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एजुकेशन

1947 से बालाकोट तक, भारतीय वायुसेना ने हर बार PAK को चखाया मजा

1947 से बालाकोट तक, भारतीय वायुसेना ने हर बार PAK को चखाया मजा
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भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट में किए हमले ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को  मुंहतोड़ जवाब दे दिया.  जहां भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट मिराज 2000 के जरिए पाकिस्तान पर 1000 किलो के बम गिराए गए. इस अभियान को 12 मिराज 2000 ने अंजाम दिया. बता दें, भारतीय वायुसेना दुनिया में चौथी सबसे खतरनाक वायु सेना है. वहीं ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब वायुसेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाया हो. इससे पहले वह मजा चखा चुकी है. आइए जानते हैं कितनी ताकतवर हैं भारत की वायुसेना, साथ ही जानते हैं वायुसेना के अहम ऑपरेशन के बारे में जिसमें पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी.
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भारतीय वायु सेना यानी इंडियन एयर फोर्स भारतीय सशस्त्र बलों की हवाई शाखा है. इसकी प्रमुख भूमिका भारतीय हवाई सीमा की कड़ी निगरानी और सुरक्षित रखना और युद्धल के दौरान हवाई हमले करना. वायु  सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को गई थी. जिसमें 25 सैनिकों की ताकत थी, जिनमें से 19 लड़ाकू पायलट थे. जिसके बाद लागातार वायु सेना में आधुनिकीकरण विस्तार आते रहे और एक ऐसी सेना बनकर उभरी. 

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पाकिस्तान के साथ 1947 का युद्ध

आजादी मिलने के बाद वायु सेना की परीक्षा हुई. जहां कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जंगल छिड़ गई. जहां पहली बार इस युद्ध में भारतीय वायु सेना की तैनात किया गया था.  भारत ने पहले ही युद्ध के मैदान में पाकिस्तान को हराया दिया था.
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1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध

हवा में भारत और पाकिस्तान के बीच ये पहला युद्ध था. विश्व युद्ध द्वितय के बाद ये वह ऑपरेशन था जिसमें वायु सेना ने बड़ी भूमिका निभाई थी.   हालांकि तकनीकी रूप से पाकिस्तानी वायु सेना मजबूत थी लेकिन भारतीय वायु सेना ने उसको मात देने में सफलता पाई. इस युद्ध के दौरान PAF (पाकिस्तान एयर फोर्स) ने अपने 186 विमानों में से 43 को खो दिया था.
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1999 में कारगिल युद्ध

भारतीय वायुसेना ने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई गई थी. ऐसा पहली बार हुआ था जब पहली बार वायुसेना का उपयोग  32,000 फीट की ऊंचाई पर किया गया था. इस युद्ध में IAF ने मिराज 2000 विमान का इस्तेमाल किया गया था. 26 जुलाई 1999 को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जंग जीत ली थी. इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.


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पाकिस्तान से 1971 का युद्ध: यह युद्ध पूर्वी पाकिस्तान को लेकर हुआ था. साल 1971 के युद्ध में करीब 3,900 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, इसमें भारतीय वायु सेना ने अहम भूमिका निभाई थी जिसमें भारतीय वायुसेना ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी. इसके अलावा, वायुसेना ने बड़े पैमाने पर हवाई सहायता प्रदान करके भारतीय सेना और नौसेना की मदद की. इस युद्ध में कुल 94 पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया गया.


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वायुसेना देश राहत कार्यों में भी देश की मदद करती है. एक नजर डालते हैं उन प्राकृतिक आपदाओं पर जहां वायुसेना ने जी जान लगाकार देशवासियों की सेवा की.

2004 में आई सुनामी

26 दिसंबर 2004 को 9.1 तीव्रता का एक भयानक भूकंप आई थी जिसमें वायु सेना के ऑफिसर ने काफी मदद की थी. इंडोनेशिया के पश्चिमी तट पर आई विनाशकारी सुनामी के एक घंटे के भीतर भारत के पूर्वी तट पर पहुंच गई थी, जिसमें वायु सेना ने राहत कार्यों के साथ-साथ खोज और बचाव में मदद की.


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2013 केदारनाथ त्रासदी (ऑपरेशन राहत)

ऑपरेशन राहत दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक बचाव अभियान था.. भारतीय वायुसेना ने लोगों को भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई. ‘ऑपरेशन राहत’ में करीब 20,000 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया था.  वहीं  बिना IAF की मदद के लोगों के पास आवश्यक सभी चीजें प्रदान करना बहुत मुश्किल हो पाता.


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2018 में आई केरल बाढ़

केरल में बाढ़ आने के बाद थलसेना, नौसेना और एनडीआरएफ के साथ वायुसेना ने भी लोगों की मदद की, जहां बाढ़ से ग्रस्त वायुसेना ने छत पर चॉपर उतारकर लोगों की मदद की.
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चौथी ताकतवर वायुसेना: आंकड़ो के अनुसार 1,70,000 सैनिकों और 1,500 विमानों के साथ, यह अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है. यह जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और जापान की तुलना में भारतीय वायुसेना मजबूती में सातवें नंबर पर है.
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आदर्श वाक्य "नभ स्पर्षम दीप्तिम" भगवत गीता के ग्यारहवें अध्याय से लिया गया है. जिस तरह से भगवान कृष्ण अर्जुन को अपना दिव्य रूप दिखाते हैं, उसी तरह से, भारतीय वायु सेना का लक्ष्य है कि देश की रक्षा के लिए हवा में विरोधियों को हिला देना है. इस संग्राहलय में भारतीय वायुसेना की यादगार उड़ानों और स्वर्णिम इतिहास को कर रखा गया है नई दिल्ली में इसका अपना संग्रहालय है. इसमें  भारतीय वायुसेना की उड़ानों का यादगार संग्रह है जो भारतीय वायु सेना के इतिहास को प्रदर्शित करता है.



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आपको बता दें,  वायुसेना का सबसे ऊंचा पद 2002 में मार्शल  अर्जन सिंह को  अपनी सेवाओं के लिए 'फाइव स्टार' पद से नवाजा गया  यह पद प्राप्त करने वाले वे एकमात्र जवान है. अर्जन सिंह को जब वायु सेना प्रमुख बनाया गया था तो उनकी उम्र उस वक्त महज 44 साल थी और आजादी के बाद पहली बार लड़ाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उनके ही हाथ में थी.  बता दें, वर्तमान में भारतीय वायु सेना के चीफ एयर मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ है. वहीं भारत के राष्ट्रपति भारतीय वायुसेना के सुप्रीम कमांडर होते हैं.
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