संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के रिजल्ट में 301वीं रैंक को लेकर फैल रहे भ्रम पर स्पष्टीकरण जारी किया है. हाल ही में कुछ समाचारों और सामाजिक माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि एक ही नाम की दो अभ्यर्थियों ने 301वीं रैंक मिलने का दावा किया है, जिससे अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी.
आयोग ने इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उसके अभिलेखों के अनुसार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक केवल एक ही अभ्यर्थी को मिली है. आयोग ने उम्मीदवार की सत्यापित जानकारी भी साझा की है ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे.
आयोग के अनुसार 301वीं रैंक पाने वाली अभ्यर्थी का नाम आकांक्षा सिंह है और उनका अनुक्रमांक 0856794 है. उनके पिता का नाम रंजीत सिंह और माता का नाम नीलम सिंह है.
गाजीपुर जिले के अभईपुर गांव की निवासी हैं आकांक्षा
आयोग ने यह भी बताया कि आकांक्षा सिंह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अभईपुर गांव की निवासी हैं. आयोग ने कहा कि ये सभी विवरण उसके आधिकारिक अभिलेखों से मेल खाते हैं और इससे यह पुष्टि होती है कि सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक पाने वाली अभ्यर्थी वही हैं.
क्या बोला UPSC?
संघ लोक सेवा आयोग ने 301वीं रैंक को लेकर फैल रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए अभ्यर्थी से जुड़ी जानकारी साझा की है. आयोग का कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम देशभर में व्यापक चर्चा का विषय बनते हैं, इसलिए नाम या रैंक से जुड़ी कोई भी भ्रम की स्थिति तेजी से सामाजिक माध्यमों और समाचारों में फैल जाती है.
अधिकारियों के अनुसार, परिणाम को लेकर किसी तरह की गलत जानकारी फैलने से रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है.
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिस्पर्धी भर्तियों में से एक मानी जाती है. यह परीक्षा हर वर्ष आयोजित की जाती है, जिसके माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय विदेश सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है.
हर साल लाखों अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण पास करने के बाद ही बहुत कम अभ्यर्थी अंतिम चयन सूची तक पहुंच पाते हैं.
अब आयोग के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक केवल एक ही अभ्यर्थी को मिली है और परिणाम घोषित होने के बाद जो भ्रम की स्थिति बनी थी, वह पूरी तरह समाप्त हो गई है.