कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पूछे गए एक सवाल के बाद से नेशनल कैडेट कोर यानि एनसीसी सुर्खियों में है. दरअसल एनसीसी के सी सर्टिफिकेट को लेकर राहुल गांधी से एक सवाल पूछा गया था, जिसके बाद लोग एनसीसी और सी सर्टिफिकेट के बारे में सर्च कर रहे हैं. लेकिन आपको बता दें कि एनसीसी की तरह भारत में कई ऐसे स्टूडेंट विंग हैं, जो सामाजिक कार्य करते हैं. आइए जानते हैं उन संगठनों के बारे में...
एनसीसी- एनसीसी एक सेवा संगठन है. इसका उद्देश्य युवा नागरिकों में चरित्र निर्माण, भाई-चारा, अनुशासन, धर्म निरपेक्ष दृष्टिकोण, साहसिक भावना और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों का विकास करना है. एनसीसी से जुड़े कैडेट गणतंत्र दिवस की परेड में भी हिस्सा लेते हैं और प्राकृतिक आपदा या अन्य कोई समस्या होने पर सेना का साथ देते हैं. एनसीसी के बाद सेना में एंट्री थोड़ी आसान हो जाती है. इसकी ट्रेनिंग कॉलेज-स्कूल स्तर पर करवाई जाती है.
एनएसएस- यह नेशनल सर्विस स्कीम होती है, जो कि एनसीसी से अलग है. यह भी एक स्टूडेंट विंग है जो कि सामाजिक कार्य जैसे- पौधरोपण, सफाई अभियान, अनाथ आश्रम को लेकर सामाजिक कार्य करते हैं. यह संगठन मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में भी सक्रिय थी. समाज के लिए कुछ कार्य करने के इच्छुक उम्मीदवार इससे जुड़ सकते हैं और कॉलेज स्तर पर लोग इससे जुड़े रह सकते हैं.
स्काउट एंड गाइड- स्काउट एंड गाइड को एनसीसी की जूनियर इकाई कहा जा सकता है. यह साल 1909 से भारत में सक्रिय है और यह स्कूल स्तर तक ही सक्रिय होती है. स्काउट के लिए ट्रेनिंग स्कूल में ही दी जाती है और जूनियर स्तर के आधार पर वो स्काउट से जुड़े लोग सामाजिक कार्य करते हैं.
एनवाईकेएस- ग्रामीण युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेने और इसके साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और कौशल विकास के सुअवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नेहरू युवा केन्दों की स्थापना 1972 में की गई थी. इन केन्द्रों के कार्य को देखने के लिए साल 1987-88 में नेहरू युवा केन्द्र संगठन की स्थापना युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त शासी संस्था के रूप में की गई थी. यह स्वैच्छिक, स्व-सहायता और सामुदायिक प्रतिभागिता के सिद्धांतों के आधार पर 13-35 वर्ष के युवाओं की शक्ति को सही दिशा देता है. इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में शामिल करना और उनमें ऐसे कौशल और मूल्यों को विकसित करना है, जिससे कि वो आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और तकनीकी राष्ट्र के उत्तरदायी और अच्छे नागरिक बन सकें.
द इंडियन रेड क्रॉस- भारत में द इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना साल 1920 में की गई. पूरी दुनिया की तरह भारत में भी रेड क्रॉस का चिन्ह मानवीय सेवा के एक प्रतीक के तौर पर उभरा. भारत 1949 के उस जिनेवा कन्वेंशन का भी हिस्सा रहा, जिसमें रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट के चिन्ह को सेना के मेडिकल सर्विस में इस्तेमाल करने की घोषणा की गई. यह संगठन देश में आपदा, आपातकाल के वक्त लोगों को राहत पहुंचाते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के लिए काम करते हैं.