राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) ने देश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक जड़ों के आधार पर शिक्षा प्रणाली का ‘भारतीयकरण’ करने की मांग की है. साथ ही इसे भारत के मानव विकास की कुंजी के रूप में प्रयोग करने की मांग रखी है.
संघ के मुख पत्र ‘आर्गेनाइजर’ के अंक में संपादकीय में ने इस बात पर भी जोर दिया है कि है. इसमें कहा गया है, ‘ढांचा और विषय वस्तु के संदर्भ में शिक्षा के प्रति हमारे रुख में बदलाव की जरूरत के बारे में आमराय बनाने की जरूरत है.
आर्गेनाइजर ने कहा है, ‘जो लोग अपना ‘पेशेवर’ और ‘बौद्धिक’ एकाधिकार खो रहे हैं, वे हंगामा कर सकते हैं लेकिन हमारी सामाजिक सांस्कृतिक जड़ों पर आधारित शिक्षा का भारतीयकरण ही भारत की आबादी को एक मानव विकास पूंजी में बदलने का एकमात्र रास्ता है.
आरएसएस के मुखपत्र में कहा गया है कि इस बदलाव को बहस और चर्चा के जरिए बहुत ही परिष्कृत तरीके से लाने की जरूरत है और कोई ‘क्रांतिकारी’ बदलाव करने की जरूरत नहीं है.
संपादकीय में कहा गया है कि जब कभी भारत में शिक्षा में बदलाव की बात होती है तो इसे भगवाकरण का नाम दे दिया जाता है. ऐसे में हमें शिक्षा के भारतीयकरण के ढांचे पर बहस और चर्चा करने की जरूरत है.