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मिनटों में विज्ञान सिखाएगा लद्दाख का ये साइंस पार्क, जानें खासियतें

लेह के पास गुरुवार 20 जून को एक साइंस पार्क का उद्घाटन किया गया. यह साइंस पार्क पुणे के एक एनजीओ ने बनवाया है. इसका उद्घाटन ड्रक पद्म स्कूल के प्रिंसिपल Stanzin Kunzang और पुणे में पढ़ रहे स्थानीय छात्रों ने किया.यहां आप आसानी से विज्ञान और गणित के सिद्धांतों को मिनटों में सीख सकते हैं. जानें क्या हैं पार्क की अन्य खासियतें.

फोटो सोशल मीडिया से फोटो सोशल मीडिया से

लेह के पास गुरुवार 20 जून को एक साइंस पार्क का उद्घाटन किया गया. यह साइंस पार्क पुणे के एक एनजीओ ने बनवाया है. इसका उद्घाटन ड्रक पद्म स्कूल के प्रिंसिपल Stanzin Kunzang और पुणे में पढ़ रहे स्थानीय छात्रों ने किया. जानें क्या हैं पार्क की खासियतें.

यह पार्क सिंधु नदी के बेहद खूबसूरत तट पर आधा एकड़ के क्षेत्र में बनाया गया है. विज्ञान पार्क में मज़ेदार खेल जैसे रिलेटिव वेलोसिटी, फ्रिक्शन, स्ट्रेंज मिरर, एलिवेटर, एंग्री बर्ड, क्विज, जाइलोफोन, लाइफ साइज्ड बोर्ड गेम मौजूद हैं. इसके अलावा यहां आपको दुनिया के जाने माने वैज्ञानिकों के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी. यहां आप आसानी से विज्ञान और गणित के सिद्धांतों को मिनटों में व्यावहारिक रूप से सीख सकते हैं. बहुत कम समय में यह पार्क आपके बच्चे की साइंस में रुचि बढ़ा सकता है.

इस पार्क को बनाने का उद्देश्य बच्चों को अपने अनुभव के जरिये विज्ञान के परसेप्शन को समझने का है. इससे स्टूडेंट में अपने आप प्रयोग करके प्रैक्टिकल ढंग से समझकर उनमें लॉजिकल थिकिंग पैदा होगी. इसे बनाने वाले असीम फाउंडेशन के प्रेसीडेंट सारंग गोसावी कहते हैं कि ये सीधे तौर पर बच्चों को साइंस से जोड़ने के लिए बना है.

एक एजुकेशन सप्लीमेंट होने के साथ, यह पार्क लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में भी मदद करेगा. वो कहते हैं कि लद्दाख साल में 6-8 महीनों के लिए बाहर से दुर्गम हो जाता है. कठोर जलवायु, बड़ा क्षेत्र और कम जनसंख्या घनत्व के कारण यहां विकास और अवसरों का अभाव है. लद्दाख को उसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों से पहचान मिलनी चाहिए. ये सेंटर इसके लिए एक नई पहचान बनाने में मदद करेगा. पुणे स्थित एनजीओ 17 वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में काम कर रहा है. लद्दाख में यह संगठन 2012 से काम कर रहा है. वर्तमान में, 8 लद्दाखी छात्र पुणे में जम्मू-कश्मीर मित्र परियोजना के तहत  उच्च शिक्षा ले रहे हैं. यहां कश्मीर के 8 स्कूली छात्र भी हैं.

गोसावी कहते हैं कि हम लोगों के समर्थन के बिना ऐसा नहीं कर सकते थे. स्थानीय समुदाय और अन्य लोग मदद के लिए आगे आए और यहां तक कि हमें अपनी जमीन की पेशकश की, हमें उपकरण और सामग्री दी, ड्रुक पद्मा स्कूल ने हमें और भी अधिक सामग्री और परिवहन प्रदान किया. उनके छात्रों ने भी कंप्यूटर रूम को सजाने के लिए साइट पर काम किया. पुणे के वास्तुकला और सामाजिक विज्ञान के छात्र शुरुआत से ही इसका एक अनिवार्य हिस्सा थे. जब हमने अपनी कमजोर वित्तीय स्थिति को सोशल मीडिया पर शेयर किया तो यहां से लोग हमारी सहायता के लिए आए. इसके बाद लगभग 1.5 लाख सामूहिक रूप से दिया. अब तक, कम से कम 9 स्थानीय स्कूल पार्क चलाने और रखरखाव में सक्रिय होंगे.

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