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दादरी विधानसभा चुनाव 2027 (Dadri Assembly Election 2027)

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दादरी विधानसभा चुनाव 2027 (Dadri Assembly Election 2027)

दादरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले का एक शहर है, जिसका अपना म्युनिसिपल बोर्ड है. यह गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. दादरी एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जिसे मूल रूप से 1957 के चुनावों से पहले बनाया गया थां हालांकि, इसका स्वरूप और बनावट काफी बदल गई है, अब इसकी सीमाएं नोएडा विधानसभा क्षेत्र से मिलती हैं और इसमें ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट (जिसे नोएडा एक्सटेंशन भी कहा जाता है) का तेजी से बढ़ता शहरी इलाका शामिल है.

ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट, नोएडा से सटे ट्विन सिटी हैं. राजनीतिक बातचीत में इस क्षेत्र को अब अक्सर 'दादरी-ग्रेटर नोएडा' कहा जाता है, भले ही आधिकारिक तौर पर इसका नाम नहीं बदला गया है. इसके मौजूदा दायरे में ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, दादरी म्युनिसिपल बोर्ड के अंतर्गत आने वाले इलाके और इस शहरीकरण वाले कॉरिडोर के अंदर और बाहरी किनारों पर बसे कई अर्ध-शहरी गांव शामिल हैं.

दादरी में अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1972 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआत में यह कांग्रेस का गढ़ था, लेकिन समय के साथ यह बीजेपी और बीएसपी के बीच चुनावी अखाड़ा बन गया है. हाल के वर्षों में शहरी मतदाताओं के बीच अपनी अपील और ग्रेटर नोएडा के तेजी से विकास के कारण बीजेपी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है. कांग्रेस पार्टी ने शुरुआती आठ चुनावों में से छह जीते थे, और उसकी आखिरी जीत 1980 में हुई थी. तब से, बीजेपी ने यह सीट चार बार जीती है, बीएसपी ने दो बार जीत हासिल की है, और जनता दल ने तीन बार यह सीट जीती है. वहीं यूपी किसान मजदूर पार्टी, जनता पार्टी और लोक दल ने एक-एक बार दादरी सीट जीती है.

2007 में बीजेपी की जीत का सिलसिला तोड़ने वाले बीएसपी के सतवीर सिंह गुर्जर ने 2012 में बीजेपी के नवाब सिंह नागर को 37,297 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. नवाब सिंह नागर दो बार (1996 और 2002 में) विधायक रह चुके थे. 2017 में बीजेपी ने नवाब सिंह नागर की जगह तेजपाल सिंह नागर को उम्मीदवार बनाया, और यह बदलाव उनके पक्ष में रहा. तेजपाल सिंह नागर ने मौजूदा विधायक सतवीर सिंह गुर्जर को 80,177 वोटों से हराकर बीएसपी से यह सीट छीन ली. इसके बाद, 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के राज कुमार भाटी को 1,38,218 वोटों के बड़े अंतर से हराकर बीजेपी के लिए दादरी सीट बरकरार रखी. नागर को 2,18,068 वोट मिले, जबकि भाटी को 79,850 वोट मिले. बीएसपी और अन्य पार्टियां काफी पीछे रह गईं. लगातार मिली इन जीतों ने दादरी को एक अनिश्चित, कई पार्टियों वाली सीट से बदलकर बीजेपी के लिए काफी सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र बना दिया है.

लोकसभा चुनावों के दौरान दादरी इलाके में वोटिंग के रुझानों में भी ऐसा ही पैटर्न दिखा. बीजेपी ने बीएसपी को पीछे छोड़ा और फिर व्यापक विपक्ष के मुकाबले अपनी बढ़त मजबूत की. 2009 में, यहां बीएसपी, बीजेपी से 40,875 वोटों से आगे थी. 2014 में बीजेपी आगे निकल गई और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2014 में वह समाजवादी पार्टी से 26,485 वोटों से और 2019 में 76,628 वोटों से आगे रही, क्योंकि एसपी ने बीएसपी की जगह उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर ले ली थी. 2024 में बीजेपी की बढ़त और बढ़ गई, जब वह दादरी इलाके में समाजवादी पार्टी से 1,63,271 वोटों से आगे थी. बीजेपी के डॉ. महेश शर्मा को 2,51,359 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के डॉ. महेंद्र सिंह नागर को 88,088 वोट मिले.

