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Tangla Vidhan Sabha Results Live: असम के तंगला विधानसभा क्षेत्र में BJP का दबदबा, INC को हराया
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तंगला असम के उदलगुरी जिले का एक छोटा सा कस्बा है, जहां एक टाउन कमेटी है. यह अपने बड़े-बड़े चाय बागानों के लिए जाना जाता है, जिन पर आजादी से पहले अंग्रेजों का मालिकाना हक था. यह एक नया बना हुआ सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और दरांग-उदलगुरी लोकसभा सीट के 11 हिस्सों में से एक है.
2023 में, राज्य के सभी 126 विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों को बराबर बांटने के लिए किए गए परिसीमन के बाद तंगला को बनाया गया था. इसलिए, तंगला का विधानसभा चुनावों का कोई पुराना इतिहास नहीं है. यहां के वोटरों का मिजाज समझने का एकमात्र मौका 2024 के लोकसभा चुनावों में मिला, जिसमें राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJP ने बोडो पीपल्स फ्रंट (BPF) को 43,770 वोटों से पीछे छोड़ दिया. BJP के दरांग-उदलगुरी लोकसभा उम्मीदवार दिलीप सैकिया को 74,089 वोट मिले, जबकि BPF के दुर्गादास बोरो को 30,319 वोट मिले. कांग्रेस पार्टी के माधव राजबंशी 27,274 वोटरों का समर्थन पाकर तीसरे स्थान पर रहे. तंगला ने 2024 में 79.16 प्रतिशत वोटिंग दर्ज करके, वोटरों के जबरदस्त उत्साह के साथ चुनावी दुनिया में अपनी पहली दस्तक दी.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए तंगला की अंतिम वोटर लिस्ट में 180,658 योग्य वोटर थे. यह संख्या 2024 के 178,052 वोटरों के मुकाबले 2,606 वोटरों की मामूली बढ़ोतरी दिखाती है.
2023 के परिसीमन से पहले, उदलगुरी जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र थे उदलगुरी, पानेरी और माजबात. इनकी जगह पर चार विधानसभा क्षेत्र बनाए गए. उदलगुरी और माजबात को तो वैसे ही रखा गया, लेकिन पानेरी को खत्म कर दिया गया. इसके बाद, नई सीमाएं तय करके और वोटरों को फिर से बांटकर तंगला और भेरगांव नाम के दो नए विधानसभा क्षेत्र बनाए गए.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर (जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के अनुपात पर आधारित हैं और जिन्हें क्षेत्र तथा 2023 के परिसीमन में हुए बदलावों के हिसाब से ठीक किया गया है), यहां की आबादी का स्वरूप मिला-जुला है. यहां बोडो और अन्य मूल निवासी समुदायों की अच्छी-खासी मौजूदगी है, साथ ही असमिया बोलने वाले समूह और कम संख्या में गैर-आदिवासी आबादी भी रहती है. यह निर्वाचन क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण बना हुआ है, जहां ज्यादातर वोटर गांवों में रहते हैं और खेती-बाड़ी तथा चाय बागानों में काम करते हैं, वहीं, टांगला शहर की सीमा में रहने वाले शहरी वोटरों की संख्या बहुत कम है.
तंगला निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के उदलगुरी जिले के कुछ हिस्सों में फैला है, जहां समतल जलोढ़ मैदान और ब्रह्मपुत्र घाटी की तलहटी की खासियत वाली हल्की ऊंची-नीची जमीन है. यहां की जमीन धान की खेती, चाय के बागान और दूसरी तरह की खेती के लिए अच्छी है, लेकिन ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. तंगला में लोगों की रोजी-रोटी मुख्य रूप से चाय बागानों में मिलने वाले काम, धान की खेती, छोटे-मोटे व्यापार और खेती से जुड़े दूसरे कामों पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ मिट्टी और भरपूर बारिश इन कामों को बनाए रखने में मदद करती है. यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा है. राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के जरिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क जुड़ा हुआ है, और रेल सुविधा भी पास के स्टेशनों जैसे टांगला या उदलगुरी पर उपलब्ध है, जो गांव के हिसाब से 5-15 किलोमीटर दूर हैं. शहर और गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, और ग्रामीण सड़कों तथा सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम लगातार चल रहा है.
