AITC
BJP
INC
CPM
AJUP
AMB
IND
नोटा
NOTA
IND
West Bengal Election Result 2026 Live: चोपड़ा विधानसभा सीट पर AITC ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Chopra Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Chopra Election Results 2026 Live: चोपड़ा सीट पर यह क्या हो गया! BJP बड़े अंतर से पीछे
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
चोपड़ा उत्तर दिनाजपुर जिले का एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है. यह दार्जिलिंग लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. 1977 में स्थापित चोपड़ा विधानसभा में पूरा चोपड़ा सामुदायिक विकास खंड और इस्लामपुर ब्लॉक का कमलागाँव सुझाली ग्राम पंचायत शामिल है. स्थापना के बाद से यह सीट अब तक 10 बार चुनाव देख चुकी है.
प्रारंभिक दशकों में इस क्षेत्र पर भाकपा (मार्क्सवादी) का प्रभाव रहा और 1977 से 2006 के बीच हुए पहले सात चुनावों में इस पार्टी ने छह बार जीत दर्ज की. बाद में स्वतंत्र नेता हामिदुल रहमान ने 2001 और 2011 में जीतकर इस प्रभुत्व को तोड़ा. रहमान बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और 2016 तथा 2021 में पार्टी को जीत दिलाई.
2011 के चुनाव में रहमान ने CPI(M) के अनवरुल हक को 6,570 वोटों से हराया था. उस चुनाव में तृणमूल और भाजपा तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं, जिनके वोट शेयर क्रमशः 4.82% और 4.03% थे. 2016 में रहमान ने तृणमूल की ओर से सीट बरकरार रखी और अकुरमुल हक को 16,860 वोटों से मात दी. इस चुनाव में भाजपा 8.9% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही. 2021 में जीत का अंतर नाटकीय रूप से बढ़कर 64,905 वोट हो गया, जब रहमान ने भाजपा के मोहम्मद शाहीद अख्तर को पछाड़ा. भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 29.40%, जबकि CPI(M) घटकर केवल 6.02% रह गया.
लोकसभा चुनावों में भी यह रुझान लगभग समान रहा है. हालांकि 2009 से दार्जिलिंग लोकसभा सीट भाजपा के पास है, लेकिन चोपड़ा विधानसभा खंड में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा. 2019 में भाजपा कांग्रेस–वाम मोर्चा गठबंधन को पछाड़ते हुए दूसरे स्थान पर पहुंची, लेकिन तृणमूल ने तब भी 44,777 वोटों से बढ़त बनाए रखी. 2024 में यह अंतर और बड़ा हो गया और तृणमूल 92,131 वोटों से आगे रही.
चोपड़ा विधानसभा की राजनीति की सबसे स्थाई विशेषता उसका मुस्लिम-बहुल चरित्र है. 1977 और 1982 के पहले दो चुनावों को छोड़कर पिछले चार दशकों में यहां केवल मुस्लिम नेताओं ने ही जीत हासिल की है. मतदाताओं में मुस्लिम आबादी लगभग 62% है, जबकि अनुसूचित जाति 16.08% और अनुसूचित जनजाति 5.84% हैं. क्षेत्र लगभग पूरी तरह ग्रामीण है, शहरी मतदाता केवल 1.63% हैं.
चोपड़ा में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. साल 2019 में 2,29,640, 2021 में 2,47,764, 2024 में 2,63,658 रही थी. मतदान प्रतिशत भी हमेशा ऊंचा रहा है. 2016 में चरम 84.77%, जबकि 2024 में यह थोड़ा घटकर 79.67% रहा था.
चोपड़ा तराई क्षेत्र में हिमालय की तलहटी में स्थित है. यहां की भूमि समतल से लेकर हल्की ढलान वाली है और बेहद उपजाऊ है. महानंदा नदी पास से बहती है, जो कृषि को जीवन देती है. क्षेत्र में धान, मक्का, जूट और सब्जियां उगाई जाती हैं. हालांकि पास के इलाकों में चाय बागान हैं, लेकिन चोपड़ा में इनका वर्चस्व नहीं है.
राष्ट्रीय राजमार्ग 27 क्षेत्र से होकर गुजरता है, जो इसे सिलीगुड़ी और किशनगंज से जोड़ता है. बिजली की उपलब्धता अच्छी है, लेकिन जलापूर्ति अभी भी नलकूपों और हैंडपंपों पर निर्भर है. स्वास्थ्य सुविधाओं में दलुआ ग्रामीण अस्पताल (30 बिस्तर) और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं.
1956 तक चोपड़ा और आसपास के क्षेत्र बिहार का हिस्सा थे. राज्यों के पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर इन्हें उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच भौगोलिक निरंतरता बहाल करने के लिए पश्चिम बंगाल में शामिल किया गया.
चोपड़ा एक सबडिविजन-स्तरीय कस्बा और प्रशासनिक केंद्र है. इसके पास स्थित प्रमुख शहर इस्लामपुर 22 किमी, डालखोला 30 किमी, रायगंज 65 किमी, सिलीगुड़ी 90 किमी, राज्य की राजधानी कोलकाता यहां से लगभग 500 किमी दूर है.
पास के जिलों में उत्तर में दार्जिलिंग (109 किमी) और जलपाईगुड़ी (86 किमी) हैं, जबकि दक्षिण में मालदा (165 किमी) है. बिहार राज्य का किशनगंज 35 किमी और पूर्णिया 70 किमी दूर है. बांग्लादेश का ठाकुरगांव मात्र 40 किमी और नेपाल सीमा का काकरभिट्टा लगभग 55 किमी दूर स्थित है.
लगातार दो विधानसभा चुनावों और दो लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की बढ़त को देखते हुए, 2026 में भी चोपड़ा सीट उसके पास रहने के संकेत मजबूत हैं. जबकि भाजपा अब भी मुस्लिम-बहुल इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, कांग्रेस–वाम मोर्चा गठबंधन हाशिये पर ही दिखाई देता है.
(अजय झा)
Md. Shahin Akhter
BJP
Anwarul Haque
CPI(M)
Ajoy Kumar Sinha
AMB
Surojit Kisku
IND
Nota
NOTA
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.