पिछले 12 वर्षों में दादरी निर्वाचन क्षेत्र में वोटरों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है. इसका मुख्य कारण ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नए रिहायशी कॉम्प्लेक्स का निर्माण और नोएडा व दिल्ली के निवासियों का बड़े, खुले और अपेक्षाकृत सस्ते घरों की तलाश में इस इलाके में आना है. 2012 में दादरी में 343,679 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 441,229, 2019 में 536,130, 2022 में 606,316 और 2024 में 729,481 हो गई.

वोटिंग का प्रतिशत काफी हद तक स्थिर रहा है और इलाके के शहरी स्वरूप में हुई तेजी से बढ़ोतरी को पूरी तरह नहीं दिखाता है. यह 2012 में 58.03 प्रतिशत, 2017 में 60.13 प्रतिशत, 2019 में 60.85 प्रतिशत, 2022 में 58.39 प्रतिशत और 2024 में 52.79 प्रतिशत था, जो हाल के चुनाव में लोगों की भागीदारी में धीरे-धीरे कमी को दर्शाता है.

दादरी शहर का अपना स्थानीय इतिहास है. यह लंबे समय से व्यापार और खेती का केंद्र रहा है, जो धीरे-धीरे गौतम बुद्ध नगर की बड़ी शहरी कहानी का हिस्सा बन गया है. ऐतिहासिक रूप से, यह इलाका उस बड़े बेल्ट में आता था जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पुराने जिलों को दिल्ली से जोड़ता था, और इसकी अर्थव्यवस्था खेती और छोटे पैमाने के व्यापार पर टिकी थी. उदारीकरण के बाद के दशकों में, और खासकर ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के बनने के बाद, दादरी के आस-पास के इलाकों को ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन शहरी कॉरिडोर में शामिल कर लिया गया है. इससे पुराने बाजार वाले शहर के आस-पास रिहायशी टाउनशिप, इंडस्ट्रियल प्लॉट और इंस्टीट्यूशनल कैंपस का एक नया दायरा बन गया है. दादरी ग्रेटर नोएडा के पास है, और दोनों केंद्र एक-दूसरे से थोड़ी ही दूरी पर हैं. अब ये दोनों मिलकर एक लगातार शहरी इलाके की तरह काम करते हैं जो दिल्ली और नोएडा से जुड़ा हुआ है.

आर्थिक नजरिए से देखें तो दादरी आज उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से बढ़ते इलाकों में से एक है. ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के तहत इस इलाके और इसके आस-पास कई इंडस्ट्रीज और बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू हुए हैं, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग की सुविधाएं शामिल हैं. ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मॉल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज, होटल और कमर्शियल सेंटर बनने और साथ ही बड़े रिहायशी इलाके विकसित होने से दादरी-ग्रेटर नोएडा का इलाका NCR की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया है. नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन ग्रेटर नोएडा को नोएडा से जोड़ती है और सेक्टर 51-52 पर दिल्ली मेट्रो से जुड़ती है, जिससे दादरी के शहरी इलाकों और बाकी NCR के बीच रोजाना आने-जाने का नेटवर्क मजबूत होता है. इस इलाके में हाईवे और एक्सप्रेसवे भी हैं जो इसे नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर से जोड़ते हैं, जबकि जिले में दक्षिण की ओर जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से यह इलाका राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हवाई रूटों के और भी करीब आ गया है. दादरी का अपना रेलवे स्टेशन है, जिससे शहर सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ा है, जबकि ग्रेटर नोएडा इलाके के बड़े रेलवे हब तक पहुंचने के लिए मेट्रो और सड़क संपर्क पर निर्भर है.

