
कुछ ही वक्त में असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच एक ऐसा आंकड़ा भी सामने आया है, जो पिछले 20 साल की तस्वीर साफ करता है. इन राज्यों में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जो अच्छा संकेत है लेकिन उनकी जीत दर उसी अनुपात में नहीं बढ़ी. दूसरी ओर, पुरुष उम्मीदवारों का जीत प्रतिशत लगभग स्थिर बना रहा है. किस राज्य में कैसा ट्रेंड सामने आया है, आपको आंकड़ों से समझना होगा.
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में 2011 से मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी देश की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती हैं. इसके बावजूद राज्य में महिलाओं का चुनावी प्रदर्शन मजबूत नहीं रहा. 2001 में 24.6 प्रतिशत महिला उम्मीदवार जीती थीं. लेकिन 2021 तक ये आंकड़ा घटकर 16.7 प्रतिशत रह गया. यानी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, लेकिन जीत दर में गिरावट आई. हालांकि एक दिलचस्प बात ये है कि इन दो दशकों में महिलाएं अक्सर पुरुषों से बेहतर जीत प्रतिशत दर्ज करती रही हैं. जैसे कि 2001 में 17 प्रतिशत पुरुष उम्मीदवार जीते, जबकि महिलाओं का जीत प्रतिशत 24.6 था. 2021 में भी 13.4 प्रतिशत पुरुष जीते, जबकि महिलाओं का आंकड़ा 16.7 प्रतिशत रहा.
इसी तरह तमिलनाडु में महिलाओं की सफलता में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. 2001 में 22.3 प्रतिशत महिला उम्मीदवार जीती थीं, लेकिन 2021 में यह संख्या घटकर सिर्फ 2.9 प्रतिशत रह गई. 2001 से 2016 तक लगातार चार चुनावों में महिलाओं का जीत प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा. लेकिन 2021 में यह ट्रेंड बदल गया. उस साल 6.2 प्रतिशत पुरुष उम्मीदवार जीते, जबकि महिलाओं का आंकड़ा सिर्फ 2.9 प्रतिशत था.

केरल
केरल में महिला साक्षरता दर और लिंगानुपात बेहतर होने के बावजूद, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सीमित है. 2001 से 2021 तक महिलाओं का जीत दर लगातार पुरुषों से कम रहा. 2001 में महिलाओं का जीत दर 14.8 प्रतिशत था, जो 2016 तक घटकर 7.3 प्रतिशत रह गया. हालांकि 2011 में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 15.7 प्रतिशत बढ़ी और 2016 में 24.5 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हुई. इसके बावजूद जीत दर 2006 के 10 प्रतिशत से घटकर 2011 में 8.4 प्रतिशत और 2016 में 7.3 प्रतिशत हो गया.
असम में पुरुषों का जीत दर पिछले दो दशकों में थोड़े उतार-चढ़ाव के साथ लगभग स्थिर रहा है, लेकिन महिलाओं के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव ज्यादा दिखा. 2001 और 2011 में महिलाओं का जीत दर पुरुषों से अधिक था. लेकिन 2021 तक यह गिरकर 7.9 प्रतिशत हो गया, जबकि पुरुषों का जीत दर 12 से 14 प्रतिशत के बीच बना रहा. 2006 में महिलाओं की भागीदारी में 39.6 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि पुरुषों में यह बढ़ोतरी 11.5 प्रतिशत थी. इसके बावजूद महिलाओं का जीत दर 2001 के 18.2 प्रतिशत से घटकर 2006 में 8.8 प्रतिशत रह गया. 2016 में भी महिलाओं का जीत दर 8.8 प्रतिशत पर ही अटकी रही. 2021 में भागीदारी में गिरावट के साथ जीत प्रतिशत और घटकर 7.9 प्रतिशत हो गया.