सबसे नजदीकी बड़ा शहर उदलगुरी है, जो जिले का मुख्यालय भी है और यहां से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर है. आस-पास के दूसरे शहरों में दक्षिण की ओर मंगलदोई है, जो लगभग 30-40 किलोमीटर दूर है, और उससे भी दक्षिण में रंगिया है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से दक्षिण-पूर्व दिशा में लगभग 80-100 किलोमीटर दूर है.
2024 के चुनावों में तंगला विधानसभा क्षेत्र में BJP के शानदार प्रदर्शन और उस चुनाव में मिली भारी बढ़त को देखते हुए, 2026 के चुनावों के लिए पलड़ा अभी से BJP के पक्ष में झुका हुआ दिख रहा है. हालांकि, BPF का BJP के नेतृत्व वाले 'नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस' में शामिल होने और उसका एक हिस्सा बनने का फैसला BJP की ताकत को और भी बढ़ा सकता है, जिससे यह भी पक्का हो जाता है कि 2026 के चुनाव एकतरफा हो सकते हैं.
BJP ने बीकन चंद्र डेका को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने विपक्षी गठबंधन की ओर से रोहित परिगा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इनके अलावा, पांच और उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं, जिससे यह तो पक्का हो गया है कि टांगला में, कम से कम कागजों पर, एक बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा. इनमें यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के जयंत कुमार राभा शामिल हैं, जो BJP के सहयोगी थे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले गठबंधन छोड़ दिया था. सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) के जितेंद्र चालिथा. गण सुरक्षा पार्टी के नागेन चंद्र डेका, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के फूलन कचारी, और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विश्वदत्त ताती. खास बात यह है कि चुनावी मैदान में कोई भी निर्दलीय उम्मीदवार न होना एक दुर्लभ बात है. कांग्रेस और UPPL के बीच सत्ता-विरोधी वोट बंट सकते हैं, जिससे BJP को 2026 में तंगला के पहले विधानसभा चुनाव में आसानी से जीत हासिल करने में मदद मिल सकती है, बशर्ते कोई अप्रत्याशित घटना न हो जाए.
(अजय झा)
असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम रही. गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक साझेदारियों और व्यापारिक संभावनाओं के नए केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.
असम चुनाव के बाद आई ADR रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. जहां एक तरफ आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों की संपत्ति में तेज उछाल दर्ज हुआ है. हिमंत बिस्वा सरमा 35 करोड़ की संपति के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके सहयोगी दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF), जिसने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा, और असम गण परिषद (AGP), जिसने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, दोनों ने 10-10 सीटें जीतीं.
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने 100 से अधिक सीटों पर लूट की है. बीजेपी ने वोटों की चोरी की है. उन्होंने मेरा घेराव किया. यह बीजेपी की अनैतिक जीत है. मैंने बंगाल चुनाव आयुक्त से शिकायत की है.
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल में जहां बीजेपी ने टीएमसी को पटखनी दे दी, तो वहीं असम में जीत की हैट्रिक लगाई. तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को सत्ता से उखाड़ फेंका, केरल में कांग्रेस ने 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया और लेफ्ट को हराकर जीत दर्ज की.
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे अपनी-अपनी सीट बचाने में असफल रहे और उन्हें बीजेपी उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा. जनता ने वंशवादी राजनीति को साफ नकार दिया है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में BJP की प्रचंड जीत के बाद पवन खेड़ा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उनका पेड़ा बना दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों से लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए और इसका असर नतीजों में दिखा. BJP गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में विशेष जनसंपर्क और योजनाओं का असर चुनाव नतीजों में साफ दिख रहा है. चाय बागान वाले छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली है. पीएम मोदी के सीधे संपर्क और विकास योजनाओं ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को बीजेपी के मजबूत किले में बदल दिया है.