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जानें- क्या है विश्व आर्थिक मंच, भारत के लिए इसलिए खास है यह बैठक

जानें- क्या है विश्व आर्थिक मंच, भारत के लिए इसलिए खास है यह बैठक
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विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की वार्षिक बैठक का आयोजन दावोस में होने जा रहा है. इस बैठक में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 6 कैबिनेट मंत्री, 2 मुख्यमंत्री और 100 से भी ज्यादा सीईओ शिरकत करेंगे. आइए जानते हैं विश्व आर्थिक मंच क्या है और इस बार की बैठक में क्या खास है...
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विश्व आर्थिक मंच गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए व्यापार, राजनीति, शिक्षा और समाज के अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर दुनिया की स्थिति में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसका मुख्यालय जिनेवा में है. साथ ही यह संस्था विश्व के प्रमुख व्यावसायिक, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक नेताओं, विशिष्ट बुद्धिजीवियों और पत्रकारों के लिए वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का एक महत्त्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती है.
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इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम श्वाब द्वारा की गई थी. उस साल यूरोपियन कमीशन और यूरोपियन प्रोद्योगिकी संगठन के सौजन्य से इस संगठन की पहली बैठक हुई थी. बता दें कि इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तर पर होती है और ये स्तर उनकी संस्था के काम में सहभागिता पर निर्भर करती है.
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इस फोरम का सबसे चर्चित इवेंट यह शीतकालीन बैठक होती है, जो कि आज से शुरू होने जा रही है. यह बैठक दावोस नाम के शहर में आयोजित की जाती है और कई मुद्दों का हल इस बैठक में निकल जाता है. इस बैठक में करीब 2500 लोग भाग लेते हैं. हर साल इस बैठक का मुख्य मुद्दा या थीम अलग होती है. इस बार  इस बार थीम है- 'विभाजित दुनिया के लिए साझा भविष्य का निर्माण'.

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साल 2017 में 'संवेदनशील और जिम्मेदार नेतृत्व', 2016 में 'मास्टरिंग द फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन' और 2015 में 'नए वैश्विक सन्दर्भ' थीम थी. इस साल 48वीं बैठक का आयोजन होने जा रहा है.
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इस बार क्या है खास- इस बार डब्ल्यूटीओ, आईएमएफ और विश्व बैंक सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 38 प्रमुख भी इसमें उपस्थित होंगे. इसके अलावा विभिन्न देशों के 2,000 कंपनियों के सीईओ भी इसमें शिरकत करेंगे. इस साल की थीम ‘Creating a Shared Future in a Fractured World’ यानी 'बटी हुई दुनिया के लिए साझा भविष्य का निर्माण है'. वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम 2018 में ऐसा पहली बार हो रहा है कि बड़ी संख्या में महिलाएं कई सत्र को मॉडरेट और संबोधित करेंगी.
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भारत के लिए ऐतिहासिक- विश्व आर्थिक मंच की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी प्लेनेरी सत्र को संबोधित करेंगे. अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत की विकास गाथा को वैश्विक मंच पर रखेंगे और दुनिया को भारत, जो कि न्यू इंडिया और इनोवेटिव इंडिया बनने को तैयार है उस से रूबरू कराएंगे. 22 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी स्विटज़रलैंड के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.
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ऐसा पहली बार हो रहा है कि इस बार दावोस में भारत के दो आचार्य भी शिरकत करेंगे, जो कि योग-सत्र को आयोजित करेंगे. इस बार दावोस में बॉलीवुड का तड़का भी देखने को मिलेगा जब बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी स्त्री सशक्तिकरण के सत्र को संबोधित करेंगे. सम्मेलन में सह-अध्यक्षता महिलाएं ही करेंगी जिनमें भारत की चेतना सिन्हा और आईएमएफ की क्रिस्टिने लेगार्ड शामिल हैं.
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दो दशक बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में शामिल होगा. इससे पूर्व 1997 में  प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और 1994 में प्रधानमंत्री नरसिंहराव यहां गए थे.
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मोदी के नेतृत्व में इस सम्मेलन में भाग लेने वाला चौथा सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल होगा. इसमें अमेरिका का सबसे बड़ा 780 सदस्यों का, ब्रिटेन से 266, स्विटजरलैंड से 233 और चीन से 118 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा.
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भारत को हो सकता है ये फायदा- भारत को निवेशक मिल सकते हैं और विदेशी कंपनी को नए टैक्स कानूनों का फायदा मिलेगा. व्यापार की दृष्टि से बहुत बड़ा देश होने की वजह से सभी देशों की निगाहें भारत पर रहेगी.