्होंने कांग्रेस पर गठबंधन में सहयोग न करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कई जगह कहा है कि कांग्रेस बंगाल में गठबंधन के लिए कोई प्रचार नहीं कर रही है. उन्होंने कई जगह ये भी कहा है कि वे कांग्रेस नेताओं के लिए कई जगह प्रचार कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस नेता उनके लिए प्रचार नहीं कर रहे हैं, अब अपने ताजा बयान में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता अब्बास सिद्दीकी ने कहा है 'कांग्रेस ने हमारे साथ गठबंधन होने से इंकार कर दिया है लेकिन हम ऐसा नहीं सोचते, हम चाहते हैं संयुक्त मोर्चा सरकार बनाए और कांग्रेस कार्यकर्ता भी चुनाव में अच्छा करें क्योंकि वे भी संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन अगर उनकी लीडरशिप कुछ अलग सोचती है तो फिर हम क्या कर सकते हैं?'
आपको बता दें कि चुनावों से पहले, मार्च की शुरुआत में कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में लेफ्ट, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट की रैली के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस बंगाल चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए वैचारिक रूप से भिन्नता रखने वाले अब्बास सिद्दीकी और इंडियन सेक्युलर फ्रंट से एडजस्ट कर लेगी. लेकिन अब ये साफ़ हो चुका है कि बंगाल में कांग्रेस इंडियन सेक्युलर फ्रंट से पर्याप्त दूरी मेन्टेन कर रही है. इससे पहले कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने भी कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के गठबंधन पर सवाल खड़े किए थे, कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि आइएसएफ को शामिल करना कांग्रेस की मूल विचारधारा के खिलाफ है. लेकिन तब पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था ''ये फैसला आलाकमान की सहमति से लिया गया है.''
आपको बता दें कि आइएसएफ सात-आठ छोटे-छोटे आदिवासी, ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समूहों का एक मोर्चा है, जिसके अध्यक्ष सामंत सोरेन और लोकप्रिय चेहरे अब्बास सिद्दीकी हैं. बंगाल के हुगली जिले में फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की TMC और कुछ लेफ्ट नेताओं ने भी आलोचना की थी.