कबड्डी....कबड्डी...कबड्डी... खेल के मैदान में बचपन जीने वालों के लिए ये तीन शब्द एनजी देने वाले किसी मंत्र से कम नहीं. बचपन का सबसे खूबसूरत खेल दुनिया के तमाम देशों में खेला जाता है. भारत में तो कबड्डी को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है. कहते हैं कि कबड्डी सबसे पहले अभिमन्यु से जानी जाती है. चार दिन बाद प्रो कबड्डी लीग शुरू हो रहा है, आइए इससे पहले जानते हैं, कबड्डी के पूरे इतिहास को.
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार जब महाभारत युद्ध में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु के लिए कौरवों ने चक्रव्यूह रचाया. ये सात युद्ध वीरों से सजा हुआ एक चक्रव्यूह था. इसे अभिमन्यु भेदने में तो सफल हो गया, लेकिन इससे बाहर नहीं निकल सका. वो युद्ध में ही वीरगति को प्राप्त हो गया. इसे कबड्डी से जोड़कर देखने का एक पहलू ये भी है. आगे पढ़ें.
मान्यता है कि अभिमन्यु के चक्रव्यूह को भेदने का पूरा तरीका ही कबड्डी पर आधारित था. कहते हैं कि ठीक चक्रव्यूह की तरह ही कबड्डी में एक तरफ सात खिलाड़ी रखने का नियम भी इसीलिए है. तब से गुरुकुलों में शिष्यों को कबड्डी सिखाया जाने लगा. इस तरह ये घर-घर में फेमस हो गया.
इतिहासकार कबड्डी के बारे में दूसरा ही तथ्य देते हैं. इतिहास के मुताबिक कबड्डी तमिलनाडु राज्य से आया खेल है. इसका नाम भी तमिल शब्द काइपीडी से बना है, जिसका अर्थ हाथ पकड़े रहना होता है. वहीं 1915 से 1920 के बीच कबड्डी का क्रेडिट महाराष्ट्र को दिया जाता है.
एक तरह से देखा जाए तो कबड्डी के इतिहास को लेकर आज भी विवाद है. भले ही इसे भारतीय खेल कहा जाता है लेकिन इस खेल में भारत के साथ प्रतिष्पर्धा करने वाला देश ईरान का दावा है कि कबड्डी उनके देश की उत्पत्ति है.
प्रो कबड्डी लीग में खेलने वाले ईरान के खिलाड़ी मेराज शेख ने मीडिया को बयान दिया था कि जहां उनका जन्म हुआ वो जिला सिस्तान है. उनका दावा है कि सिस्तान में इस खेल का जन्म लगभग 5000 साल पहले हुआ था. ESPN से बातचीत में उन्होंने कहा था कि ईरान इस खेल की असल जन्मभूमि है. वो बताते हैं कि इसका जिक्र कई पुरानी किताबों में भी किया गया है.
सिर्फ इरान ही नहीं हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश ने तो इस खेल को अपना राष्ट्रीय खेल घोषित किया है. बीजिंग ने 1990 के एशियन गेम्स में कबड्डी को शामिल किया गया.