पश्चिम बंगाल के बशीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पूरक सूची (Supplementary List) में एक ही बूथ के 340 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे इलाके में भारी आक्रोश और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हटाए गए सभी 340 नाम एक ही समुदाय (मुस्लिम) से जुड़े हैं.
बसीरहाट नॉर्थ विधानसभा के बूथ नंबर 5 पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 340 नाम “निर्णयाधीन” में थे, लेकिन सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने के बाद इन सभी नामों को डिलीटेड कैटेगरी में डाल दिया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसी बूथ संख्या 5 के BLO का नाम भी डिलीटेड लिस्ट में शामिल है.
बूथ संख्या 5 के बीएलओ मोहम्मद शफीउल आलम ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आलम के मुताबिक, सप्लीमेंट्री लिस्ट में न केवल ग्रामीणों के, बल्कि खुद उनका (BLO) नाम भी हटा दिया गया है. इस बूथ के BLO शफीउल ने आरोप लगाया कि उन्होंने सभी लोगों के फॉर्म खुद भरवाए थे और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार सभी दस्तावेज अपलोड किए थे. सुनवाई के लिए 354 लोगों को बुलाया गया था, लेकिन आरोप है कि चयनात्मक तरीके से खास समुदाय के लोगों के नाम हटाए गए.
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बूथ नंबर 5, बड़ो गोबरा गांव (बेगमपुर बिबीपुर ग्राम पंचायत, बसीरहाट ब्लॉक-II) में कुल 992 मतदाता थे. इनमें से 38 नाम मृत्यु या जगह बदलने के कारण हटाए गए. बाकी 954 मतदाताओं में से 358 को सुनवाई के लिए बुलाया गया. ड्राफ्ट लिस्ट में केवल 18 नाम ही क्लियर हुए, जबकि 340 नाम अंडर 'निर्णयाधीन' में रखे गए थे. लेकिन 23 तारीख को जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में इन सभी 340 नामों को हटा दिया गया.
जब वे इस शिकायत को लेकर बशीरहाट ब्लॉक-II के बीडीओ के पास पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि अब उनके स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता. ईआरओ (ERO) की ओर से भी कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला. बीएलओ ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार सभी दस्तावेज अपलोड किए थे और व्यक्तिगत रूप से लोगों की मदद की थी, फिर भी नामों को चुनिंदा तरीके से हटाया गया.
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प्रभावित मतदाता काजिरुल मंडल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 11 में से किसी भी एक दस्तावेज को पर्याप्त बताया था, जबकि उन्होंने 3 से 4 दस्तावेज जमा किए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष राजनीतिक दल को खुश करने के लिए उनके नाम हटाए गए हैं.
(रिपोर्ट- राही हल्दर)