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कौन है राकेश मंडावरिया? जिसके पास पहुंचा था NEET का 'सीक्रेट' गेस पेपर, जांच में कई अहम खुलासे

देश की कठिन और सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी नीट में एक बार फिर से पेपर लीक की आशंका गहरी होती जा रही है. केरल से सीकर आया नीट का गेस पेपर में 720 नंबर के प्रश्नों में से 600 नंबर के सवाल हूबहू मिल रहे थे. इसके बाद से जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं. सबसे पहले ये गैस पेपर सीकर में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन कराने वाले एक काउंसिलर राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल से छात्रों के पास पहंचे.

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NEET Paper Leak
NEET Paper Leak

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 पर उठे सवाल अब और गहरे होते जा रहे हैं. 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा के बाद जिस पेपर लीक की आशंका ने सुर्खियां बटोरी थीं, अब उसकी जांच में ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. जांच में सामने आया है कि सबसे पहले ये गेस पेपर सीकर में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन कराने वाले एक काउंसिलर राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल पर आया.  

परीक्षा के कुल 720 नंबर के सवालों में से करीब 600 नंबर के सवाल दो दिन पहले ही सीकर में छात्रों तक पहुंच चुके थे. बड़ी बात है कि नीट परीक्षा में पूछे सवालों के उत्तर के ऑप्शन भी गैस पेपर के प्रश्नों के क्रमों में है.

कौन हैं राकेश कुमार मंडावरिया? 

राकेश कुमार मंडावरिया समर्थपुरा, तहसील खंडेला, सीकर का रहने वाले हैं. वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटा है, जिनमें पांच भाई और एक बहन शामिल हैं. परिवार की जानकारी के अनुसार एक भाई शिक्षक है और उसकी पत्नी ग्राम पंचायत नायनपुर में सरपंच है. एक भाई ऑपरेटर के पद पर काम करता है. एक भाई बेलदार के पद पर है. बहन का विवाह हो चुका है. परिवार में एक रिश्तेदार डॉक्टर भी बताया जा रहा है.

राकेश की माता का नाम कमला देवी है. ग्रामीणों के अनुसार राकेश करीब 15 वर्षों से गांव से बाहर रह रहा है. उसने 10वीं कक्षा के बाद ही गांव छोड़ दिया था. जानकारी के मुताबिक उसने बीडीएस की पढ़ाई शुरू की थी, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उसने कोर्स पूरा किया या बीच में ही छोड़ दिया. पिछले करीब चार से पांच वर्षों से वह सीकर की पिपराली रोड स्थित एक कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस संचालित कर रहा है. 

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इन बातों का भी हुआ खुलासा 

जांच में कई बातों का खुलासा हुआ है. जांच में बताया गया है कि यह कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ केवल व्हाट्सएप तक सीमित नहीं था. कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए भी इसे शेयर किया गया है. कुछ चैट्स में फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स भी दिखाई दे रहे हैं. एसओजी इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं इसके प्रिंटआउट निकालकर ऑफलाइन तो इनको नहीं बांटा गया है. पूरे मामले में सीकर का एक पीजी संचालक भी जांच एजेंसी के रडार पर आ गया है. परीक्षा खत्म होने के बाद इसी संचालक ने उद्योग नगर थाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को शिकायत देकर दावा किया था कि बड़ी संख्या में छात्रों के पास संदिग्ध ‘क्वेश्चन बैंक’ पहुंचा है.

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