जब भी कोई खास मौका होता है तो गूगल, डूडल के जरिए उसे दर्शाना नहीं भूलता. आज भी एक खास मौका है. आज जेमिनिड मीटियोर शॉवर यानी उल्कापात की संभावना जताई गई है. उल्कापात यानी टूटते सितारों की बारिश. गूगल ने जेमिनिड मीटियोर शॉवर का डूडल बनाया है.
इसे 6 फोटो स्लाइड्स के जरिए दर्शाया गया है. बता दें कि उल्कापात यानी टूटते तारों की बारिश रोमांचक खगोलीय घटना है. इसे देखने का मजा कोई भी ले सकता है. आइए जानते हैं कैसे इसे देखा जा सकता है....
- रिपोर्ट्स के मुताबिक जेमिनिड मीटियोर शॉवर 2018, 4 से 17 दिसंबर तक सक्रिय होगा. लेकिन यह 13 से 14 दिसंबर की शाम से सबसे ज्यादा सक्रिय होगा.
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- ये भारत के उन शहरों में सबसे ज्यादा नजर आएगा जहां कम प्रदूषण है.
- टूटते तारों की बारिश यानी उल्कापात को आधी रात में देखना, सबसे बेहतरीन समय है. कहा जा रहा है कि दुनिया भर में ये रात 2 बजे तक काफी अच्छी तरीके से दिखेगा.
- कहा जा रहा है कि भारत में राजस्थान के अलवर, हिमालय के उत्तरी राज्य और महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में टूटते हुए तारों की बारिश साफ देखने को मिलेगी.
Don’t miss out on one of the most prolific and reliable meteor showers of the year! The Geminid meteor shower will put on a dazzling display for sky watchers when it peaks on Dec. 13. You’ll be able to see up to 100 meteors per hour. Plan ahead: https://t.co/m8nua7Qapl pic.twitter.com/Bp2Cti2TYY
— NASA (@NASA) December 13, 2018
- अगर आप भी टूटते हुए तारों की बारिश देखना चाहते हैं तो अंधेरे वाली एक जगह खोजें, और 30 मिनट तक देखें. अगर आप इस पल का भरपूर मजा लेना चाहते हैं तो कुछ देर के लिए मोबाइल फोन से दूरी बना लें. वहीं, अगर आप अपने पीठ के बल लैटकर आसमान की ओर कुछ देर के लिए देखेंगे तो आप और अच्छे से इस पल का मजा उठा पाएंगे.
- बता दें कि जैसे-जैसे रात बढ़ेगी, वैसे-वैसे जेमिनिड की दर बढ़ने लगेगी. रात 2 बजे तक ये ज्यादा बेहतर और साफ होगी. अगर आप इसे अच्छी तरह से देखना चाहते हैं तो शहर की रोशनी से दूर जाना होगा.
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क्या है जेमिनिड मीटियोर शॉवर?
मीटियोर शॉवर (उल्कापात) का नाम चमकदार, आमतौर पर एक सितारा या नक्षत्र के स्थान के नाम पर रखा गया है, जो रात में आकाश में दिखाई देते हैं. जेमिनिड उल्का शॉवर फैथॉन' (Phaethon) नाम के एस्ट्रॉयड के कारण होती है. इसे 1983 में खोजा गया था. बता दें कि तारों की बारिश उल्कावृष्टि फैथॉन नाम के एस्ट्रॉयड के कारण होती है. पृथ्वी जब क्षुद्रग्रह '3200 फैथॉन' के रास्ते से दिसंबर में गुजरती है तो ऐसा नजारा बनता है. इसमें छोटे उल्कापिंड पृथ्वी की कक्षा में आकर जल जाते हैं जिसे देख ऐसे लगता है जैसे तारों की बारिश हो रही है.