इस इलाके में कई शहरी केंद्र होने के कारण, आस-पास के कस्बों और शहरों की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप दादरी शहर, ग्रेटर नोएडा या अलग-अलग सेक्टरों में से कहां से दूरी नाप रहे हैं, लेकिन मोटे तौर पर नोएडा, दिल्ली और गाजियाबाद पास ही हैं, जबकि मेरठ, बुलंदशहर और आगरा फैलते हुए हाईवे नेटवर्क पर थोड़ी दूर स्थित हैं. सड़कों, मेट्रो, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के इस जाल ने दादरी को NCR की रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा बना दिया है.

2011 की जनगणना के आंकड़ों और उनसे मिले अनुमानों के आधार पर, दादरी हिंदू-बहुल इलाका है जहां गुर्जर समुदाय सबसे प्रभावशाली है. यहां मुसलमानों की भी अच्छी-खासी आबादी है और अनुसूचित जातियों के वोटर्स की संख्या कुल वोटर्स का लगभग 16.35 प्रतिशत है. दादरी पहले एक मिश्रित इलाका हुआ करता था जहां शहरी वोटर्स के मुकाबले ग्रामीण वोटर्स ज्यादा थे, लेकिन जनगणना से जुड़े अनुमानों के अनुसार, तब भी यह शहरी स्वरूप की ओर बढ़ रहा था, जिसमें लगभग 68.08 प्रतिशत ग्रामीण और 31.92 प्रतिशत शहरी वोटर थे. ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के तेजी से विकास, दिल्ली और नोएडा से दूर शांत, ज्यादा जगह वाले और अपेक्षाकृत सस्ते घरों की तलाश में लोगों के यहां आने, और बड़ी औद्योगिक इकाइयों और संस्थानों द्वारा ग्रेटर नोएडा को प्राथमिकता देने के कारण शहरी आबादी के पक्ष में यह अनुपात और बदलने की संभावना है.

जमीनी स्तर पर, दादरी की राजनीति अब पुराने ग्रामीण जाति और समुदाय के संतुलन और नए, ज्यादा शहरी वोटर बेस के मेल को दिखाती है. निर्वाचन क्षेत्र के मूल हिस्सों में गुर्जर गांव, अन्य स्थानीय कृषि समुदाय, मुस्लिम बस्तियां और SC वोटर महत्वपूर्ण बने हुए हैं, जबकि ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, प्लॉट वाली कॉलोनियां और संस्थागत क्षेत्र बड़ी संख्या में वेतनभोगी पेशेवरों, छात्रों, सर्विस वर्कर्स और छोटे उद्यमियों को लाते हैं. जैसे-जैसे संतुलन इस शहरी और अर्ध-शहरी आबादी की ओर झुक रहा है, BJP जैसी पार्टियों को, जिनकी शहर और कस्बों के वोटरों के बीच मजबूत पकड़ है, फायदा हुआ है.

BJP के मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड और निर्वाचन क्षेत्र के लगातार शहरीकरण के साथ, दादरी NCR के शहरी बेल्ट और उसके ग्रामीण इलाकों के मिलन-बिंदु पर स्थित है. जब तक समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला विपक्ष BJP के खिलाफ कोई असरदार स्थानीय नैरेटिव नहीं बना पाता और मौजूदा सरकार-विरोधी भावना (anti-incumbency) का फायदा नहीं उठा पाता, तब तक BJP 2027 के चुनाव में इस सीट को बनाए रखने की प्रबल दावेदार के तौर पर उतरेगी.

(अजय झा)

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दादरी विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Tejpal Singh Nagar

img
BJP
वोट2,18,068
विजेता पार्टी का वोट %61.6 %
जीत अंतर %39 %

दादरी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rajkumar Bhati

    SP

    79,850
  • Manbir Singh

    BSP

    40,456
  • Deepak Kumar Bhati Chotiwala

    INC

    5,392
  • Sanjay

    AAAP

    4,620
  • Nota

    NOTA

    2,033
  • Chaman Singh

    MIHISE

    730
  • Trilochan Narayan Singh

    IND

    565
  • Sanjay Kumar Sharma

    IND

    556
  • Amit Basoya

    IND

    442
  • Hemant Sharma

    SHS

    300
  • Annu Khan

    IND

    287
  • Jagdish Singh

    SVSAP

    173
  • Raghwendra Kumar Srivastava

    SBSPSP

    161
  • Vinay Nagar

    BHUANDP

    144
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