पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है. एक तरफ जहां बड़े नेताओं की रैलियों का शोर है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने बहुत ही शांति से अपना साइलेंट ऑपरेशन शुरू कर दिया है. संघ के स्वयंसेवक चुपचाप बंगाल के लाखों घरों की कुंडी खटखटा रहे हैं और लोगों को वोटिंग के लिए तैयार कर रहे हैं. इसे 'लोक मत परिष्कार' अभियान कहा जा रहा है, जिसका सीधा मतलब है लोगों की सोच को चुनाव के हिसाब से तराशना.
संघ इस बार खुलेआम झंडे लेकर तो नहीं घूम रहा, लेकिन पर्दे के पीछे उसकी तैयारी बहुत तगड़ी है. एक संघ नेता के मुताबिक, 4-5 स्वयंसेवकों की छोटी-छोटी टोलियां लोगों के घरों में 'ड्रॉइंग रूम मीटिंग्स' कर रही हैं. बंगाल की करीब 250 विधानसभा सीटों पर अब तक सवा दो लाख से ज्यादा ऐसी बैठकें हो चुकी हैं. खास बात ये है कि इन बैठकों में किसी पार्टी का नाम लिए बिना, बस बिना किसी डर या लालच के शत-प्रतिशत मतदान करने की अपील की जा रही है.
स्वयंसेवक यहां खेल ये कर रहे हैं कि वे घर-घर जाकर जो पर्चे बांट रहे हैं, उनमें बंगाल के सबसे ज्वलंत मुद्दों का पूरा कच्चा-चिट्ठा है. इन पर्चों के जरिए कोशिश ये है कि वोटर बटन दबाने से पहले राज्य की जमीनी हकीकत को अच्छी तरह समझ ले. इसमें भ्रष्टाचार से लेकर सुरक्षा तक, हर उस मुद्दे का जिक्र है जिससे बंगाल का आम आदमी आज जूझ रहा है.
आरजी कर कांड से घुसपैठ तक... पर्चों में छिपे हैं तीखे सवाल
इस पूरे मिशन में महिला सुरक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है. आरजी कर कांड के बाद लोगों के मन में जो टीस है, संघ उसे वोट की ताकत में बदलने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा भ्रष्टाचार के पुराने दाग जैसे शारदा स्कैम और शिक्षक भर्ती घोटाले को भी फिर से ताजा किया जा रहा है. घुसपैठ के मुद्दे को सीधे 'हिंदू सुरक्षा' और भविष्य के खतरे से जोड़कर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है. जमीन पर तैनात ये स्वयंसेवक सिर्फ बातचीत नहीं कर रहे, बल्कि उनकी नजर टीएमसी कार्यकर्ताओं की हर हलचल और बूथ कैप्चरिंग की संभावनाओं पर भी है. वे पल-पल की जानकारी ऊपर भेज रहे हैं और मोबाइल नंबरों के जरिए लोगों से लगातार टच में हैं.
हैरानी की बात ये है कि पिछले 15 सालों में बंगाल में संघ का वजूद तेजी से फैला है. शाखाओं की संख्या 900 से बढ़कर 4300 के पार पहुंच गई है. संघ का पूरा फोकस 'हिंदू एकता' पर है और गलियों में गूंजते 'जय श्री राम' के नारे बता रहे हैं कि ये साइलेंट अभियान इस बार बंगाल के नतीजों में कोई बड़ा उलटफेर कर सकता है.