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बंगाल विधानसभा चुनाव

BJP ने आखिर बंगाल में चावल को क्यों बनाया चुनावी अभियान, ये है कारण

चावल को क्यों बनाया चुनावी अभियान
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विधानसभा चुनाव को लेकर बंगाल की राजनीति इन दिनों बेहद गर्म है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से बेदखल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने काफी पहले से पश्चिम बंगाल में ऐड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया था.अब चुनाव नजदीक आने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने 'एक मुट्ठी चावल' अभियान शुरू कर दिया है. (तस्वीर - ट्विटर/बीजेपी)

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अब ऐसे में सब यही जानना चाहते हैं कि ये  'एक मुट्ठी चावल' अभियान है क्या और क्या इसके जरिए बीजेपी ममता के गढ़ में सेंध लगाकार बंगाल में पहली बार अपना विजय पताका लहरा पाएगी. इस अभियान के तहत बीजेपी ने बंगाल के 23 जिलों के 48 हजार गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. (तस्वीर - ट्विटर/बीजेपी)

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बीजेपी पूरे जनवरी महीने को कृषक सुरक्षा के रूप में मना रही है और इस खास अभियान के तहत सीधे 74 लाख किसानों से जुड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इस अभियान की शुरुआत बर्धमान से की गई है जिसे बंगाल में चावल का कटोरा भी कहा जाता है. (तस्वीर - ट्विटर/बीजेपी)

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बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के कैंपेन की शुरूआत करने के बाद पार्टी कार्यकर्ता गांव में घर-घर जाकर ‘एक मुट्ठी चावल संग्रह' अभियान चला रहे हैं. चुनाव से पहले बीजेपी बंगाल के गांवों में 40 हजार सभाओं की शुरुआत करेगी और इस दौरान नड्डा रोड शो भी करेंगे. (तस्वीर - ट्विटर/बीजेपी)

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अब ये जानिए की बंगाल की राजनीति और अर्थतंत्र में चावल की क्या भूमिका है जिसकी वजह से बीजेपी ने राज्य में किसानों को अपने साथ जोड़ने के लिए ‘एक मुट्ठी चावल' अभियान की शुरुआत की है. 2017 में पश्चिम बंगाल में चावल को GI टैग दिया गया था जिससे यहां के चावल उत्पादकों को नई पहचान मिली. पश्चिम बंगाल की जीडीपी में 21 फीसदी योगदान खेती का है. आप इसी से वहां की राजनीति में किसानों की भूमिका का अंदाजा लगा सकते हैं. राज्य में 70 लाख से ज्यादा किसान हैं जिसमें ज्यादातर चावल का उत्पादन करते हैं. एक मुठ्ठी चावल अभियान के तहत बीजेपी इन्हीं किसान वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटी हुई है. बीजेपी एक परिवार में तीन वोटर मानकर चल रही है जिससे करीब 2 करोड़ से ज्यादा वोटर्स पर उसकी नजर है. 

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ये भी जान लीजिए की पश्चिम बंगाल भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य है. बंगाल में कृषि योग्य भूमि के लगभग आधे हिस्से पर धान की ही खेती होती है. वित्तीय वर्ष 2016 में, राज्य ने 5.46 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में लगभग 15.75 मिलियन टन चावल का उत्पादन किया गया था. वहीं साल 2020 में बंगाल में 5.8 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई और प्रति हेक्टेयर 2.6 टन धान (चावल) की पैदावार हुई. (तस्वीर - ट्विटर/बीजेपी)