असम चुनाव से पहले गुरुवार को गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ. होटल विवांता में आयोजित इस कार्यक्रम में असम के राजनीतिक मुद्दों और जरूरी जन सरोकारों पर चर्चा हुई. इस मौके पर राजनीतिक दलों से नेताओं, राज्य के उद्मियों और अफसरों ने शिरकत की, साथ ही सवालों के जवाब दिए. इसी सिलसिले में एक खास सेशन 'कितना बदला असम' में असम के विकास के मुद्दों पर बात हुई. कार्यक्रम में असम के एंटरप्रेन्योर रंजित भट्ट ठाकुर और सुभिमल भट्टाचार्जी ने शिरकत की.
रंजित भट्ट ठाकुर ने कहा 'जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब हिंदी हमारे लिए थर्ड लैंग्वेज हुआ करती थी. फर्स्ट लैंग्वेज अंग्रेज़ी थी और सेकंड लैंग्वेज असमिया. इसलिए हिंदी बोलने में थोड़ी दिक्कत होती है. विकास हुआ है या नहीं, तो इसे मापने के लिए कई इंडेक्स होते हैं. विकास को आप कैसे परिभाषित करते हैं, क्या लोगों की खुशी बढ़ी है, क्या बीमारियाँ कम हुई हैं, क्या लोगों को बेहतर शिक्षा और भोजन मिल रहा है—इन सब बातों से विकास को मापा जाता है.”
उन्होंने कहा कि 'मैंने ‘काजीरंगा इनहेरिटेंस’ नाम की एक किताब लिखी थी. उसमें 1905 का जिक्र है, जब अपर असम से शिलांग तक सड़क बनाई गई थी. उस समय से लेकर आज तक सड़कें काफी बेहतर हुई हैं, लेकिन विकास सिर्फ सड़क बनने तक सीमित नहीं है. अब हाईवे बन रहे हैं, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड रोड बनाए जा रहे हैं. नमलीगढ़ से नॉर्थ लखीमपुर तक करीब 35 किलोमीटर का जो प्रोजेक्ट बन रहा है, वह अपने आप में अनोखा है. अगर आप निर्माण, हेल्थकेयर, एजुकेशन और ग्रोथ रेट देखें तो कई क्षेत्रों में असम काफी आगे बढ़ा है. आरबीआई की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक असम की ग्रोथ रेट पश्चिम बंगाल से भी ज्यादा है और यह देश के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले राज्यों में शामिल है.”
गुवाहाटी में दिखता इंफ्रास्ट्रक्चर का बदलाव
पलायन के सवाल पर सुभिमल ने कहा, 'अगर मैं 30 साल पहले के असम और आज के असम की तुलना करूं तो बहुत बड़ा बदलाव दिखाई देता है. पहले बाहर के लोगों के मन में असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट को लेकर एक अलग तरह की धारणा थी. लोगों को लगता था कि यह एक डिस्टर्ब्ड एरिया है और यहां अवसर कम हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह धारणा काफी बदली है. करीब 12–13 साल पहले न्यूयॉर्क के हार्वर्ड क्लब में असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का एक कार्यक्रम था. उस समय वहां मौजूद लोगों को असम के बारे में बहुत कम जानकारी थी. लेकिन आज जब मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों, जैसे दावोस में जाते हैं और असम की संभावनाओं के बारे में बात करते हैं, तो लोगों की सोच बदलती है. इससे राज्य की छवि में बड़ा बदलाव आया है.'

साथ ही उन्होंने कहा कि असम के बाहर रहने वाले लोगों को किसी नीति के माध्यम से राज्य से जोड़ने की जरूरत है ताकि वे यहां आकर उद्यमिता को बढ़ावा दे सकें. पिछले कुछ वर्षों में सड़क, रेलवे, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार हुआ है और यह बदलाव सिर्फ गुवाहाटी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे असम में दिखाई देता है.
सामाजिक योजनाओं से क्या पड़ता है असर?
सामाजिक योजनाओं से राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ता है या नहीं, इस पर रंजीत भट्ट ने कहा कि, 'असम का डेब्ट रेशियो देश के कई राज्यों की तुलना में कम है. मुख्यमंत्री का मानना है कि खर्च सोच-समझकर होना चाहिए और निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए.' इस चर्चा में टाटा के ₹27,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर असेंबली प्लांट का भी जिक्र हुआ. सुभिमल भट्टाचार्जी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट असम के लिए एक ‘इन्फ्लेक्शन पॉइंट’ साबित हो सकता है. इससे हजारों युवाओं को अपने राज्य में ही रोजगार मिलेगा. यह सिर्फ लो-स्किल जॉब नहीं होगा, बल्कि इसमें इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई अवसर होंगे.
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 27 हजार रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. इसके साथ ही अन्य उद्योग भी यहां आने के लिए प्रेरित होंगे. इससे असम में टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई दिशा मिल सकती है. रंजित भट्ट ठाकुर ने कहा कि “सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं होती. इसके साथ एक पूरी वैल्यू चेन बनती है—पैकेजिंग, वायरिंग, सप्लाई चेन, होटल, स्कूल और अन्य सुविधाएँ भी विकसित होती हैं. अगर 15 हजार लोग यहां काम करेंगे तो उनके परिवार भी आएंगे और इससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी.'
असम लंबे समय तक चाय और तेल उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब इसमें सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक सेक्टर का भी नाम जुड़ रहा है. यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है. इसी के साथ इस सत्र का समापन किया गया.